शिवपुरी। जिले की नरवर तहसील में प्रशासनिक लापरवाही का एक मामला सामने आया है, जहाँ मुख्यमंत्री संबल जनकल्याण योजना के तहत स्वीकृत हुई सहायता राशि बैंक खाते में आने के बावजूद पीड़ित परिवार उसे निकाल नहीं पा रहा है। मामला नरवर जनपद पंचायत और बैंक के बीच उलझा हुआ है। अब मृतक की बेटी ने जनसुनवाई में जिला कलेक्टर को आवेदन देकर खाते पर लगे 'होल्ड' को हटाने की मांग की है।
यह है पूरा मामला
नरवर तहसील के ग्राम सिलरा निवासी कामिनी वंशकार ने कलेक्टर को दिए आवेदन में बताया कि उनके पिता सुरेश वंशकार का निधन कोरोना महामारी के दौरान एक सड़क दुर्घटना में हो गया था। चूंकि उनके पिता का वैध श्रमिक पंजीयन था, इसलिए शासन के नियमानुसार उनके परिवार के लिए 'मुख्यमंत्री संबल जनकल्याण योजना' के तहत 4 लाख रुपये (2 लाख + 2 लाख) की अनुग्रह सहायता राशि स्वीकृत की गई थी।
यह राशि उनकी माताजी, श्रीमती गौमती वंशकार के भारतीय स्टेट बैंक (SBI) शाखा करैरा के खाते में जमा भी कर दी गई। लेकिन जब परिवार ने राशि निकालने की कोशिश की, तो बैंक ने यह कहते हुए मना कर दिया कि संबंधित विभाग ने 2 लाख रुपये की राशि पर "होल्ड" (Hold) लगा रखा है।
कोविड और विभागीय त्रुटि के फेर में फंसा पैसा
कामिनी ने बताया कि उनके पिता की मृत्यु सड़क दुर्घटना में हुई थी, जिसके तहत संबल योजना में 4 लाख रुपये का प्रावधान है। न्यायालय ने भी इसे सड़क दुर्घटना मानते हुए क्लेम राशि दिलवाई है। लेकिन जनपद पंचायत नरवर ने त्रुटिवश प्रकरण को सड़क दुर्घटना का होते हुए भी सामान्य मृत्यु (जिसमें 2 लाख की सहायता मिलती है) की श्रेणी में मान लिया।
समस्या की दूसरी वजह यह बताई जा रही है कि मृत्यु कोरोना काल में हुई थी, जिस कारण अंतिम संस्कार से पहले शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका था। संभवतः इसी तकनीकी पेंच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट न होने के कारण विभाग ने बढ़ी हुई 2 लाख की राशि को होल्ड करवा दिया है।
पीड़ित परिवार की मांग आवेदन में कामिनी ने तर्क दिया है कि जब न्यायालय ने दुर्घटना को स्वीकार किया है और विभाग ने राशि स्वीकृत कर खाते में डाल भी दी है, तो अब उसे रोकना अनुचित है। उन्होंने कलेक्टर से निवेदन किया है कि बैंक खाते से 2 लाख रुपये पर लगा होल्ड हटवाया जाए, ताकि परिवार को आर्थिक सहायता मिल सके।
जिम्मेदारों के पाले में गेंद इस मामले में आवेदन पर जनपद पंचायत नरवर के सीईओ को कार्यवाही के लिए नोट भी लिखा गया है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस तकनीकी बाधा को दूर कर पीड़ित परिवार को उनके हक की राशि दिला पाता है।
यह है पूरा मामला
नरवर तहसील के ग्राम सिलरा निवासी कामिनी वंशकार ने कलेक्टर को दिए आवेदन में बताया कि उनके पिता सुरेश वंशकार का निधन कोरोना महामारी के दौरान एक सड़क दुर्घटना में हो गया था। चूंकि उनके पिता का वैध श्रमिक पंजीयन था, इसलिए शासन के नियमानुसार उनके परिवार के लिए 'मुख्यमंत्री संबल जनकल्याण योजना' के तहत 4 लाख रुपये (2 लाख + 2 लाख) की अनुग्रह सहायता राशि स्वीकृत की गई थी।
यह राशि उनकी माताजी, श्रीमती गौमती वंशकार के भारतीय स्टेट बैंक (SBI) शाखा करैरा के खाते में जमा भी कर दी गई। लेकिन जब परिवार ने राशि निकालने की कोशिश की, तो बैंक ने यह कहते हुए मना कर दिया कि संबंधित विभाग ने 2 लाख रुपये की राशि पर "होल्ड" (Hold) लगा रखा है।
कोविड और विभागीय त्रुटि के फेर में फंसा पैसा
कामिनी ने बताया कि उनके पिता की मृत्यु सड़क दुर्घटना में हुई थी, जिसके तहत संबल योजना में 4 लाख रुपये का प्रावधान है। न्यायालय ने भी इसे सड़क दुर्घटना मानते हुए क्लेम राशि दिलवाई है। लेकिन जनपद पंचायत नरवर ने त्रुटिवश प्रकरण को सड़क दुर्घटना का होते हुए भी सामान्य मृत्यु (जिसमें 2 लाख की सहायता मिलती है) की श्रेणी में मान लिया।
समस्या की दूसरी वजह यह बताई जा रही है कि मृत्यु कोरोना काल में हुई थी, जिस कारण अंतिम संस्कार से पहले शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका था। संभवतः इसी तकनीकी पेंच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट न होने के कारण विभाग ने बढ़ी हुई 2 लाख की राशि को होल्ड करवा दिया है।
पीड़ित परिवार की मांग आवेदन में कामिनी ने तर्क दिया है कि जब न्यायालय ने दुर्घटना को स्वीकार किया है और विभाग ने राशि स्वीकृत कर खाते में डाल भी दी है, तो अब उसे रोकना अनुचित है। उन्होंने कलेक्टर से निवेदन किया है कि बैंक खाते से 2 लाख रुपये पर लगा होल्ड हटवाया जाए, ताकि परिवार को आर्थिक सहायता मिल सके।
जिम्मेदारों के पाले में गेंद इस मामले में आवेदन पर जनपद पंचायत नरवर के सीईओ को कार्यवाही के लिए नोट भी लिखा गया है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस तकनीकी बाधा को दूर कर पीड़ित परिवार को उनके हक की राशि दिला पाता है।