शिवपुरी। कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत होटल पीएस के पास स्थित मां पीतांबरा ऑटोमोबाइल एजेंसी के बाहर एक महिला ने अपने ही ई-रिक्शा पर पेट्रोल छिड़ककर उसे आग के हवाले कर दिया। महिला का आरोप है कि उसने अपने बच्चों के भविष्य के लिए सवा दो लाख से अधिक की राशि निवेश की थी, लेकिन एजेंसी के खराब रवैये ने उसका सब कुछ बर्बाद कर दिया।
पूरा मामला: किस्तों पर खरीदा था सपना
फक्कड़ कॉलोनी निवासी गुड़िया माहौर ने बताया कि वह और उनके पति नारायण माहौर मजदूरी कर परिवार पालते हैं। करीब छह महीने पहले उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने और मजदूरी के दलदल से बाहर निकलने के लिए 2 लाख 30 हजार रुपये में एक ई-रिक्शा फाइनेंस कराया था। गुड़िया ने उम्मीद जताई थी कि ई-रिक्शा चलाकर वह अपने तीन बच्चों की अच्छी परवरिश कर सकेंगी।
दो महीने में आई खराबी, चार महीने की भागदौड़
महिला का आरोप है कि बड़ी उम्मीदों से खरीदा गया यह ई-रिक्शा मात्र दो महीने ही ठीक से चल पाया। पिछले चार महीनों से वह लगातार एजेंसी के चक्कर लगा रही थीं, लेकिन कर्मचारी और मालिक हर बार मरम्मत से इनकार करते रहे। रिक्शा घर पर खड़ा रहा, कमाई बंद हो गई और फाइनेंस की किस्तें सिर पर चढ़ गईं। इसी बेबसी के चलते अंततः उन्होंने एजेंसी के सामने ही उसे जला दिया।
एजेंसी का पक्ष: तकनीकी पेंच में फंसी राहत
एजेंसी के मैनेजर शुभम शर्मा का कहना है कि ई-रिक्शा की बैटरी फट गई है। कंपनी की पॉलिसी के अनुसार, बैटरी फटने की स्थिति में नई बैटरी रिप्लेसमेंट (बदलकर देना) का प्रावधान नहीं है। एजेंसी ने महिला को नई बैटरी खरीदने की सलाह दी थी, जिसे मानने के बजाय उन्होंने आग लगा दी।
पुलिस कार्रवाई और मांग
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुँची और जलते रिक्शे को बुझाकर महिला को थाने ले गई। गुड़िया माहौर ने मांग की है कि या तो उन्हें नया रिक्शा दिया जाए या उनकी अब तक की जमा पूरी राशि वापस की जाए। पुलिस फिलहाल दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।
पूरा मामला: किस्तों पर खरीदा था सपना
फक्कड़ कॉलोनी निवासी गुड़िया माहौर ने बताया कि वह और उनके पति नारायण माहौर मजदूरी कर परिवार पालते हैं। करीब छह महीने पहले उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने और मजदूरी के दलदल से बाहर निकलने के लिए 2 लाख 30 हजार रुपये में एक ई-रिक्शा फाइनेंस कराया था। गुड़िया ने उम्मीद जताई थी कि ई-रिक्शा चलाकर वह अपने तीन बच्चों की अच्छी परवरिश कर सकेंगी।
दो महीने में आई खराबी, चार महीने की भागदौड़
महिला का आरोप है कि बड़ी उम्मीदों से खरीदा गया यह ई-रिक्शा मात्र दो महीने ही ठीक से चल पाया। पिछले चार महीनों से वह लगातार एजेंसी के चक्कर लगा रही थीं, लेकिन कर्मचारी और मालिक हर बार मरम्मत से इनकार करते रहे। रिक्शा घर पर खड़ा रहा, कमाई बंद हो गई और फाइनेंस की किस्तें सिर पर चढ़ गईं। इसी बेबसी के चलते अंततः उन्होंने एजेंसी के सामने ही उसे जला दिया।
एजेंसी का पक्ष: तकनीकी पेंच में फंसी राहत
एजेंसी के मैनेजर शुभम शर्मा का कहना है कि ई-रिक्शा की बैटरी फट गई है। कंपनी की पॉलिसी के अनुसार, बैटरी फटने की स्थिति में नई बैटरी रिप्लेसमेंट (बदलकर देना) का प्रावधान नहीं है। एजेंसी ने महिला को नई बैटरी खरीदने की सलाह दी थी, जिसे मानने के बजाय उन्होंने आग लगा दी।
पुलिस कार्रवाई और मांग
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुँची और जलते रिक्शे को बुझाकर महिला को थाने ले गई। गुड़िया माहौर ने मांग की है कि या तो उन्हें नया रिक्शा दिया जाए या उनकी अब तक की जमा पूरी राशि वापस की जाए। पुलिस फिलहाल दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।