shivpuri,कोर्ट रोड पर स्थित सेठ टोडरमल ट्रस्ट की संपत्ति की बिक्री पर कोर्ट ने लगाई रोक

Adhiraj Awasthi

शिवपुरी। प्रधान जिला न्यायाधीश ने सेठ टोडरमल सुफारिश्मल लोक न्यास समिति की संपत्ति की बिक्री की संभावना से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि लोक न्यास अधिनियम के तहत इस संपत्ति की बिक्री नहीं हो सकती।

इससे पहले ट्रस्ट संपत्ति की बिक्री के लिए मुकेश जैन कलेक्टर कोठी के पास ने आवेदन कलेक्टर शिवपुरी ने खारिज कर दिया था। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम ने जांच कर ट्रस्ट में नए न्यासियों की नियुक्ति कर दी। कलेक्टर ने इस कार्रवाई को निरस्त कर स्वयं जिला न्यायालय में आवेदन पेश किया। इस पर नए न्यासियों ने न्यायालय में अपील की। न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के लिए विज्ञप्ति जारी की। इस पर ट्रस्ट के किराएदार भगवान दास गर्ग शिवराम मेडिकल वाले,अंकित सांखला और सहकारी बैंक प्रबंधन ने संपत्ति की बिक्री पर आपत्ति जताई,कोर्ट रोड पर स्थित इस संपत्ति मे सेठ टोडरमल धर्मशाला,दुर्गा टॉकीज,सहकारी बैंक है,इसके अतिरिक्त आधा सैकड़ा भी दुकानदार है।

कोर्ट ने पाया कि वर्ष 1959 में लेख डीड तैयार हुई। 1967 में सेठ टोडरमल और सेठ सुफ़रिश्मल ओसवाल ने लोक न्यास समिति बनाई। डीड के अनुसार ट्रस्ट की संपत्ति धार्मिक कार्यों और धर्मशाला के लिए दी गई। संपत्ति की बिक्री पर रोक है।

ट्रस्ट में तीन अन्य ट्रस्टी बनाए गए थे। 1967 में नियुक्त न्यासियों के निधन के बाद 57 साल तक कोई नई नियुक्ति नहीं हुई। डीड के अनुसार मूल न्यासियों के वारिस ही ट्रस्टी होंगे। किसी परिवार का स्थान खाली हो तो ओसवाल समाज शिवपुरी से ट्रस्टी चुना जाएगा। वर्तमान में सेठ टोडरमल और सुफारिश्मल के वारिस ही मौजूद हैं। इसलिए इन्हें ट्रस्टी नियुक्त किया गया। कोर्ट ने कहा कि ट्रस्ट के संचालन के लिए आय जरूरी है। ट्रस्टी नहीं होंगे तो ट्रस्ट नहीं चल सकेगा। इसलिए ट्रस्टी नियुक्त करना जरूरी है। दोनों मामलों में आदेश देकर जिला न्यायालय ने दस्तावेज आगे की कार्रवाई के लिए कलेक्टर शिवपुरी को भेजे।

जिला न्यायालय द्वारा किरायेदारों के आपत्ति आवेदन को अस्वीकार करने के अलावा उनके ट्रस्ट संपत्ति पर लंबे वक्त से बने रहने के व्यवहार पर की गई अतिरिक्त टिप्पणी को किराएदार द्वारा उच्च न्यायालय के समक्ष आधारहीन होने के कारण चुनौती दी गई, जिसे न्यायालय की एकल पीठ द्वारा स्वीकार किया। उच्च न्यायालय द्वारा जिला न्यायालय की टिप्पणी को साक्ष्य के अभाव, एवं केवल अनुमान पर आधारित होने के कारण हटा दिया।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ वकील
प्रकरण में पैरवी करने वाले अधिवक्ता सूर्य कुमार जैन ने बताया कि न्यास डीड लेखन अनुसार चूंकि वर्तमान में 3 न्यासी परिवारों के वारिसों गैरहाजिरी है, इसलिए ओसवाल समाज की ओर से न्यासी नियुक्त किया जाना संभव है।

अधिवक्ता अंचित जैन ने बताया कि जिला
न्यायालय में बताया चूंकि डीड में संपत्ति का विक्रय वर्जित है, इसलिए संपत्ति को जीर्णशीर्ण बताकर जीर्णोद्धार के लिए विक्रय करने का प्रयास ग़लत है। उच्च न्यायालय ने भी याचिकाकर्ता किराएदार के नियमित भुगतान को देखने के बाद ही उनके पक्ष में आदेश दिया।