Shivpuri News, कर्ज लेकर नीयत बदली तो जेल, कोर्ट ने मनीष रावत को सुनाई सश्रम कारावास की सजा

Adhiraj Awasthi

शिवपुरी। अपनी पारिवारिक और व्यावसायिक जरूरतों के लिए उधार ली गई रकम को वापस न करना एक व्यक्ति को भारी पड़ गया। शिवपुरी के माननीय न्यायालय ने चेक बाउंस के एक मामले में आरोपी मनीष रावत को दोषी करार देते हुए 6 माह के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, न्यायालय ने आरोपी पर 1,60,882 रुपये का प्रतिकर (मुआवजा) भी लगाया है।

क्या था पूरा मामला? परिवाद के अनुसार, अहीर मोहल्ला पुरानी शिवपुरी निवासी आरोपी मनीष रावत ने अपने परिचित वीरेन्द्र सिंह यादव से 12 जून 2021 को 1 लाख 10 हजार रुपये उधार लिए थे। इस ऋण के भुगतान के एवज में मनीष ने आगामी तारीख का एक चैक वीरेन्द्र को सौंपा था। जब वीरेन्द्र सिंह यादव ने इस चेक को बैंक में जमा किया, तो खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण बैंक ने इसे वापस कर दिया।

5 साल की कानूनी लड़ाई के बाद न्याय चेक बाउंस होने के बाद फरियादी ने अपने अधिवक्ता गजेन्द्र सिंह यादव के माध्यम से आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन मनीष ने भुगतान नहीं किया। अंततः मामला न्यायालय में पहुँचा। करीब 5 वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्रीति परिहार ने आरोपी को धारा 138 परक्राम्य लिखित अधिनियम (Negotiable Instruments Act) के तहत दोषी पाया।

न्यायालय का सख्त रुख माननीय न्यायालय ने आरोपी मनीष रावत को सजा सुनाते हुए स्पष्ट किया कि यदि वह 1,60,882 रुपये की प्रतिकर राशि जमा नहीं करता है, तो उसे एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। इस मामले में फरियादी की ओर से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता गजेन्द्र सिंह यादव द्वारा की गई।