शिव की पुरी की सड़क भी हुई शिवमय, शाही सवारी का 9 घंटे में पूरा हुआ डेढ़ KM का सफर

Adhiraj Awasthi

शिवपुरी। धर्म नगरी शिवपुरी में महाशिवरात्रि का पर्व रविवार को अभूतपूर्व उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। शहर के आराध्य देव भगवान शिव की शाही बारात ने इस बार श्रद्धा के नए कीर्तिमान स्थापित किए। नीलकंठ महादेव मंदिर से शुरू हुई नगर देवता की यह सवारी जब सड़कों पर निकली, तो पूरा शहर जय बम भोले के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। भक्ति का आलम यह था कि मंदिर से सिद्धेश्वर मेला ग्राउंड तक की मात्र डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय करने में बारात को 9 घंटे का समय लग गया।

दोपहर में शुरू हुआ सफर, रात तक रही रौनक
आयोजन समिति के अनुसार, भगवान भोलेनाथ की शाही सवारी दोपहर 12 बजे नीलकंठ महादेव मंदिर से गाजे-बाजे के साथ रवाना हुई। श्रद्धालुओं के भारी हुजूम और जगह-जगह हो रही पूजा-अर्चना के कारण बारात को कस्टम गेट पहुँचने में ही शाम के 6 बज गए। इसके बाद माधव चौक होते हुए सिद्धेश्वर मेला ग्राउंड पहुँचते-पहुँचते रात के 9 बज गए। पूरे रास्ते श्रद्धालु भगवान की भक्ति में सराबोर नजर आए।

शिव की शाही सवार में 4 डीजे,घोडे और ढोल नगाड़े
शिवपुरी के नगर भ्रमण पर निकली शाही सवारी में 4 डीजे,बैंड और घोडे सहित ढोल तासे थे। साथ में शाही सवारी पर पुष्प वर्षा भी की जा रही थी। इस शाही सवारी में शामिल लोग पूरे जोश और उत्साह के साथ भोले नाथ के भजनों पर झूमते हुए दिखाई दे रहे थे। इस धार्मिक उत्सव मे उडाया जा रहा गुलाल के रंग भक्तों में उत्साह भर रहे थे। और गुलाल के रंग एक धर्म की गाथा गा रहे थे।

भूत, पिशाच और अप्सराओं का अनूठा संगम
शिव की इस अलौकिक बारात में उनके गणों का सजीव चित्रण देखने को मिला। सड़कों पर जहाँ एक ओर भूत-पिशाच और रीछ-भालू जैसे जीव-जंतुओं के भेष में कलाकार नृत्य कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर अप्सराओं की सुंदर झांकियां श्रद्धालुओं का मन मोह रही थीं। नंदी पर सवार भोलेनाथ की झांकी और बाबा बर्फानी के प्रतीकात्मक दर्शन आकर्षण का केंद्र रहे।

वृंदावन के कलाकारों ने बांधा समां
उत्सव की भव्यता बढ़ाने के लिए वृंदावन से विशेष रूप से कलाकारों को बुलाया गया था। इन कलाकारों ने बम-बम भोले जैसे भक्ति गीतों पर अपनी अद्भुत प्रस्तुतियां दीं। नृत्य और संगीत के इस संगम ने बारात में शामिल हर शख्स को झूमने पर मजबूर कर दिया।

पालकी पर सवार थे भगवान भोलेनाथ
शाही सवारी के दौरान एक भावुक दृश्य तब देखने को मिला जब युवाओं ने अपने नगर देवता भगवान सिद्धेश्वर की प्रतिमा को पालकी पर कंधों पर उठाकर शहर भ्रमण कराया। जगह-जगह स्टॉल लगाकर बारातियों का स्वागत किया गया और श्रद्धालुओं को भगवान का प्रसाद का वितरण किया गया। शहर के विभिन्न मंदिरों में दिनभर अभिषेक, बेलपत्र अर्पण और विशेष पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा।