शिवपुरी। शिवपुरी जिले की मंडियों का हालत दयनीय है इस कारण किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पडा रह रहा है। किसानों की सही उपज और सही भाव दिलाने का भार कृषि उपज मंडियों पर है,लेकिन मंडियो मे जिम्मेदारी अधिकारी नहीं होने के कारण किसान हितों की सुरक्षा नहीं हो पा रही है। शिवपुरी जिले में कुल 11 कृषि उपज मंडी और 4 उप-मंडियां संचालित हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश में स्थायी सचिव न होने से कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है,शिवपुरी जिले की मंडियों में कम तौल और सही भाव नहीं मिलने के की खबरें लगातार आती रहती है,लेकिन समस्या नहीं सुलटती है,शिवपुरी जिले में कोई भी किसान नेता नहीं है इस कारण किसानों की समस्या बनी रहती है।
सचिवों की भारी कमी और प्रभार का बोझ
शिवपुरी और बैराड़ जैसी बड़ी मंडियां पिछले 22 दिनों से बिना किसी स्थाई सचिव के संचालित हो रही थीं। जिले के अन्य क्षेत्रों जैसे पिछोर, खनियाधाना और रन्नौद का पूरा प्रभार केवल एक ही सचिव, विश्वनाथ सिंह के पास है। इसी प्रकार बदरवास और कोलारस मंडी का प्रभार रियाज खान संभाल रहे हैं। कई मंडियों और उप-मंडियों (लुकवासा, नरवर, भौंती, बामोर कला) को केवल कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दिया गया है। हालांकि, सोमवार देर शाम शिवपुरी मंडी में नए सचिव ने पदभार ग्रहण किया है।
स्टाफ की कमी से कामकाज ठप
केवल सचिव ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्टाफ की भी भारी कमी है,शिवपुरी मंडी का में नाकेदार के 12 पदों के मुकाबले महज 3 और बाबुओं के 5 पदों के मुकाबले केवल 2 कर्मचारी कार्यरत हैं। पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण सरसों की बंपर आवक के समय डाक बोली लगाने में भारी दिक्कत आ रही हैं। कुछ स्थानों पर निजी कर्मचारी डाक बोली का काम संभाल रहे हैं। शिवपुरी और बैराड़ मंडी के लगभग आधा सैकड़ा कर्मचारियों का फरवरी माह का वेतन अभी तक नहीं मिल पाया है। साथ ही, बिजली बिल और अन्य कार्यालयीन खर्चों का भुगतान भी महीनों से लटका हुआ है।
अव्यवस्था का खामियाजा: किसान और व्यापारी परेशान
पर्याप्त स्टाफ और निगरानी न होने के कारण मंडियों में माल की चोरी और व्यापारियों द्वारा टैक्स चोरी की खबरें भी सामने आ रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि सचिव न होने से समय पर डाक बोली नहीं लगती, जिससे उनका पूरा दिन बर्बाद होता है।
अधिकारियों का आश्वासन
मंडी बोर्ड ग्वालियर के डी.एस., डी.के. शर्मा के अनुसार, शिवपुरी में नए सचिव बालेश शुक्ला ने ज्वाइन कर लिया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि अगले 10 से 15 दिनों के भीतर अन्य रिक्त मंडियों में भी सचिवों की पदस्थापना कर दी जाएगी और स्टाफ की कमी को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सचिवों की भारी कमी और प्रभार का बोझ
शिवपुरी और बैराड़ जैसी बड़ी मंडियां पिछले 22 दिनों से बिना किसी स्थाई सचिव के संचालित हो रही थीं। जिले के अन्य क्षेत्रों जैसे पिछोर, खनियाधाना और रन्नौद का पूरा प्रभार केवल एक ही सचिव, विश्वनाथ सिंह के पास है। इसी प्रकार बदरवास और कोलारस मंडी का प्रभार रियाज खान संभाल रहे हैं। कई मंडियों और उप-मंडियों (लुकवासा, नरवर, भौंती, बामोर कला) को केवल कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दिया गया है। हालांकि, सोमवार देर शाम शिवपुरी मंडी में नए सचिव ने पदभार ग्रहण किया है।
स्टाफ की कमी से कामकाज ठप
केवल सचिव ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्टाफ की भी भारी कमी है,शिवपुरी मंडी का में नाकेदार के 12 पदों के मुकाबले महज 3 और बाबुओं के 5 पदों के मुकाबले केवल 2 कर्मचारी कार्यरत हैं। पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण सरसों की बंपर आवक के समय डाक बोली लगाने में भारी दिक्कत आ रही हैं। कुछ स्थानों पर निजी कर्मचारी डाक बोली का काम संभाल रहे हैं। शिवपुरी और बैराड़ मंडी के लगभग आधा सैकड़ा कर्मचारियों का फरवरी माह का वेतन अभी तक नहीं मिल पाया है। साथ ही, बिजली बिल और अन्य कार्यालयीन खर्चों का भुगतान भी महीनों से लटका हुआ है।
अव्यवस्था का खामियाजा: किसान और व्यापारी परेशान
पर्याप्त स्टाफ और निगरानी न होने के कारण मंडियों में माल की चोरी और व्यापारियों द्वारा टैक्स चोरी की खबरें भी सामने आ रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि सचिव न होने से समय पर डाक बोली नहीं लगती, जिससे उनका पूरा दिन बर्बाद होता है।
अधिकारियों का आश्वासन
मंडी बोर्ड ग्वालियर के डी.एस., डी.के. शर्मा के अनुसार, शिवपुरी में नए सचिव बालेश शुक्ला ने ज्वाइन कर लिया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि अगले 10 से 15 दिनों के भीतर अन्य रिक्त मंडियों में भी सचिवों की पदस्थापना कर दी जाएगी और स्टाफ की कमी को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।