एसडीएम के रसोइए ने ली तहसीलदार के नाम पर 80 हजार की रिश्वत, FIR के आदेश

Adhiraj Awasthi

पोहरी। शिवपुरी जिले की पोहरी तहसील में कोटवार नियुक्ति के नाम पर 80 हजार रुपए की  रिश्वत लेने का मामला सामने आया है। इस पूरे मामले ने तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि रिश्वत लेने का आरोप किसी अधिकारी पर नहीं, बल्कि एसडीएम आवास पर खाना बनाने वाले रसोइए पर लगा है। मामले की शिकायत सामने आने के बाद एसडीएम पोहरी अनुपम शर्मा ने जांच कराई और प्रथम दृष्टया मामला सही पाए जाने पर रसोइए गुलाब बाथम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी कर दिए हैं। साथ ही पीड़ित को उसके 80 हजार रुपए वापस दिलाने की कार्रवाई भी कराई गई है।

SDM's Cook Takes Bribe of ₹80,000 in the Name of Tehsildar

जानकारी के अनुसार, पोहरी तहसील के ग्राम तिघरा निवासी कैलाश की मुलाकात एसडीएम के रसोइए गुलाब बाथम से हुई थी। बातचीत के दौरान गुलाब बाथम ने कैलाश को भरोसा दिलाया कि वह उसे कोटवार बनवा सकता है। इसके बदले उसने 80 हजार रुपए की मांग की। आरोप है कि नौकरी पाने की उम्मीद में कैलाश ने यह रकम गुलाब बाथम को दे दी। बताया जा रहा है कि कोटवार नियुक्ति के आदेश तहसीलदार स्तर से जारी होने थे, इसलिए पीड़ित को यह विश्वास दिलाया गया कि काम पक्का है। लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी नियुक्ति आदेश जारी नहीं हुए, जिससे कैलाश को शक हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है।

तीन महीने तक टालमटोल, फिर की शिकायत
पीड़ित कैलाश ने कई बार संपर्क कर अपनी नियुक्ति के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन उसे हर बार टालमटोल भरे जवाब मिलते रहे। जब काफी समय गुजरने के बाद भी कोई आदेश जारी नहीं हुआ, तब उसने पूरा मामला अधिकारियों के सामने रख दिया। मामला तहसीलदार के तबादले के बाद और ज्यादा चर्चा में आया, क्योंकि इसी दौरान पीड़ित ने हिम्मत जुटाकर शिकायत कर दी। शिकायत के बाद प्रशासन हरकत में आया और पूरे प्रकरण की जांच शुरू हुई।

SDM ने लिया गंभीरता से संज्ञान
मामला सामने आने के बाद एसडीएम अनुपम शर्मा ने इसे गंभीरता से लिया। जांच में यह बात सामने आई कि पीड़ित से रकम ली गई थी। इसके बाद प्रशासन ने पीड़ित को उसकी पूरी 80 हजार रुपए की राशि वापस दिलवाई। यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि आमतौर पर ऐसे मामलों में पीड़ित को न पैसा वापस मिलता है और न ही न्याय की स्पष्ट उम्मीद दिखती है। एसडीएम ने मामले में सख्ती दिखाते हुए गुलाब बाथम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी कर दिए हैं। अब पुलिस कार्रवाई के बाद इस मामले में और भी कई पहलुओं का खुलासा हो सकता है।

तहसीलदार पर भी उठे सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद तत्कालीन तहसीलदार निशा भारद्वाज की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। दरअसल, कोटवार की नियुक्ति का अंतिम आदेश तहसीलदार द्वारा जारी किया जाता है, ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि किसी व्यक्ति ने नियुक्ति के नाम पर खुलेआम 80 हजार रुपए ले लिए, तो क्या यह पूरा खेल अकेले संभव था?

सूत्रों के अनुसार, एसडीएम आवास का रसोइया गुलाब बाथम महीने में दो से तीन बार तहसीलदार के आवास पर भी जाता था। ऐसे में यह मामला अब केवल एक व्यक्ति की ठगी तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि तहसील तंत्र की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लगा रहा है।

1 अप्रैल को हुआ तहसीलदार का तबादला
बताया जा रहा है कि तत्कालीन तहसीलदार निशा भारद्वाज का 1 अप्रैल को पोहरी से शिवपुरी स्थित भू-अभिलेख कार्यालय में तबादला हो चुका है। इसी तबादले के बाद मामला और तेजी से उजागर हुआ। स्थानीय स्तर पर लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि यदि शिकायत पहले सामने आती, तो क्या कार्रवाई इतनी जल्दी हो पाती?

तत्कालीन तहसीलदार ने आरोपों को बताया गलत
मामले पर सफाई देते हुए तत्कालीन तहसीलदार निशा भारद्वाज ने कहा कि—तिघरा गांव के कोटवार का आदेश नवंबर 2025 में ही कर दिया था। कोटवार की नियुक्ति को लेकर मेरे ऊपर गलत आरोप लगाए जा रहे हैं। उनके इस बयान के बाद अब यह जांच का विषय बन गया है कि यदि आदेश नवंबर 2025 में ही जारी हो चुके थे, तो फिर कैलाश से 80 हजार रुपए किस आधार पर लिए गए और किसने उसे नियुक्ति का झांसा दिया।

SDM बोले- FIR के आदेश दे दिए हैं
इस मामले पर एसडीएम पोहरी अनुपम शर्मा ने स्पष्ट रूप से कहा कि-मामला संज्ञान में आया था, इसलिए इसकी जांच कराई गई। चूंकि कोटवार की नियुक्ति तहसीलदार करता है, इसलिए पूरे मामले को गंभीरता से देखा गया। पीड़ित के पैसे वापस करवा दिए गए हैं और गुलाब बाथम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए हैं।