सिस्टम की इमरजेंसी फेल, गंभीर हालत में बादल को आटो से लेकर आना पड़ा अस्पताल, Shivpuri News

Adhiraj Awasthi

बदरवास। मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुँचाने के बड़े-बड़े वादे करती है, लेकिन शिवपुरी जिले के बदरवास जनपद के ग्राम बारोद से सामने आई एक तस्वीर इन सभी दावों की पोल खोल रही है। यहाँ एक आदिवासी मरीज बादल को समय पर इलाज मिलना तो दूर, सरकार की निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा 108 तक उपलब्ध नहीं हो सकी।

घंटों इंतजार के बाद भी नहीं पहुंची 108 एम्बुलेंस
जानकारी के अनुसार ग्राम बारोद निवासी बादल आदिवासी की अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने तुरंत 108 एम्बुलेंस सेवा को कॉल किया। घंटों इंतजार और कई बार संपर्क करने के बावजूद कोई वाहन मौके पर नहीं पहुँचा। कंट्रोल रूम से भी परिजनों को कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मरीज की हालत बिगड़ती देख परिजनों ने प्राइवेट वाहन का सहारा लिया।

इलाज से पहले आर्थिक मार कर्ज लेकर चुकाया किराया
मरीज को बारोद से बदरवास स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के लिए परिजनों को एक निजी वाहन चालक को 1000 रुपये देने पड़े। एक गरीब आदिवासी परिवार के लिए यह रकम बहुत बड़ी थी, जिसे उन्होंने पड़ोसियों से उधार लेकर चुकाया।

बदरवास से जिला अस्पताल तक की राह भी रही मुश्किल
बदरवास स्वास्थ्य केंद्र पहुँचने पर डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद बादल की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जिला अस्पताल शिवपुरी रेफर कर दिया। विडंबना देखिए कि यहाँ भी सरकारी एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाई। जान बचाने की जद्दोजहद में परिजनों को एक बार फिर गंभीर हालत में मरीज को ऑटो रिक्शा में लादकर जिला अस्पताल ले जाना पड़ा।

जिम्मेदार बोले- मामला दिखवाते हैं
इस पूरे घटनाक्रम पर जब बदरवास बीएमओ चेतेंद्र कुशवाह से सवाल किया गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह आश्वासन देते हुए कहा कि यह मामला अभी संज्ञान में आया है। हम इसकी जांच करवाएंगे और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सीएमएचओ को पत्र लिखकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।