shivpuri, खनियाधाना मे भक्ति की धर्म की गंगा,गुरू चरणो मे समर्पित समूचा नगर

Adhiraj Awasthi

खनियांधाना। धर्मनगरी खनियाधाना आज गुरु-भक्ति के अनूठे रंग में पूरी तरह सराबोर नजर आई। तीर्थोदय क्षेत्र गोलाकोट महोत्सव के ऐतिहासिक पंचकल्याणक महोत्सव के सफलतापूर्वक संपन्न होने के उपरांत, निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ का नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। मुनि संघ ने सुबह लगभग 6:30 बजे गोलाकोट से बिहार प्रारंभ किया, जिसमें शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। बड़ी संख्या में भक्त अपने निजी वाहनों और बसों के साथ पहुंचे, वहीं नन्हे-मुन्ने बच्चों का उत्साह भी देखते ही बन रहा था जो गुरुवर के साथ कदम से कदम मिलाकर पद विहार कर रहे थे।

जैसे ही मुनि संघ ने नगर की सीमा में प्रवेश किया, पूरा वातावरण जयकारों और गुरु-भक्ति की लहर से गुंजायमान हो गया। मुनिश्री के आगमन पर निकाला गया भव्य जुलूस अत्यंत मनमोहक और वैभवशाली था। जुलूस की शुरुआत में खनियांधाना बालिका मंडल की सदस्याएं स्कूटी पर सवार होकर अनुशासन के साथ चल रही थीं, जिनके पीछे 'जिन शासन रेजिमेंट' और 'जिन शासन प्रभावना समूह' की महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर मंगल कलश धारण कर मंगल गान करती हुई आगे बढ़ रही थीं। इस दौरान महिला समिति खनियाधाना और दिव्य घोष की मधुर ध्वनियों के साथ ढोल, बैंड-बाजे और डीजे की गूँज ने पूरे नगर को उत्सवमय बना दिया।

नगर में सांप्रदायिक सौहार्द की एक अनुपम मिसाल भी देखने को मिली। मुनिश्री के स्वागत के लिए पूरे खनियांधाना को दुल्हन की तरह सजाया गया था और मार्ग में आकर्षक रंगोलियां उकेरी गई थीं। विशेष बात यह रही कि गुरुवर की अगवानी में केवल जैन समाज ही नहीं, बल्कि सर्वसमाज के लोग भी पूरी श्रद्धा के साथ उमड़ पड़े। नगर के विभिन्न वर्गों के नागरिकों ने जगह-जगह गुरुवर के चरणों को पखारा, उन पर पुष्प वर्षा की और श्रद्धापूर्वक नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। भक्ति का यह विहंगम दृश्य देख ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो समूचा नगर ही गुरु चरणों में समर्पित हो गया हो।

भव्य नगर भ्रमण के पश्चात मुनि संघ का पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में मंगल पदार्पण हुआ, जहां मुनिश्री ससंघ विराजमान हुए। इसके उपरांत मुनि श्री के मुखारविंद से प्रवचनों की अमृत वर्षा हुई। गुरुवर के आगमन ने खनियाधाना में आगामी पंचकल्याणक महोत्सव की तैयारियों को नई ऊर्जा दे दी है। मुनिश्री के सानिध्य को पाकर समस्त नगरवासियों में भारी हर्ष व्याप्त है और चारों ओर धर्म की प्रभावना बढ़ रही