शिवपुरी। नगर के ऐतिहासिक सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में इस वर्ष भी महाशिवरात्रि का पर्व बड़े ही धूमधाम और भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा। शिव-पार्वती विवाह की परंपरा को जीवंत करते हुए मंदिर में चार दिवसीय विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठानों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है।
12 फरवरी से शुरू होने वाले इन कार्यक्रमों में गणेश पूजन से लेकर भव्य शिव बारात तक के आयोजन शामिल होंगे, जिसे लेकर मंदिर परिसर को किसी विवाह स्थल की तरह भव्य रूप से सजाया जा रहा है। आज से इस धार्मिक कार्यक्रम का श्रीगणेश हो रहा है,आज श्री गणेश पूजन और लग्न संस्कार होगा। 13 फरवरी को हल्दी रस्म तथा 14 फरवरी को मेहंदी, भजन-कीर्तन और महिला संगीत के आयोजन होंगे। इन दिनों मंदिर परिसर को विवाह स्थल की तरह सजाया और संवारा जा रहा है।
15 फरवरी महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का विधि विधान से आयोजन होगा। इस अवसर पर नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर से भव्य शिव बारात निकलेगी, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई सिद्धेश्वर मंदिर पहुंचेगी।
बारात में बैंड-बाजे, ढोल-ताशे, आकर्षक झांकियां और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ आकर्षण का केंद्र रहेगी। मंदिर पहुंचने पर वरमाला, पूजन, आरती और विवाह संस्कार संपन्न कराए जाएंगे। आयोजकों के अनुसार यह परंपरा लगातार जारी है और हर वर्ष श्रद्धालुओं की भागीदारी बढ़ रही है, जिसमें महिला समिति का विशेष सहयोग रहता है।
12 फरवरी से शुरू होने वाले इन कार्यक्रमों में गणेश पूजन से लेकर भव्य शिव बारात तक के आयोजन शामिल होंगे, जिसे लेकर मंदिर परिसर को किसी विवाह स्थल की तरह भव्य रूप से सजाया जा रहा है। आज से इस धार्मिक कार्यक्रम का श्रीगणेश हो रहा है,आज श्री गणेश पूजन और लग्न संस्कार होगा। 13 फरवरी को हल्दी रस्म तथा 14 फरवरी को मेहंदी, भजन-कीर्तन और महिला संगीत के आयोजन होंगे। इन दिनों मंदिर परिसर को विवाह स्थल की तरह सजाया और संवारा जा रहा है।
15 फरवरी महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का विधि विधान से आयोजन होगा। इस अवसर पर नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर से भव्य शिव बारात निकलेगी, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई सिद्धेश्वर मंदिर पहुंचेगी।
बारात में बैंड-बाजे, ढोल-ताशे, आकर्षक झांकियां और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ आकर्षण का केंद्र रहेगी। मंदिर पहुंचने पर वरमाला, पूजन, आरती और विवाह संस्कार संपन्न कराए जाएंगे। आयोजकों के अनुसार यह परंपरा लगातार जारी है और हर वर्ष श्रद्धालुओं की भागीदारी बढ़ रही है, जिसमें महिला समिति का विशेष सहयोग रहता है।