बिना वैध अनुमति या परमिट के सागौन (Teak) का वृक्ष काटना भारत में एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए भारी जुर्माना और जेल की सजा हो सकती है। नियम के उल्लंघन पर भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। बिना परमिट के सागौन काटने पर 6 महीने से 3 साल तक की जेल और भारी जुर्माना हो सकता है। कुछ मामलों में, एक पेड़ काटने पर लाखों रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
इस सब के बाबजूद रविवार के दिन जब विद्यालय का अवकाश था, तब प्रभारी प्राचार्य रामनिवास जाटव द्वारा इस घटना को अंजाम दिया गया, ताकि किसी को पता न चले और कोई विरोध न कर पाए। जबकि अतिरिक्त कक्ष विद्यालय प्रांगण में किसी दूसरी खाली जगह पर भी बनबाया जा सकता था, परंतु फिर भी बिना बिचार किये प्रांगण में खड़े सागौन के वृक्ष को कटवा दिया गया।
नियमों के अनुसार, पेड़ काटने के लिए वन विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब सरकार प्रदेश को हरा-भरा बनाने के लिए वृक्षारोपण अभियान चला रही है जिसके तहत शासकीय भवनों और विद्यालयों में निरंतर वृक्षारोपण किया जा रहा है ।



