चीता प्रोजेक्ट 2.0, सात समंदर पार से उड़ान भरके फिर कूनो आ रहे है 8 विदेशी चीते

Adhiraj Awasthi

भोपाल। शिवपुरी-श्योपुर जिले की सीमा पर स्थित कूनो नेशनल पार्क मे चीतो के कुनवा बढाने की तैयारी चल रही है। भारत में चीता की धरती पर चीता बसाने के प्रोजेक्ट में अब देश एक कदम और आगे बढ़ रहा है। नामीबियाई और दक्षिण अफ्रीकी चीतों को बसाने के बाद  भारत में बोत्सवाना के चीते लाने की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

बोत्सवाना से 8 नए चीते भारत लाने की तारीख तय हो गई है। आगामी 28 फरवरी को ये चीते करीब 7000 किलोमीटर का हवाई सफर तय कर मध्य प्रदेश की धरती पर कदम रखेंगे। इसके लिए जहां कूनो नेशनल पार्क में तैयारियां की जा रही हैं वहीं वायुसेना के हेलीकॉप्टर की लेंडिंग ट्रायल शुरू हो चुकी है, बोत्सवाना से चीतों को भारत लाने का रोडमैप भी लगभग तैयार हो गया है।

सफर का रोडमैप: गेबोरोन से ग्वालियर तक
चीतों को बोत्सवाना की राजधानी गेबोरोन स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से एक विशेष मालवाहक विमान के जरिए भारत लाया जाएगा। सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इन्हें 6 से 8 विशेष रूप से डिजाइन किए गए क्रेट्स (बॉक्स) में रखा जाएगा। यह विमान सीधे ग्वालियर एयरबेस पर लैंड करेगा, जहां से वायुसेना के विशेष हेलीकॉप्टरों की मदद से इन्हें कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया जाएगा।

8 क्वारंटाइन बाड़े और 5 हेलीपेड तैयार
कूनो नेशनल पार्क में चीतों की अगवानी के लिए तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसमें चीतों को रखने के 8 क्वारंटाइन बाड़े तैयार कर लिए गए हैं। हालांकि अभी तय नहीं है कि चीते अलग-अलग बाड़ों में रखा जाएगा या कुछ चीते कोएलिशन में रहेंगे, क्योंकि कुछ चीते भाई-भाई हुए तो उन्हें कोएलिशन में रखा जाएगा, लेकिन 8 बाड़े तैयार हैं।

इसके साथ ही पहले से बने हुए 5 हेलीपैड फिर से तैयार कर लिए गए हैं, जिन पर बीते रोज लेंडिंग ट्रायल हो चुकी है। इनमें 3 हेलीपैड पर चीतों के हेलीकॉप्टर उत्तरेंगे और 2 पर अतिथियों के हेलीकॉप्टर आएंगे। चीतों को कूनो में रिलीज करने के कार्यक्रम में मोहन यादव और भूपेंद्र यादव के शामिल होने की खबरें हैं।

विशेषज्ञों की निगरानी
इन चीतों के साथ बोत्सवाना के वन्यजीव विशेषज्ञों और डॉक्टरों की एक टीम भी भारत आएगी। कूनो में पहले से मौजूद मेडिकल टीम और वन विभाग के अधिकारी लगातार दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञों के संपर्क में हैं ताकि जलवायु परिवर्तन (Acclimatization) की प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके।