मुखिया बनते हो, लेकिन बात तक नहीं सुनते, सिंधिया के रवैये पर सवर्ण समाज भड़का

Adhiraj Awasthi
Uploaded Image शिवपुरी। शहर में रविवार शाम आयोजित एक स्नेह भोज कार्यक्रम के बाद केंद्रीय मंत्री और क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को यूजीसी मुद्दे पर ज्ञापन देने पहुंचे सवर्ण समाज के लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। आरोप है कि सिंधिया ने ज्ञापन तो ले लिया, लेकिन समाज के लोगों को अपनी बात रखने तक का मौका नहीं दिया। बस कुछ सेकंड में ज्ञापन लिया और आगे बढ़ गए। इसी बात ने सवर्ण समाज के भीतर गहरा असंतोष और अपमान का भाव पैदा कर दिया।

मामला यहीं नहीं रुका। ज्ञापन देने पहुंचे राष्ट्रभक्त सवर्ण समाज संगठन के नेताओं मुख्य जिला संयोजक शत्रुघ्न तोमर, कार्यकारी मुख्य जिला संयोजक महेश शर्मा,  जिला संयोजक भरत शर्मा राष्ट्रभक्त सवर्ण समाज संगठन शिवपुरी के सहित 100 सवर्ण समाज के लोग थे। इन लोगों ने अपनी खुलकर
अपनी नाराजगी जताई और साफ शब्दों में कहा कि जब आप खुद को हमारा मुखिया बताते हैं, तो कम से कम हमारी बात सुनने का समय तो देना चाहिए था। 

होटल पीएस में स्नेह भोज, बाहर इंतजार करती रही नाराजगी
रविवार को देर शाम करीब 7 बजे, मेडिकल कॉलेज में पूर्व में आयोजित कैंप की सफलता पर रोटरी क्लब और शहर की मीडिया को धन्यवाद देने के लिए होटल पीएस में एक स्नेह भोज कार्यक्रम रखा गया था। इसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पहुंचे थे। लेकिन होटल के बाहर एक और माहौल बन रहा था,सवर्ण समाज के लोग यूजीसी के विरोध में ज्ञापन लेकर पहले से ही इंतजार में खड़े थे। उनका मकसद सिर्फ ज्ञापन सौंपना नहीं, बल्कि इस मुद्दे पर सिंधिया का स्पष्ट रुख जानना भी था।

जैसे ही सिंधिया कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, समाज के लोगों ने उन्हें ज्ञापन सौंपा। लेकिन आरोप है कि उन्होंने न तो रुककर बात की, न कोई प्रतिक्रिया दी, न समाज के प्रतिनिधियों को सुनना जरूरी समझा। यही चुप्पी और जल्दबाजी अब सियासी असंतोष में बदल गई है।

हम आपका भाव जानना चाहते थे, आपने हमें लायक ही नहीं समझा
ज्ञापन के बाद सवर्ण समाज के नेता भरत शर्मा ने बेहद तल्ख अंदाज में अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि,आपके इस व्यवहार से सवर्ण समाज बेहद क्षुब्ध है। आपने हमें एक मिनट का समय तक नहीं दिया। बस ज्ञापन लिया और चले गए। हम यूजीसी को लेकर आपका भाव जानना चाहते थे। हम यह समझना चाहते थे कि सवर्ण समाज को लेकर आपका क्या रुख है। भरत शर्मा ने आगे कहा कि सिंधिया अक्सर स्वयं को हमारा  मुखिया बताते हैं और समाज भी उन्हें उसी रूप में देखता है, लेकिन मुखिया वही होता है जो अपने लोगों की बात सुने, न कि उन्हें नजरअंदाज कर आगे बढ़ जाए।

मुखिया हो तो मुखिया जैसा व्यवहार भी दिखना चाहिए
भरत शर्मा ने मीडिया में दिए गए अपने बयान में कहा कि आप हमारे लोकसभा क्षेत्र के सांसद हैं। आप स्वयं कहते हैं कि मैं आपका मुखिया हूं, और हम भी आपको अपना मुखिया मानते हैं। लेकिन मुखिया होने के नाते हम आपसे इस विषय पर आपका रुख जानना चाहते थे। ज्ञापन लेकर सीधे निकल जाना किसी जिम्मेदार मुखिया का व्यवहार नहीं कहा जा सकता।

अब इसकी प्रतिक्रिया भी दिखेगी
मामले को और गंभीर बनाते हुए भरत शर्मा ने कहा कि इस व्यवहार की प्रतिक्रिया आगे सवर्ण समाज के माध्यम से देखने को मिलेगी। यह बयान साफ संकेत देता है कि मामला सिर्फ एक ज्ञापन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में यह सामाजिक और राजनीतिक विरोध का रूप भी ले सकता है। खासतौर पर तब, जब समाज के प्रतिनिधियों को यह महसूस हो रहा हो कि उनकी बात सुनी ही नहीं जा रही।

नाराजगी का असली कारण: ज्ञापन नहीं, संवाद चाहिए था
बताया जा रहा है कि सवर्ण समाज के लोग सिर्फ कागज थमाने नहीं पहुंचे थे, बल्कि वे चाहते थे कि सिंधिया इस संवेदनशील मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट करें। लेकिन जब उन्हें सिर्फ औपचारिकता जैसा व्यवहार मिला, तो यह नाराजगी स्वाभाविक रूप से आक्रोश में बदल गई। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कई बार नेताओं की एक मिनट की संवेदनशीलता, घंटों के भाषण से ज्यादा असर डालती है। यहां वही एक मिनट नहीं दिया गया, और अब वही सबसे बड़ा विवाद बन गया है।