शिवपुरी। शिवपुरी के लिए सफेद हाथी बन चुका सीवर प्रोजेक्ट का काम 13 साल भी अधूरा पड़ा है। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत लागत 67 करोड़ रुपए थी अब इस लागत 120 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। इस प्रोजेक्ट की पूर्णता के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने 12 करोड़ रुपए देने का वचन दिया था। इसी वचन के तहत 3 करोड़ रूपए जारी हो चुके है। यह राशि नगर पालिका के खाते में जारी हो चुकी है। नगर पालिका यह राशि पीएचई को जारी करेगी, जिससे सीवर प्रोजेक्ट का बचा हुआ काम कराया जाएगा। शासन द्वारा सुध लेने की वजह से आखिरकार अटके हुए सीवर प्रोजेक्ट के पूरा होने की उम्मीद बढ़ गई है।
जानकारी के मुताबिक, शिवपुरी शहर की सीवर गंदगी नाले के जरिए सख्या सागर और फिर माधव लेक में पहुंचती है। सीवर गंदगी के कारण दोनों झीलों में जलकुंभी फैलने के बाद खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। जलकुंभी गंभीर संकट बनी हुई है। इसी जलकुंभी को लेकर हाईकोर्ट में केस की सुनवाई जारी है। पिछले साल नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सीवर प्रोजेक्ट पूरा कराने के लिए राशि जारी करने की बात कही थी। कोर्ट की सुनवाई के बीच आखिरकार 12 फरवरी को 3 करोड़ रु. जारी हो गए हैं।
111 करोड़ खर्च हो चुके, अभी 8.16 करोड़ की और जरूरत
2013 से सीवर प्रोजेक्ट का काम चल रहा है। उस वक्त प्रोजेक्ट की लागत करीब 67 करोड़ रु. थी। रिवाइज एस्टीमेट बनते-बनते लागत 111 करोड़ पार पहुंच गई। प्रोजेक्ट पूरा कराने के लिए अभी 8.16 करोड़ रु. की और जरूरत है। यानी सीवर प्रोजेक्ट पर करीब 120 करोड़ खर्च हो जाएंगे।
75% राशि का उपयोगिता प्रमाण-पत्र के बाद शेष राशि जारी होगी
नगरीय प्रशासन एवं विकास के प्रमुख अभियंता ने 3 करोड़ की राशि के संबंध में 3 फरवरी को लेटर जारी किया है। हाईकोर्ट ग्वालियर की याचिका में 25 अगस्त 2025 के जारी आदेश का हवाला दिया है। 75% राशि खर्च होने तथा उपयोगिता प्रमाण पत्र के आधार पर अगली किश्त उपलब्ध कराने का लेटर में उल्लेख किया है।
जानकारी के मुताबिक, शिवपुरी शहर की सीवर गंदगी नाले के जरिए सख्या सागर और फिर माधव लेक में पहुंचती है। सीवर गंदगी के कारण दोनों झीलों में जलकुंभी फैलने के बाद खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। जलकुंभी गंभीर संकट बनी हुई है। इसी जलकुंभी को लेकर हाईकोर्ट में केस की सुनवाई जारी है। पिछले साल नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सीवर प्रोजेक्ट पूरा कराने के लिए राशि जारी करने की बात कही थी। कोर्ट की सुनवाई के बीच आखिरकार 12 फरवरी को 3 करोड़ रु. जारी हो गए हैं।
111 करोड़ खर्च हो चुके, अभी 8.16 करोड़ की और जरूरत
2013 से सीवर प्रोजेक्ट का काम चल रहा है। उस वक्त प्रोजेक्ट की लागत करीब 67 करोड़ रु. थी। रिवाइज एस्टीमेट बनते-बनते लागत 111 करोड़ पार पहुंच गई। प्रोजेक्ट पूरा कराने के लिए अभी 8.16 करोड़ रु. की और जरूरत है। यानी सीवर प्रोजेक्ट पर करीब 120 करोड़ खर्च हो जाएंगे।
75% राशि का उपयोगिता प्रमाण-पत्र के बाद शेष राशि जारी होगी
नगरीय प्रशासन एवं विकास के प्रमुख अभियंता ने 3 करोड़ की राशि के संबंध में 3 फरवरी को लेटर जारी किया है। हाईकोर्ट ग्वालियर की याचिका में 25 अगस्त 2025 के जारी आदेश का हवाला दिया है। 75% राशि खर्च होने तथा उपयोगिता प्रमाण पत्र के आधार पर अगली किश्त उपलब्ध कराने का लेटर में उल्लेख किया है।