शिवपुरी। शिवपुरी जिले की बैराड़ नगर परिषद का कर्मचारी को आज बैराड पुलिस ने आज शराब बेचते हुए पकड़ा है,कर्मचारी से 80 लीटर शराब जब्त की है। इससे पूर्व बैराड़ नगर परिषद का जेसीबी ऑपरेटर 30 हजार की शराब के साथ पकड़ा गया यह महज संयोग नहीं, बल्कि नगर परिषद की गहरी लापरवाही और संदिग्ध नियुक्तियों का खुला प्रमाण है।
बैराड़ थाना प्रभारी सुरेश शर्मा व पुलिस टीम ने 9 फरवरी 2026 को फुलीपुरा मौजा में पार्वती नदी किनारे कार्रवाई करते हुए सोनू पुत्र हक्के रावत (25), निवासी बैराड़ को पकड़ा। आरोपी के पास से हाथ भट्टी की 80 लीटर कच्ची शराब बरामद हुई, जिसकी कीमत करीब 18 हजार रुपये बताई गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी नगर परिषद में कचरा गाड़ी चलाता है और उस पर पहले से लूट व स्मैक कारोबार जैसे गंभीर अपराध दर्ज हैं।
इसके बावजूद वह न सिर्फ नौकरी कर रहा था, बल्कि हर महीने सरकारी वेतन भी ले रहा था। अब सवाल साफ है कि नगर परिषद में नियुक्ति से पहले चरित्र सत्यापन क्यों नहीं हुआ? क्या आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को जानबूझकर संरक्षण दिया जा रहा है? यदि यही हाल रहा तो जनता पूछने में देर नहीं करेगी कि बैराड़ नगर परिषद शहर चला रही है या
अपराधियों की रोजी-रोटी का इंतजाम?
नगर परिषद बैराड़ की भूमिका अब सिर्फ लापरवाही तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि मिलीभगत की आशंका भी गहराने लगी है। आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग परिषद में कर्मचारी कैसे बने, किस अधिकारी ने नियुक्ति की, और पुलिस मामलों की जानकारी होते हुए भी उन्हें सेवा में क्यों बनाए रखा गया है इन सवालों पर परिषद की चुप्पी बेहद संदेहजनक है। जनता का पैसा वेतन में जा रहा है और बदले में परिषद को शराब तस्कर व अपराधी कर्मचारी मिल रहे हैं। अब देखना यह है कि नगर परिषद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करती है या हमेशा की तरह मामला दबाकर अगली गिरफ्तारी का इंतजार करेगी।
इनका कहना है...
नगर परिषद बैराड़ बेघर हो चुकी है, उसका कोई धनी-धोरी कोई नही है, परिषद के कर्मचारी नशे का कारोबार कर रहे है यह बहुत ही शर्मनाक बात है, अपराधियों को परिषद कर्मचारी बनाकर काम कराया जा रहा है, जनता की दुर्दशा होना तो तय है, भाजपा शासन में यह आम बात हो गई है, इन दोनो आरोपी कर्मचारियों पर कार्यवाही हो, हटाया जाए। मैं तत्काल पत्र लिखकर इस विषय पर कलेक्टर से शिकायत कर रहा हूं।
कैलाश कुशवाह, कांग्रेस विधायक पोहरी
यह लोग दिन में नगर पंचायत में नौकरी करते है, रात में शराब पीते हैं या बेचते है हमें क्या पता होगा, पहले सोनू रावत की सैलरी बंद कर दी थी, अभी कुछ महीने से सैलरी मिल रही थी। कचरा गाड़ी चलाता था, अब जेल चला जाएगा तो फिर न तो सैलरी मिलेगी न कोई परेशानी होगी।
श्रीमती मालती-लक्ष्मण रावत, अध्यक्ष नगर परिषद बैराड़
बैराड़ थाना प्रभारी सुरेश शर्मा व पुलिस टीम ने 9 फरवरी 2026 को फुलीपुरा मौजा में पार्वती नदी किनारे कार्रवाई करते हुए सोनू पुत्र हक्के रावत (25), निवासी बैराड़ को पकड़ा। आरोपी के पास से हाथ भट्टी की 80 लीटर कच्ची शराब बरामद हुई, जिसकी कीमत करीब 18 हजार रुपये बताई गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी नगर परिषद में कचरा गाड़ी चलाता है और उस पर पहले से लूट व स्मैक कारोबार जैसे गंभीर अपराध दर्ज हैं।
इसके बावजूद वह न सिर्फ नौकरी कर रहा था, बल्कि हर महीने सरकारी वेतन भी ले रहा था। अब सवाल साफ है कि नगर परिषद में नियुक्ति से पहले चरित्र सत्यापन क्यों नहीं हुआ? क्या आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को जानबूझकर संरक्षण दिया जा रहा है? यदि यही हाल रहा तो जनता पूछने में देर नहीं करेगी कि बैराड़ नगर परिषद शहर चला रही है या
अपराधियों की रोजी-रोटी का इंतजाम?
नगर परिषद बैराड़ की भूमिका अब सिर्फ लापरवाही तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि मिलीभगत की आशंका भी गहराने लगी है। आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग परिषद में कर्मचारी कैसे बने, किस अधिकारी ने नियुक्ति की, और पुलिस मामलों की जानकारी होते हुए भी उन्हें सेवा में क्यों बनाए रखा गया है इन सवालों पर परिषद की चुप्पी बेहद संदेहजनक है। जनता का पैसा वेतन में जा रहा है और बदले में परिषद को शराब तस्कर व अपराधी कर्मचारी मिल रहे हैं। अब देखना यह है कि नगर परिषद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करती है या हमेशा की तरह मामला दबाकर अगली गिरफ्तारी का इंतजार करेगी।
इनका कहना है...
नगर परिषद बैराड़ बेघर हो चुकी है, उसका कोई धनी-धोरी कोई नही है, परिषद के कर्मचारी नशे का कारोबार कर रहे है यह बहुत ही शर्मनाक बात है, अपराधियों को परिषद कर्मचारी बनाकर काम कराया जा रहा है, जनता की दुर्दशा होना तो तय है, भाजपा शासन में यह आम बात हो गई है, इन दोनो आरोपी कर्मचारियों पर कार्यवाही हो, हटाया जाए। मैं तत्काल पत्र लिखकर इस विषय पर कलेक्टर से शिकायत कर रहा हूं।
कैलाश कुशवाह, कांग्रेस विधायक पोहरी
यह लोग दिन में नगर पंचायत में नौकरी करते है, रात में शराब पीते हैं या बेचते है हमें क्या पता होगा, पहले सोनू रावत की सैलरी बंद कर दी थी, अभी कुछ महीने से सैलरी मिल रही थी। कचरा गाड़ी चलाता था, अब जेल चला जाएगा तो फिर न तो सैलरी मिलेगी न कोई परेशानी होगी।
श्रीमती मालती-लक्ष्मण रावत, अध्यक्ष नगर परिषद बैराड़