शिवपुरी। जिले के कोलारस अनुभाग के अंतर्गत आने वाली ग्राम अटलपुर की शासकीय उचित मूल्य दुकान में बड़े स्तर पर खाद्यान्न घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कोलारस के सख्त निर्देशन में की गई जांच के बाद, बदरवास थाना पुलिस ने दुकान के विक्रेता और प्रबंधक के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।
नियमित जांच में खुला गबन का खेल
प्राथमिक वनोपज सहकारी संस्था रन्नौद के तहत संचालित उचित मूल्य दुकान अटलपुर कोड 0506037 के खिलाफ लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी कोलारस द्वारा जब दुकान का भौतिक सत्यापन और रिकॉर्ड की जांच की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार, विक्रेता देवेन्द्र यादव और प्रबंधक परमा जाटव न तो नियमित रूप से दुकान खोल रहे थे और न ही पात्र हितग्राहियों को राशन का वितरण कर रहे थे। इसके अलावा, उन्होंने विभागीय आदेशों की अवहेलना करते हुए पीओएस (POS) मशीन भी जमा नहीं की थी।
हजारों किलो अनाज रिकॉर्ड से गायब
जांच दल ने पाया कि दुकान से भारी मात्रा में खाद्यान्न खुर्द-बुर्द किया गया है। जांच दल ने अपनी जांच में पाया कि सेल्समैन ने 8014 किलोग्राम गेहूं,1808 किलोग्राम चावल और 560 किलोग्राम मूंग को खुर्दबुर्द कर दिया है। या सीधे शब्दों मे कहे तो काला बाजारी कर दी। कुल मिलाकर लगभग 120 क्विंटल से अधिक सरकारी खाद्यान्न का गबन पाया गया, जो गरीबों के चूल्हे तक पहुंचना था।
कानूनी कार्रवाई और धाराएं
अधिकारियों के अनुसार, यह कृत्य म.प्र. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2015 की कंडिकाओं का स्पष्ट उल्लंघन है। इस गंभीर अनियमितता को देखते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत अपराध दर्ज कराया गया है। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से क्षेत्र के अन्य भ्रष्ट राशन विक्रेताओं में हड़कंप मच गया है।
अनुविभागीय अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि राशन वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ जेल भेजने जैसी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
नियमित जांच में खुला गबन का खेल
प्राथमिक वनोपज सहकारी संस्था रन्नौद के तहत संचालित उचित मूल्य दुकान अटलपुर कोड 0506037 के खिलाफ लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी कोलारस द्वारा जब दुकान का भौतिक सत्यापन और रिकॉर्ड की जांच की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार, विक्रेता देवेन्द्र यादव और प्रबंधक परमा जाटव न तो नियमित रूप से दुकान खोल रहे थे और न ही पात्र हितग्राहियों को राशन का वितरण कर रहे थे। इसके अलावा, उन्होंने विभागीय आदेशों की अवहेलना करते हुए पीओएस (POS) मशीन भी जमा नहीं की थी।
हजारों किलो अनाज रिकॉर्ड से गायब
जांच दल ने पाया कि दुकान से भारी मात्रा में खाद्यान्न खुर्द-बुर्द किया गया है। जांच दल ने अपनी जांच में पाया कि सेल्समैन ने 8014 किलोग्राम गेहूं,1808 किलोग्राम चावल और 560 किलोग्राम मूंग को खुर्दबुर्द कर दिया है। या सीधे शब्दों मे कहे तो काला बाजारी कर दी। कुल मिलाकर लगभग 120 क्विंटल से अधिक सरकारी खाद्यान्न का गबन पाया गया, जो गरीबों के चूल्हे तक पहुंचना था।
कानूनी कार्रवाई और धाराएं
अधिकारियों के अनुसार, यह कृत्य म.प्र. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2015 की कंडिकाओं का स्पष्ट उल्लंघन है। इस गंभीर अनियमितता को देखते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत अपराध दर्ज कराया गया है। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से क्षेत्र के अन्य भ्रष्ट राशन विक्रेताओं में हड़कंप मच गया है।
अनुविभागीय अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि राशन वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ जेल भेजने जैसी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।