शिवपुरी। जिले में करीब 8 साल बाद एक बार फिर मिट्टी के तेल (केरोसिन) की आपूर्ति शुरू होने जा रही है। एलपीजी गैस सिलेंडरों की बढ़ती किल्लत, अनियमित आपूर्ति और लगातार बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने यह कदम आपातकालीन राहत उपाय के रूप में उठाया है। प्रारंभिक चरण में शिवपुरी जिले को लगभग 8 हजार लीटर केरोसिन आवंटित किया गया है, जिसका वितरण पेट्रोल पंपों और राशन दुकानों के माध्यम से किया जाएगा।
The Kerosene Era Begins Anew in Shivpuri
इस फैसले से खासतौर पर होटल और ढाबा संचालकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो पिछले कुछ समय से गैस की कमी और महंगे ईंधन के कारण गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे थे। प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था नियंत्रित, पंजीकृत और निगरानी आधारित होगी, ताकि इसका लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे।गैस संकट ने बढ़ाई परेशानी, इसलिए लिया गया फैसला
जानकारी के अनुसार, पिछले कई वर्षों से घरेलू और व्यावसायिक उपयोग के लिए केरोसिन की आपूर्ति लगभग बंद हो चुकी थी। सरकार ने एलपीजी गैस को मुख्य ईंधन के रूप में बढ़ावा देने के बाद धीरे-धीरे मिट्टी के तेल की निर्भरता कम कर दी थी। लेकिन हाल के दिनों में गैस सिलेंडरों की कमी, आपूर्ति में अनियमितता और कीमतों में बढ़ोतरी ने छोटे व्यवसायियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
सबसे ज्यादा असर छोटे होटल, चाय-नाश्ते की दुकानों, ढाबों और भोजनालयों पर पड़ा है, जहां रोजाना बड़ी मात्रा में ईंधन की जरूरत होती है। कई संचालकों का कहना है कि गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहे, और यदि मिल भी रहे हैं तो उनकी कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि रसोई संचालन की लागत तेजी से बढ़ गई है। इसी संकट को देखते हुए प्रशासन ने अब वैकल्पिक ईंधन के रूप में केरोसिन की आपूर्ति फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है।
होटल और ढाबा संचालकों को मिलेगी बड़ी राहत
प्रशासन ने साफ किया है कि केरोसिन का मुख्य लाभ होटल और ढाबा संचालकों को दिया जाएगा, ताकि वे अपने रसोई संचालन को सुचारू रूप से चला सकें। गैस की कमी के चलते कई छोटे व्यवसायियों को या तो उधार में सिलेंडर लेना पड़ रहा था, या फिर महंगे बाजार भाव पर ईंधन खरीदना पड़ रहा था, जिससे उनका मुनाफा प्रभावित हो रहा था। अब यदि केरोसिन उपलब्ध होता है, तो उन्हें कम लागत पर वैकल्पिक ईंधन मिल सकेगा। इससे छोटे व्यापारियों को न सिर्फ आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि उनके व्यवसाय की निरंतरता भी बनी रहेगी।
केवल पंजीकृत होटल-ढाबों को ही मिलेगा केरोसिन
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मिट्टी का तेल केवल पंजीकृत होटल और ढाबा संचालकों को ही दिया जाएगा। इसके लिए पात्र हितग्राहियों को आवेदन करना होगा और साथ में आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। इन दस्तावेजों की जांच के बाद ही उन्हें निर्धारित श्रेणी और मात्रा के अनुसार केरोसिन उपलब्ध कराया जाएगा। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अनियमित वितरण, फर्जी दावों और गलत हाथों में तेल पहुंचने की संभावना कम हो। प्रशासन का मानना है कि यदि वितरण को पंजीकरण आधारित और दस्तावेजी बनाया जाए, तो केवल उन्हीं लोगों को लाभ मिलेगा जो वास्तव में गैस संकट से प्रभावित हैं।
पेट्रोल पंप और राशन दुकानों से होगा वितरण
शिवपुरी जिले में केरोसिन का वितरण पेट्रोल पंपों और राशन दुकानों के माध्यम से किया जाएगा। प्रशासन ने इसके लिए एक अस्थायी व्यवस्था बनाई है, जिसके तहत 2500 से 5000 लीटर तक केरोसिन का भंडारण और बिक्री की जा सकेगी।
विशेष रूप से पेट्रोल पंपों पर केरोसिन की बिक्री फिलहाल 60 दिनों के लिए अस्थायी रूप से शुरू की जाएगी। यह अवधि आगे की मांग, उपलब्धता और उपयोग के आधार पर बढ़ाई भी जा सकती है। राशन दुकानों के माध्यम से वितरण की व्यवस्था उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी होगी, जहां छोटे व्यवसायी या जरूरतमंद उपभोक्ता पेट्रोल पंप तक आसानी से नहीं पहुंच पाते।
घरेलू उपभोक्ताओं को भी मिल सकती है आंशिक राहत
हालांकि प्रशासन ने प्राथमिकता होटल और ढाबा संचालकों को दी है, लेकिन इस फैसले का अप्रत्यक्ष लाभ उन परिवारों को भी मिल सकता है जो एलपीजी सिलेंडर की मारामारी से जूझ रहे हैं। ग्रामीण और अर्ध शहरी इलाकों में अब भी ऐसे परिवार हैं, जो गैस सिलेंडर की अनियमित उपलब्धता के कारण वैकल्पिक ईंधन की तलाश में रहते हैं।
कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त निगरानी
मिट्टी के तेल की आपूर्ति शुरू होने के साथ ही प्रशासन ने कालाबाजारी और दुरुपयोग की आशंका को भी गंभीरता से लिया है। अधिकारियों का कहना है कि वितरण प्रणाली की सख्ती से निगरानी की जाएगी, ताकि तेल का इस्तेमाल सिर्फ पात्र लोगों तक सीमित रहे और किसी तरह की अवैध बिक्री न हो। केरोसिन अतीत में कई बार ब्लैक मार्केटिंग, मिलावट और अवैध भंडारण के मामलों में चर्चा में रहा है। इसी वजह से इस बार प्रशासन शुरुआत से ही नियंत्रण और रिकॉर्ड आधारित वितरण पर जोर दे रहा है। संभावना जताई जा रही है कि हितग्राहियों की सूची, वितरण रजिस्टर और स्टॉक की निगरानी के लिए संबंधित विभागों को नियमित रिपोर्टिंग करनी होगी।
मांग बढ़ी तो बढ़ सकता है आवंटन
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, फिलहाल जिले को 8 हजार लीटर का प्रारंभिक आवंटन दिया गया है, लेकिन यदि आगामी दिनों में मांग अधिक सामने आती है, तो इस आवंटन को बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है। यानी यह योजना केवल अस्थायी राहत भर नहीं, बल्कि व्यावहारिक जरूरतों के अनुसार आगे विस्तार भी ले सकती है। यदि होटल-ढाबा संचालकों और अन्य पात्र वर्गों को इससे वास्तविक राहत मिलती है, तो आने वाले समय में यह व्यवस्था स्थायी या चरणबद्ध रूप से विस्तारित की जा सकती है।
छोटे व्यवसायियों के लिए राहत की उम्मीद
जिले के कई छोटे व्यवसायियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में ईंधन लागत इतनी बढ़ गई थी कि रोजमर्रा का संचालन कठिन हो गया था। कई होटल और ढाबा संचालकों को खाना बनाने के लिए महंगे कमर्शियल सिलेंडर लेने पड़ रहे थे, जबकि कई जगह सिलेंडर की उपलब्धता भी समय पर नहीं हो रही थी। ऐसे में केरोसिन की आपूर्ति शुरू होना उनके लिए जीवन रेखा जैसी राहत माना जा रहा है। खासकर छोटे कस्बों और ग्रामीण मार्गों पर चलने वाले ढाबों के लिए यह फैसला आर्थिक रूप से काफी उपयोगी साबित हो सकता है।
जिला खाद्य अधिकारी ने दी जानकारी
इस संबंध में जिला खाद्य अधिकारी तुलेश्वर कुर्रे ने बताया कि-प्रदेश के अन्य जिलों के साथ-साथ शिवपुरी में भी केरोसिन की बिक्री शुरू होने वाली है। जिले को लगभग 8 हजार लीटर तेल का आवंटन प्राप्त होगा। पेट्रोल पंप एवं राशन दुकानों की मदद से तेल लोगों को विक्रय किया जाएगा।