शिवपुरी। प्रदेश की प्रसिद्ध ओरल एवं डेंटल सर्जन डॉ.श्रीमती चेतना तनुज दीक्षित को राष्ट्रीय दंत चिकित्सक दिवस पर "इंडियन डेंटल एक्सीलेंस अवार्ड 2022" से सम्मानित किया गया है। शिवपुरी जिले में यह सम्मान पाने वाली पहली महिला डॉक्टर है पूर्व में डॉ.चेतना शिवपुरी जिला चिकित्सालय में भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। डॉ.श्रीमती चेतना को डॉ.कलाम इंटरनेशनल फाउंडेशन,नई दिल्ली के द्वारा महिला दिवस पर ग्लोबल फेमिना एक्सीलेंस अवार्ड भी दिया जा रहा हैं। डॉ.चेतना की इस सफलता पर शिवपुरी विधायक और प्रदेश की कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने बधाई दी हैं।
चेतना तनुज दीक्षित ने बताई दंत चिकित्सा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां
उन्होंने बताया दंत एवं मुंह की बीमारियों, विभिन्न विकारों और स्थितियों का अध्ययन, निदान , रोकथाम और उपचार दंत चिकित्सा में शामिल है! साथ ही साथ मौखिक श्लेष्म, जबड़े और चेहरे मौखिक और मैक्सिलोफैशियल सर्जरी (चेहरे का पुनर्निर्माण मैनुअल टूथ संरक्षण) इत्यादि इसी का हिस्सा है।
कोविड आने के बाद से 47 प्रतिशत लोगों को पीरियडोंटल डिजीज, मसूड़ों में इंफेक्शन-इन्फ्लेमेशन और दांतों के आस-पास हड्डियां कमजोर होने की समस्या हो सकती है. कोविड की पिछली 3 लहरों में दांतों की समस्या मूलतः एक विकराल रूप में सामने आई है, पायरिया, दांतों में दर्द, मुंह में छाले, दांतों से खून आना, बच्चों में दर्द की वजह से बुखार, बुजुर्ग में दाँत कमजोर होकर गिरना इत्यादि समस्या देखे गई हैं। डॉ. चेतना दीक्षित बताती है, हमे चौथी लहर के लिए अत्यंत सावधानी बरतने की आवश्यकता हैं।
ऐसे बढ़ता है खतरा -
डॉ. चेतना बताती है, फ्लोराइड युक्त जल उपचार और फ्लोराइड टूथपेस्ट का उपयोग करने से दांतों की सड़न और जैसे मौखिक रोगों से निपटने के साथ -साथ व्यवस्थित रोग जैसे कि ऑस्टियोपोरोसिस, मधुमेह, सीलिएक रोग, कैंसर, एचआईवी/एड्स के रूप में जो मौखिक गुहा को भी प्रभावित करता है से बचा जा सकता है। दांतों की विकृति या मौखिक अस्वस्थता का निरीक्षण करने के लिए मुंह की रेडियोलॉजी, वर्ष भर में दो या अधिक बार करवाना चाहिए।
कोरोना के मरीजों की लार में वायरस की मौजूदगी करीब 91 फीसद तक हो सकती है। मुंह की समस्या पूरे शरीर को प्रभावित कर सकती है, यही कारण है कि 90 फीसद से अधिक बीमारियों के लक्षण मुंह से ही दिखाई पड़ जाते हैं। कही बार मुँह में हुए सफेद छाले विकराल रूप लेकर कैंडीडीआसिस इंफेक्शन को जन्म दे सकता है जो बढ़ कर ब्लैक फंगस तक हो सकता है!
मरीज के लार में ही सबसे अधिक वायरस की मौजूदगी -
डॉ. श्रीमती चेतना दीक्षित ने बताया की एक बार जब मुंह के बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं, तो वे मसूड़ों की बीमारी का कारण बन सकते हैं, मुंह के ऊतकों को चबाकर रक्त प्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं. और एक बार वहां पहुंचने के बाद यह बैक्टीरिया शरीर के चारों ओर प्रवाह कर सकते हैं और सूजन के स्तर को बढ़ा सकते हैं।
अनुसंधान से पता चलता है कि जिन लोगों के मुंह का स्वास्थ्य खराब है, अगर वे कोरोना के संक्रमण की चपेट में आते हैं तो उनमें अधिक गंभीर लक्षण उभर सकते हैं. उन मरीजों की गहन देखभाल में भर्ती होने की संभावना 3.5 गुना अधिक है. वही उन्हें वेंटिलेटर पर रखने की आवश्यकता 4.5 गुना और कोविड से मरने की संभावना 9 गुना अधिक हो जाती है.
दंत सुरक्षा के जरूरी उपाय
डॉ. चेतना के मुताबिक कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अगर ध्यान दिया जाए तो हम बहुत हद तक दाँत एवं मुँह के रोगों से बच सकते है! दिन भर में 2 बार ब्रश करे, सुबह उठते ही और रात में सोने के पहले. ब्रश सर्कुलर मोशन में ही करे आगे के सर्फेस एरिया से शुरू करते हुए पीछे ले जाए।
ब्रश करने के बाद माउथ वॉश करके सोना चाहिए लेकिन उसे पानी मिला कर इस्तेमाल करें जिससे सॉफ्ट डेवरिस बाहर हो जाती है और कोने में दबा खाना निकल जाता है। दांतों के बीच में खाना फंसने पर केवल डेंटल फ्लॉस का इस्तेमाल करें । अगर घर में आपके बुजुर्ग डेंचर का इस्तमाल कर रहे है तो, रात में उसे निकाल कर अच्छे से ब्रश से स्वच्छ पानी में साफ करके पानी में डीप करके रखें। हर रोज सिट्रस फ्रूट, सेब तथा अंगूर खाएँ और अपने खाने में डेयरी उत्पाद जैसे दूध, दही आदि का सेवन भरपूर मात्रा में करें आने वाले दिन में गर्मीयों के दिनों में पानी को ज्यादा से ज्यादा पीना चाहिए।
गर्भाअवस्था में रखें ख्याल -
गर्भावती महिलाओं का पूर्ण तथा संतुलित आहार नहीं लेने का सीधा असर गर्भस्थ शिशु के दाँतों पर पड़ता है। इसलिए गर्भावस्था में जरूरी कैल्शियम और अन्य खनिज लेने चाहिए, दांतों की देखभाल के लिए दांतों की सफाई पर समुचित ध्यान दें। इससे दांत जीवन भर साथ देंगे, साथ ही आपके सौंदर्य को बढ़ाने में भी सहयोग देंगे। अगर आपको दांतों में कोई तकलीफ महसूस हो रही है तो डेटिस्ट से तुरंत संपर्क करें
क्लीनिक पर रखें यह सावधानियाँ
डॉ.दीक्षित के मुताबिक, क्लिनिक पर जिन उपकरणों का उपयोग किया जाता है वे अक्सर एरोसोल का उत्पादन करते हैं, जिसमें उच्च संख्या में SARS-CoV-2 विषाणु हो सकते हैं, वायरस की प्रतिमा जो COVID-19 का कारण बन सकते है, इसलिए समस्त उपकरणों को पूर्णत स्टरलाइज्ड करके डिसइंफेक्टेड सॉल्यूशन से साफ करना चाहिए. क्योंकि कोविड-19 के सुरक्षा मानकों का पालन एक बड़ी चुनौती होती हैं।
साथ ही सर्जिकल उपकरणों को अच्छी तरह से करें विसंक्रमित, तापमान नापने व पीपीई किट का इस्तेमाल जरूरी है, चेकअप या दांतों की सफाई व फिलिंग के दौरान पीपीई किट पहनें, इंट्रा ओरल एक्स-रे से बचें! एयरोसाल कम से कम करने की तरकीब निकालें, थ्री वे सिरिंज का इस्तेमाल कम से कम करें, भीड़ से बचने के लिए मरीजों का टाइम स्लॉट तय करे।
