शिवपुरी नही मना पा रही अपना गौरव दिवस, पितामह की जंयती सबसे सवृश्रेष्ठ दिन, इसलिए जिला है- Shivpuri News

शिवपुरी।
सवाल थोडा से अटपटा है लेकिन सार्थक है कि शिवपुरी का कोई गौरव नहीं है क्या,आखिरी क्यो नही मना पा रही है शिव की नगर अपना गौरव दिसव। नगरीय विकास एंव आवास मंत्री की गाइडलाइन के अनुसार अब मात्र 16 दिन ही शेष बचे है गौरव दिवस मनाने के,लेकिन स्थानीय स्तर पर इसकी कोई हलचल नही है। कारण सिर्फ एक है कि शिवपुरी का जिला प्रशासन ओर जनप्रतिनिधि यह तय नहीं कर पा रही है कि गौरव दिवस कब मनाया जाए,ऐसा कौन सा दिन है जिसे शिवपुरी का वास्तव में गौरव दिवस कहा जाए।

पहले समझे क्या है गौरव दिवस,और क्यों मनाते हैं

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने 31 जनवरी तक शेष सभी निकायों में गौरव दिवस मनाने के लिए निर्देशित किया है। पिछले वर्ष ही यह तय हो गया था कि सभी निकायों में गौरव दिवस मनाना है, लेकिन शिवपुरी में जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर अभी तक यह तय नहीं कर पाए हैं कि शिवपुरी का गौरव दिवस कब मनाया जाएगा। न तो अभी दिन तय किया गया है और न यह तय किया गया कि किस उपलब्धि या व्यक्ति विशेष के लिए गौरव दिवस मनाया जाएगा। ऐसे में बड़ा प्रश्नचिन्ह है कि आखिर अब तक शिवपुरी का गौरव क्यों तय नहीं हो पाया है। 31 जनवरी तक दिवस मनाने के निर्देश के बाद भी जनवरी के मध्य तक इसकी कोई योजना तैयार नहीं है। प्रदेश की बात करे तो 288 नगरीय निकाय गौरव दिवस मना चुके हैं और 125 नगरीय निकायों में अभी भी इसका आयोजन होना शेष है। इसमें शिवपुरी भी शामिल है।

अब सवाल की गौरव दिवस किस दिन मनाया जाए

शिवपुरी के अधिकारियों को यह पता है कि गौरव दिवस मनाया जाना है,लेकिन कब और कैसे मनाया जाए यह पता नही है।

माधौ महाराज:गांव को शहर विकसित शहर बनाया

कैलाश वाली माधो महाराज ने गांव को विकसित शहर बनाया था। मैसूर रियासत के इंजीनियर जो उस समय के विश्व प्रसिद्ध इंजीनियर थे उन्हें शिवपुरी के डवलपमेंट की जिम्मेदारी दी थी, इंजीनियर विश्वेश्वरैया की सोच ने आजादी से 50 साल पूर्व आजादी से 50 साल बाद तक की सोच में विकसित किया था। माधौ महाराज शिवपुरी के संस्थापक हैं। इसलिए इस शहर के पितामह कहा जा सकता है। जंगल में बसे भील आदिवासियों के एक गांव को उन्होंने ना केवल शहर बनाया परंतु उस समय का सबसे बेहतरीन शहर बनाया। सर्वसुविधा सम्पन्न शहर। जहां सडक़ें थीं, पेयजल के भंडार थे, खुला वातावरण, स्वच्छ पर्यावरण, रेल यातायात और वो सबकुछ जो उस जमाने में कल्पना से भी बाहर हुआ करता था।

सन् 1915 में जब लगभग पूरा का पूरा देश रेलगाड़ियों से सफर करता था, शिवपुरी में रेल चला करती थी। शाम ढलते ही लोग घरों में छिप जाया करते थे, परंतु शिवपुरी में स्ट्रीट लाइटें हुआ करतीं थीं। देश के कई बड़े शहरों से लोग यहां बसने के लिए चले आए थे, आज भी उनकी दूसरी या तीसरी पीढ़ी के लोग यहीं रह रहे हैं।

माधौ महाराज की मातृ भक्ति के उदाहरण से भी शिवपुरी वासी भली भांति परिचित हैंं। जिन्होंने अपनी मां जीजाबाई की स्मृति में छत्री का निर्माण कराया था और आज भी मां जीजाबाई की प्रतिमा की उसी तरह देखभाल होती है। इतने वर्षों के बाद भी अपनी मां को जीवंत रखना माधौ महाराज की मातृभक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है। उनके द्वारा निर्मित कराई गई छत्री गुणवत्ता में ताजमहल के स्तर की है,माधो महाराज शिवपुरी के पितामह है लोग घर बनाने के लिए इंजीनियर बुलाते है लेकिन माधौ महाराज ने शहर बसाने के लिए इंजीनियर बुलाया था। एक आदर्श पुत्र है मां के लिए छत्री का निर्माण कराया। माधौ महाराज की जयंती दिपावली के बाद आती है कुछ चुनिंदा ओर चंद लोग अपने पितामह की जयंती मनाते है अगर शिवपुरी का गौरव दिवस माधौ महाराज की जंयती के दिन मनाया जाता है तो सर्वमान्य और सार्थक होगा,और शिवपुरी को शहर की दिशा में ले जाने वाले दूरदर्शी सोच को एक सच्ची श्रद्धाजंलि होगी।

राजमाता विजयाराजे सिंधिया: राजरानी की जगह राजमाता कहलाई

राजमाता विजयाराजे सिंधिया: जनसंघ (भाजपा) के संस्थापक सदस्यों में शामिल विजयाराजे सिंधिया का रिश्ता एक राजपरिवार से होते हुए भी वे अपनी ईमानदारी, सादगी और प्रतिबद्धता के कारण लोकप्रिय रहीं। शिवपुरी में उनके नाम से मेडिकल कॉलेज और अंतरराज्यीय बस स्टैंड का नाम है। राजमाता विजयाराजे सिंधिया का शिवपुरी से खासा लगाव रहा है और वे यहां से सांसद भी रही हैं। 25 जनवरी को उनकी पुण्यतिथि है। यदि उनके नाम पर गौरव दिवस मनाया जाता है तो इस पर सत्ता दल भी एकमत होगा।

शिवपुरी की माटी को किया गौरवपूर्ण आजादी की समर मे पहचान दिलाई

तात्या टोपे: तात्या टोपे का शिवपुरी से खास नाता है। लेकिन उन्हें अंग्रेजों ने यहां पर फांसी दी और शिवपुरी का नाम देश के इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। 18 अप्रैल 1859 में उनको यहां फांसी दी गई थी। उनके नाम से यहां पर पार्क और संग्रहालय बना हुआ है। यहां पर करोड़ों की लागत से तात्या टोपे के नाम पर म्यूजियम प्रस्तावित है। यदि तात्या टोपे के नाम पर यदि गौरव दिवस मनाया जाता है तो यह शिवपुरी के लिए भी गौरव का विषय होगा।

पद्मभूषण कर्नल जी एस ढिल्लन: आजाद हिंद फौज के सेनापति

कर्नल जी एस ढिल्लन: पद्मभूषण कर्नल जी एस ढिल्लन नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के सेनापति रहे। बाद में वे शिवपुरी आकर बस गए। आजाद हिंद फौज में योगदान के साथ शिवपुरी के लिए भी उनका एक खास योगदान रहा यहाँ खेती को आधुनिकता प्रदान करने में । जब कर्नल ढिल्लन हातौद क्षेत्र में बसे तो वहां जंगल के सिवाए कुछ नहीं था यहाँ भी उन्होंने क्रांति लाते हुए खेती की नई पहल शुरू की। आज देखा जाए तो समूचे जिले में खेती के लिए यह आदर्श जगह है। छह फरवरी को कर्नल ढिल्लन की पुण्यतिथि आती है जिसे प्रशासन उनके स्मारक स्थल पर मनाता है।

इनका कहना है
मुझे अभी जानकारी नहीं है कि पूर्व में यहां क्या प्रयास किए गए हैं, लेकिन हम शिवपुरी का गौरव दिवस उत्साह और भव्य तरीके से मनाएंगे। इसके लिए परिषद में चर्चा की जाएगी और जो नाम फाइनल होगा उस पर आगे बढ़ेंगे। जल्द ही इसके लिए दिन तय करेंगे। -
केशव सिंह सगर,सीएमओ नपा

-यदि कोई आगे की तारीख सूट करती है तो गौरव दिवस अनुमति लेकर जनवरी के बाद भी मनाया जा सकता है। अभी कुछ तय नहीं हुआ है, लेकिन सभी लोगों से बात करेंगे और सुझाव लेंगे। जल्द ही शिवपुरी का गौरव दिवस भव्य तरीके से मनाएंगे। •
अक्षय कुमार सिंह,कलेक्टर