शिवपुरी। शिवपुरी का जिला अस्पताल एम्स जैसी सुविधाओ की थीम पर डबलव किया जा रहा है,जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल को उच्च श्रेणी की सुविधाओं में कन्वर्ट करने के लिए 80 लाख रूपए खर्च करने का बजट रखा गया है। जिससे अस्पताल का हेल्थ अपग्रेड होगा। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक्स जैसी आपातकालीन सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए शिवपुरी अस्पताल की एक टीम एम्स से प्रशिक्षण लेकर लौटी है। मरीजो के लिए चलने वाली ओपीडी अब संकरी गलियों के बजाय आधुनिक हॉल में होगा उपचार वही एम्स की तर्ज पर आएंगे इमरजेंसी बेड ओर वर्षो पुराना जच्चा खाना भी अब आधुनिक होगा। इस कार्य को करने के लिए PWD दो महीनों के भीतर अस्पताल के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह बदलने जा रहा है।
वर्तमान में ओपीडी संकरी गलियों के किनारे छोटे कमरों में संचालित हो रही है, जहां पर्याप्त स्थान न होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को बाहर खड़े रहना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए ओपीडी क्षेत्र का लगभग 1500 वर्गफुट तक विस्तार किया जाएगा। मौजूदा टीन शेड को हटाकर आधुनिक फॉल सीलिंग लगाई जाएगी तथा छत की ऊंचाई बढ़ाई जाएगी, जिससे पूरा क्षेत्र कवर्ड स्पेस में बदलकर अधिक सुव्यवस्थित और हवादार बनाया जा सके। अस्पताल परिसर में स्वच्छता और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए नए शौचालयों का निर्माण भी कराया जाएगा।
एम्स की तर्ज पर अपग्रेड होगी इमरजेंसी
आपातकालीन सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए अस्पताल में विशेष इमरजेंसी पलंग भी मंगवाए जा रहे हैं, जो स्ट्रेचर की तरह उपयोगी होंगे और मरीज को तुरंत स्थिर करने में सहायक साबित होंगे। इन पलंगों को मंगाने की तैयारी अस्पताल प्रबंधन ने शुरू कर दी है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार हाल ही में जिला अस्पताल की टीम एम्स में प्रशिक्षण लेकर लौटी है, जहां इन आधुनिक सुविधाओं और उपकरणों की उपयोगिता के बारे में जानकारी मिली थी। निर्माण और उन्नयन कार्यों के बाद जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे जिले के हजारों मरीजों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
अब गोल्डन ऑवर में बचेगा जीवन
अस्पताल में आने वाले गंभीर और आपातकालीन मरीजों के लिए दो विशेष कक्ष विकसित किए जाएंगे। इन कक्षों में एक व्यवस्था वयस्क मरीजों के लिए तथा दूसरी बच्चों के लिए होगी, ताकि फ्रैक्चर, सांस लेने में दिक्कत या अन्य गंभीर स्थितियों में आए मरीजों को तत्काल प्राथमिक उपचार देकर स्थिर किया जा सके और बाद में आईसीयू, ट्रामा वार्ड या अन्य कक्षों में रेफर किया जा सके।
69 साल पुराने जच्चा-खाना भवन का जीर्णोद्धार
जिला अस्पताल का जच्चा खाना वर्ष 1957 में निर्मित हुआ था, जिसकी छत से वर्तमान में पानी टपकने की शिकायतें सामने आ रही हैं। भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए उसकी छत के ऊपर नया टीन शेड डाला जाएगा, जिससे प्रसूत महिलाओं और नवजात शिशुओ को सुरक्षित और संरक्षित वातावरण मिल सके।
वर्तमान में ओपीडी संकरी गलियों के किनारे छोटे कमरों में संचालित हो रही है, जहां पर्याप्त स्थान न होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को बाहर खड़े रहना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए ओपीडी क्षेत्र का लगभग 1500 वर्गफुट तक विस्तार किया जाएगा। मौजूदा टीन शेड को हटाकर आधुनिक फॉल सीलिंग लगाई जाएगी तथा छत की ऊंचाई बढ़ाई जाएगी, जिससे पूरा क्षेत्र कवर्ड स्पेस में बदलकर अधिक सुव्यवस्थित और हवादार बनाया जा सके। अस्पताल परिसर में स्वच्छता और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए नए शौचालयों का निर्माण भी कराया जाएगा।
एम्स की तर्ज पर अपग्रेड होगी इमरजेंसी
आपातकालीन सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए अस्पताल में विशेष इमरजेंसी पलंग भी मंगवाए जा रहे हैं, जो स्ट्रेचर की तरह उपयोगी होंगे और मरीज को तुरंत स्थिर करने में सहायक साबित होंगे। इन पलंगों को मंगाने की तैयारी अस्पताल प्रबंधन ने शुरू कर दी है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार हाल ही में जिला अस्पताल की टीम एम्स में प्रशिक्षण लेकर लौटी है, जहां इन आधुनिक सुविधाओं और उपकरणों की उपयोगिता के बारे में जानकारी मिली थी। निर्माण और उन्नयन कार्यों के बाद जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे जिले के हजारों मरीजों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
अब गोल्डन ऑवर में बचेगा जीवन
अस्पताल में आने वाले गंभीर और आपातकालीन मरीजों के लिए दो विशेष कक्ष विकसित किए जाएंगे। इन कक्षों में एक व्यवस्था वयस्क मरीजों के लिए तथा दूसरी बच्चों के लिए होगी, ताकि फ्रैक्चर, सांस लेने में दिक्कत या अन्य गंभीर स्थितियों में आए मरीजों को तत्काल प्राथमिक उपचार देकर स्थिर किया जा सके और बाद में आईसीयू, ट्रामा वार्ड या अन्य कक्षों में रेफर किया जा सके।
69 साल पुराने जच्चा-खाना भवन का जीर्णोद्धार
जिला अस्पताल का जच्चा खाना वर्ष 1957 में निर्मित हुआ था, जिसकी छत से वर्तमान में पानी टपकने की शिकायतें सामने आ रही हैं। भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए उसकी छत के ऊपर नया टीन शेड डाला जाएगा, जिससे प्रसूत महिलाओं और नवजात शिशुओ को सुरक्षित और संरक्षित वातावरण मिल सके।
पीडब्ल्यूडी विभाग को सौंपी जिम्मेदारी
सोमवार को कलेक्ट्रेट में हुई रोगी कल्याण समिति की बैठक में हमने कलेक्टर साहब के समक्ष यह पूरी तैयारी रखी है। स्वास्थ्य विभाग एवं कलेक्टर साहब की ओर से लगभग 80 लाख रुपए की लागत से पूरे होने वाले इन कार्यों को मंजूरी मिल गई है। पीडब्ल्यूडी विभाग को सभी कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दो माह में कार्य पूरा होने के निर्देश दिए गए हैं।
डॉ बीएल यादव, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल, शिवपुरी
सोमवार को कलेक्ट्रेट में हुई रोगी कल्याण समिति की बैठक में हमने कलेक्टर साहब के समक्ष यह पूरी तैयारी रखी है। स्वास्थ्य विभाग एवं कलेक्टर साहब की ओर से लगभग 80 लाख रुपए की लागत से पूरे होने वाले इन कार्यों को मंजूरी मिल गई है। पीडब्ल्यूडी विभाग को सभी कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दो माह में कार्य पूरा होने के निर्देश दिए गए हैं।
डॉ बीएल यादव, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल, शिवपुरी