दहेज की बाइक की वसूली,युवक को कार में उठाकर ले गए लोग: एक खबर के 2 मायने

Adhiraj Awasthi

शिवपुरी। जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट और न्यायालय परिसर के समीप बुधवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सरेराह एक युवक को वाहन में बैठाकर ले जाने और उसके साथियों से बाइक छीनने की घटनाएं सामने आईं। शुरुआती दौर में शहर में लूट और अपहरण की अफवाह फैल गई, लेकिन बाद में पुलिसिया पूछताछ और फाइनेंस कंपनी की रिकवरी का मामला सामने आया।

न्यायालय परिसर से युवक को उठा ले गई पुलिस
खतौरा निवासी जीतू गोलिया ने बताया कि वह अपने भाई सोनू और साथी गगन रघुवंशी के साथ एक पुराने मामले की पेशी पर न्यायालय आए थे। जैसे ही गगन रघुवंशी कोर्ट के पिछले गेट से बाहर निकले, एक वाहन में सवार कुछ लोग उन्हें जबरन बैठाकर ले गए। चूंकि बीती रात इंदार गांव में डेढ़ करोड़ रुपए की बड़ी चोरी हुई थी, इसलिए माना जा रहा है कि इंदार पुलिस संदेह के आधार पर गगन को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई है।

बीच सड़क पर बाइक की जबरन जब्ती
गगन की तलाश में जब जीतू और सोनू कलेक्ट्रेट के पास पहुंचे, तभी तीन युवकों ने उनकी बाइक रोक ली और चाबी छीनकर वाहन अपने साथ ले गए। अचानक हुई इस वारदात से दोनों भाई डर गए और इसे लूट समझ बैठे। बाद में खुलासा हुआ कि वह बाइक फाइनेंस पर थी और उसकी करीब 60 हजार रुपए की किस्तें बकाया थीं। रिकवरी एजेंटों ने बिना किसी पूर्व सूचना के बीच सड़क पर बाइक रोककर उसे जब्त कर लिया। पीड़ित सोनू ने बताया कि यह बाइक उसे डेढ़ साल पहले शादी में दहेज के रूप में मिली थी।

वसूली के तरीके पर खड़े हो रहे सवाल
शिवपुरी शहर में फाइनेंस कंपनियों द्वारा सरेआम गाड़ियां रोकने और छीनने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। झांसी तिराहा और कलेक्ट्रेट जैसे वीआईपी क्षेत्रों में भी रिकवरी एजेंटों की यह छापामार शैली आम लोगों में दहशत पैदा कर रही है।

स्थानीय लोगों का आक्रोश
शहरवासियों का कहना है कि यदि किसी ग्राहक की किस्त बकाया है, तो कंपनी को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। बीच सड़क पर डरा-धमकाकर वाहन छीनना अपराध की श्रेणी में आता है, जिससे कानून-व्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

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