शिवपुरी। शहर के गांधी पार्क में मेला लगाने को लेकर पिछले करीब 20 दिनों से चल रहा विवाद अब खत्म हो गया है। तमाम प्रशासनिक अड़चनों, अनुमति विवाद और नियमों को लेकर उठे सवालों के बाद आखिरकार सभी आवश्यक अनुमतियों के साथ गांधी पार्क में 2 अप्रैल से मेला शुरू हो गया है, जो 31 अप्रैल तक संचालित होगा। इस मेले से नगर पालिका को 17 लाख 50 हजार रुपए की आय होगी, जो पहले दिए गए ठेके से काफी अधिक है।
इस पूरे प्रकरण ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली, ठेका प्रक्रिया और अनुमति व्यवस्था को लेकर कई सवाल भी खड़े किए, क्योंकि शुरुआत में इस मेले को लेकर एसडीएम से लेकर अन्य संबंधित विभागों ने अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद मामला तूल पकड़ता गया और शहर में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था।
20 मार्च को पहली बार दी गई थी अनुमति
जानकारी के अनुसार, 20 मार्च को नगर पालिका ने आकाश शिवहरे नाम की फर्म को गांधी पार्क में एक माह के लिए मेला लगाने की अनुमति दे दी थी। इसके एवज में मेला ठेकेदार द्वारा नगर पालिका को 12 लाख रुपए दिए गए थे। शुरुआत में सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था और ठेकेदार ने भी मेले की तैयारियां शुरू कर दी थीं। झूले, दुकानें और अन्य सामग्री गांधी पार्क पहुंचने लगी थी। शहरवासियों को भी लगने लगा था कि जल्द ही गांधी पार्क में मेला शुरू हो जाएगा।
लेकिन इसी बीच यह मामला विवादों में घिर गया, क्योंकि बाद में यह बात सामने आई कि मेला ठेका नियमों के अनुरूप नहीं दिया गया था। इस जानकारी के बाद नगर पालिका पर सवाल उठने लगे कि आखिर बिना पूर्ण प्रक्रिया और स्पष्ट अनुमति के इतना बड़ा सार्वजनिक आयोजन कैसे स्वीकृत कर दिया गया।
नियमों पर सवाल उठे तो निरस्त करनी पड़ी अनुमति
जब यह स्पष्ट हुआ कि ठेका प्रक्रिया में नियमों का पालन ठीक ढंग से नहीं हुआ, तो नगर पालिका ने कुछ दिन पहले मेला लगाने की पहली अनुमति निरस्त कर दी। इस फैसले के बाद ठेकेदार और प्रशासन के बीच स्थिति उलझती चली गई, क्योंकि तब तक मेला लगाने वाला पक्ष झूले और दुकानों के साथ मौके पर पहुंच चुका था और मेले का प्रारंभिक स्वरूप लगभग तैयार हो चुका था। गांधी पार्क जैसे सार्वजनिक स्थल पर बिना स्पष्ट अनुमति के गतिविधियां शुरू होने से प्रशासनिक स्तर पर असहज स्थिति बन गई। वहीं शहर में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं कि आखिर मेला लगेगा या नहीं।
नगर पालिका ने फिर निकाली नई विज्ञप्ति
विवाद बढ़ने के बाद नगर पालिका ने पूरे मामले को दोबारा प्रक्रिया में लाने का फैसला किया।
इसके तहत 23 मार्च को नई विज्ञप्ति जारी कर तीन दिन के भीतर मेला लगाने के इच्छुक ठेकेदारों से आवेदन मांगे गए। हालांकि इस बार भी दिलचस्प स्थिति यह रही कि फिर से केवल एक ही आवेदन आया, और वह भी उसी फर्म का जिसने पहले यह ठेका लिया था।
इसके बाद इस बार प्रशासन ने पहले की तुलना में ज्यादा सावधानी बरती और संबंधित विभागों से आवश्यक मंजूरियां सुनिश्चित कीं। बताया गया कि एसडीएम कार्यालय, एसडीओपी कार्यालय और बिजली कंपनी समेत संबंधित विभागों से आवश्यक स्वीकृतियां लेने के बाद ही इस बार मेले को वैध रूप से अनुमति दी गई।
अब 12 नहीं, 17.50 लाख में मिला ठेका
इस पूरे विवाद के बीच नगर पालिका को आर्थिक रूप से एक बड़ा फायदा भी हुआ।
जहां पहली बार मेला ठेका 12 लाख रुपए में दिया गया था, वहीं दूसरी प्रक्रिया के बाद उसी मेले का ठेका 17 लाख 50 हजार रुपए में दिया गया। यानी नगर पालिका को इस पूरे विवाद और दोबारा प्रक्रिया के बाद करीब 5 लाख 50 हजार रुपए अधिक आय प्राप्त हुई। इससे यह सवाल भी उठने लगे हैं कि यदि पहली बार ही प्रक्रिया पारदर्शी और नियमसम्मत होती, तो नगर पालिका को पहले ही अधिक राजस्व मिल सकता था।
2 अप्रैल से शुरू होकर 31 अप्रैल तक चलेगा मेला
अब तमाम औपचारिकताओं के बाद गांधी पार्क में मेला विधिवत शुरू हो चुका है।
यह मेला 2 अप्रैल से 31 अप्रैल तक संचालित होगा। शहरवासियों के लिए यह मेला मनोरंजन, खरीदारी और बच्चों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा। मेले में झूले, खेल-तमाशे, खानपान की दुकानें, घरेलू सामान के स्टॉल और बच्चों के लिए मनोरंजन गतिविधियां शामिल हैं। शुरुआती दिनों में ही गांधी पार्क में लोगों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिल रही है।
इस बार शिवपुरी में लगेंगे दो अलग-अलग मेले
इस बार शिवपुरी शहर में एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग स्थानों पर मेले लगेंगे, जो अपने आप में अलग स्थिति मानी जा रही है। जहां एक ओर गांधी पार्क में मेला शुरू हो चुका है, वहीं दूसरी ओर शहर के पारंपरिक सिद्धेश्वर मंदिर प्रांगण में भी हर साल की तरह मेला लगेगा। आमतौर पर सिद्धेश्वर मंदिर परिसर में लगने वाला मेला शहर का प्रमुख और पारंपरिक मेला माना जाता रहा है। हर वर्ष इसका भूमिपूजन महाशिवरात्रि के अवसर पर किया जाता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं शहरवासी इसमें शामिल होते हैं। लेकिन इस बार गांधी पार्क और सिद्धेश्वर मंदिर प्रांगण—दोनों स्थानों पर अलग-अलग मेले आयोजित होने से शहर में उत्साह के साथ-साथ प्रशासनिक चुनौती भी बढ़ गई है।
सिद्धेश्वर मेले का टेंडर 20 अप्रैल को खुलेगा
नगर पालिका के अनुसार, सिद्धेश्वर मंदिर प्रांगण में लगने वाले मेले का टेंडर 20 अप्रैल को खोला जाएगा। यह मेला आर्थिक दृष्टि से नगर पालिका के लिए अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि पिछले वर्षों में इससे काफी बड़ा राजस्व प्राप्त हुआ है। जानकारी के मुताबिक, पिछले साल सिद्धेश्वर मंदिर प्रांगण में 45 दिन तक लगे मेले से नगर पालिका को 61 लाख रुपए की आय हुई थी। इस बार भी नगर पालिका को उम्मीद है कि यह मेला बड़ी आय का स्रोत बनेगा। बताया जा रहा है कि इस बार सिद्धेश्वर मेले का ठेका लेने वाले ठेकेदार को कम से कम 44 लाख रुपए देने होंगे। हालांकि वास्तविक स्थिति टेंडर खुलने के बाद ही स्पष्ट होगी।
नगर पालिका की आय बढ़ाने का बड़ा जरिया बने मेले
शहर में लगने वाले मेले केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि नगर पालिका की आय का बड़ा स्रोत भी बनते जा रहे हैं। गांधी पार्क मेले से 17.50 लाख रुपए, जबकि सिद्धेश्वर मेले से पिछले साल लाखों रुपए मिले थे। यही वजह है कि इस बार मेले के आयोजन को लेकर नगर पालिका आर्थिक दृष्टि से भी गंभीर दिखाई दे रही है। हालांकि गांधी पार्क मेले को लेकर जो शुरुआती विवाद सामने आया, उसने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि प्रक्रिया पारदर्शी और नियमसम्मत न हो, तो राजस्व के साथ-साथ प्रशासन की साख भी दांव पर लग सकती है।
सीएमओ ने दी आधिकारिक जानकारी
इस संबंध में नगर पालिका सीएमओ इशांक धाकड़ ने बताया कि गांधी पार्क में मेला चालू हो गया है। यह मेला 2 अप्रैल से 31 अप्रैल तक संचालित होगा। नगर पालिका को मेले से 17 लाख 50 हजार रुपए की आय हुई है। सिद्धेश्वर मंदिर प्रांगण में लगने वाले मेले का टेंडर 20 अप्रैल को खुलेगा।
इस पूरे प्रकरण ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली, ठेका प्रक्रिया और अनुमति व्यवस्था को लेकर कई सवाल भी खड़े किए, क्योंकि शुरुआत में इस मेले को लेकर एसडीएम से लेकर अन्य संबंधित विभागों ने अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद मामला तूल पकड़ता गया और शहर में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था।
20 मार्च को पहली बार दी गई थी अनुमति
जानकारी के अनुसार, 20 मार्च को नगर पालिका ने आकाश शिवहरे नाम की फर्म को गांधी पार्क में एक माह के लिए मेला लगाने की अनुमति दे दी थी। इसके एवज में मेला ठेकेदार द्वारा नगर पालिका को 12 लाख रुपए दिए गए थे। शुरुआत में सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था और ठेकेदार ने भी मेले की तैयारियां शुरू कर दी थीं। झूले, दुकानें और अन्य सामग्री गांधी पार्क पहुंचने लगी थी। शहरवासियों को भी लगने लगा था कि जल्द ही गांधी पार्क में मेला शुरू हो जाएगा।
लेकिन इसी बीच यह मामला विवादों में घिर गया, क्योंकि बाद में यह बात सामने आई कि मेला ठेका नियमों के अनुरूप नहीं दिया गया था। इस जानकारी के बाद नगर पालिका पर सवाल उठने लगे कि आखिर बिना पूर्ण प्रक्रिया और स्पष्ट अनुमति के इतना बड़ा सार्वजनिक आयोजन कैसे स्वीकृत कर दिया गया।
नियमों पर सवाल उठे तो निरस्त करनी पड़ी अनुमति
जब यह स्पष्ट हुआ कि ठेका प्रक्रिया में नियमों का पालन ठीक ढंग से नहीं हुआ, तो नगर पालिका ने कुछ दिन पहले मेला लगाने की पहली अनुमति निरस्त कर दी। इस फैसले के बाद ठेकेदार और प्रशासन के बीच स्थिति उलझती चली गई, क्योंकि तब तक मेला लगाने वाला पक्ष झूले और दुकानों के साथ मौके पर पहुंच चुका था और मेले का प्रारंभिक स्वरूप लगभग तैयार हो चुका था। गांधी पार्क जैसे सार्वजनिक स्थल पर बिना स्पष्ट अनुमति के गतिविधियां शुरू होने से प्रशासनिक स्तर पर असहज स्थिति बन गई। वहीं शहर में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं कि आखिर मेला लगेगा या नहीं।
नगर पालिका ने फिर निकाली नई विज्ञप्ति
विवाद बढ़ने के बाद नगर पालिका ने पूरे मामले को दोबारा प्रक्रिया में लाने का फैसला किया।
इसके तहत 23 मार्च को नई विज्ञप्ति जारी कर तीन दिन के भीतर मेला लगाने के इच्छुक ठेकेदारों से आवेदन मांगे गए। हालांकि इस बार भी दिलचस्प स्थिति यह रही कि फिर से केवल एक ही आवेदन आया, और वह भी उसी फर्म का जिसने पहले यह ठेका लिया था।
इसके बाद इस बार प्रशासन ने पहले की तुलना में ज्यादा सावधानी बरती और संबंधित विभागों से आवश्यक मंजूरियां सुनिश्चित कीं। बताया गया कि एसडीएम कार्यालय, एसडीओपी कार्यालय और बिजली कंपनी समेत संबंधित विभागों से आवश्यक स्वीकृतियां लेने के बाद ही इस बार मेले को वैध रूप से अनुमति दी गई।
अब 12 नहीं, 17.50 लाख में मिला ठेका
इस पूरे विवाद के बीच नगर पालिका को आर्थिक रूप से एक बड़ा फायदा भी हुआ।
जहां पहली बार मेला ठेका 12 लाख रुपए में दिया गया था, वहीं दूसरी प्रक्रिया के बाद उसी मेले का ठेका 17 लाख 50 हजार रुपए में दिया गया। यानी नगर पालिका को इस पूरे विवाद और दोबारा प्रक्रिया के बाद करीब 5 लाख 50 हजार रुपए अधिक आय प्राप्त हुई। इससे यह सवाल भी उठने लगे हैं कि यदि पहली बार ही प्रक्रिया पारदर्शी और नियमसम्मत होती, तो नगर पालिका को पहले ही अधिक राजस्व मिल सकता था।
2 अप्रैल से शुरू होकर 31 अप्रैल तक चलेगा मेला
अब तमाम औपचारिकताओं के बाद गांधी पार्क में मेला विधिवत शुरू हो चुका है।
यह मेला 2 अप्रैल से 31 अप्रैल तक संचालित होगा। शहरवासियों के लिए यह मेला मनोरंजन, खरीदारी और बच्चों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा। मेले में झूले, खेल-तमाशे, खानपान की दुकानें, घरेलू सामान के स्टॉल और बच्चों के लिए मनोरंजन गतिविधियां शामिल हैं। शुरुआती दिनों में ही गांधी पार्क में लोगों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिल रही है।
इस बार शिवपुरी में लगेंगे दो अलग-अलग मेले
इस बार शिवपुरी शहर में एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग स्थानों पर मेले लगेंगे, जो अपने आप में अलग स्थिति मानी जा रही है। जहां एक ओर गांधी पार्क में मेला शुरू हो चुका है, वहीं दूसरी ओर शहर के पारंपरिक सिद्धेश्वर मंदिर प्रांगण में भी हर साल की तरह मेला लगेगा। आमतौर पर सिद्धेश्वर मंदिर परिसर में लगने वाला मेला शहर का प्रमुख और पारंपरिक मेला माना जाता रहा है। हर वर्ष इसका भूमिपूजन महाशिवरात्रि के अवसर पर किया जाता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं शहरवासी इसमें शामिल होते हैं। लेकिन इस बार गांधी पार्क और सिद्धेश्वर मंदिर प्रांगण—दोनों स्थानों पर अलग-अलग मेले आयोजित होने से शहर में उत्साह के साथ-साथ प्रशासनिक चुनौती भी बढ़ गई है।
सिद्धेश्वर मेले का टेंडर 20 अप्रैल को खुलेगा
नगर पालिका के अनुसार, सिद्धेश्वर मंदिर प्रांगण में लगने वाले मेले का टेंडर 20 अप्रैल को खोला जाएगा। यह मेला आर्थिक दृष्टि से नगर पालिका के लिए अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि पिछले वर्षों में इससे काफी बड़ा राजस्व प्राप्त हुआ है। जानकारी के मुताबिक, पिछले साल सिद्धेश्वर मंदिर प्रांगण में 45 दिन तक लगे मेले से नगर पालिका को 61 लाख रुपए की आय हुई थी। इस बार भी नगर पालिका को उम्मीद है कि यह मेला बड़ी आय का स्रोत बनेगा। बताया जा रहा है कि इस बार सिद्धेश्वर मेले का ठेका लेने वाले ठेकेदार को कम से कम 44 लाख रुपए देने होंगे। हालांकि वास्तविक स्थिति टेंडर खुलने के बाद ही स्पष्ट होगी।
नगर पालिका की आय बढ़ाने का बड़ा जरिया बने मेले
शहर में लगने वाले मेले केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि नगर पालिका की आय का बड़ा स्रोत भी बनते जा रहे हैं। गांधी पार्क मेले से 17.50 लाख रुपए, जबकि सिद्धेश्वर मेले से पिछले साल लाखों रुपए मिले थे। यही वजह है कि इस बार मेले के आयोजन को लेकर नगर पालिका आर्थिक दृष्टि से भी गंभीर दिखाई दे रही है। हालांकि गांधी पार्क मेले को लेकर जो शुरुआती विवाद सामने आया, उसने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि प्रक्रिया पारदर्शी और नियमसम्मत न हो, तो राजस्व के साथ-साथ प्रशासन की साख भी दांव पर लग सकती है।
सीएमओ ने दी आधिकारिक जानकारी
इस संबंध में नगर पालिका सीएमओ इशांक धाकड़ ने बताया कि गांधी पार्क में मेला चालू हो गया है। यह मेला 2 अप्रैल से 31 अप्रैल तक संचालित होगा। नगर पालिका को मेले से 17 लाख 50 हजार रुपए की आय हुई है। सिद्धेश्वर मंदिर प्रांगण में लगने वाले मेले का टेंडर 20 अप्रैल को खुलेगा।