Shivpuri News, बिना पीएम अंतिम संस्कार की कोशिश, वन विभाग ने रुकवाई अपने ही कर्मचारी की अंत्येष्टि

Adhiraj Awasthi

शिवपुरी। शिवपुरी के मुक्तिधाम में मंगलवार का दृश्य सामान्य से बिल्कुल अलग था। जब परिजन मृतक बनवारी लाल रजक के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे और शव को चिता पर रखा जा चुका था, तभी वन विभाग की टीम वहां पहुंच गई। विभाग ने कानूनी अनिवार्यताओं का हवाला देते हुए अंतिम संस्कार रुकवा दिया और शव को अपने कब्जे में ले लिया।

हादसे से शुरू हुई कहानी
मृतक बनवारी लाल रजक वन विभाग में कार्यरत थे। सोमवार को वे अपने एक साथी के साथ बाइक से ड्यूटी के सिलसिले में जा रहे थे, तभी रन्नौद रोड पर राजापुर गांव के पास उनकी बाइक अनियंत्रित हो गई। इस हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। ग्वालियर ले जाते समय रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

पोस्टमार्टम क्यों बना अनिवार्य?
चूंकि बनवारी लाल एक शासकीय कर्मचारी थे और उनकी मृत्यु एक दुर्घटना में हुई थी, इसलिए बिना पोस्टमार्टम के उनका अंतिम संस्कार कानूनी पेच फंस सकता था। विभागीय लाभ, अनुकंपा नियुक्ति और बीमा दावों के लिए 'पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट' एक अनिवार्य दस्तावेज होता है। परिजनों ने भावुकता में आकर बिना पुलिस सूचना या पीएम कराए सीधे अंतिम संस्कार की तैयारी कर ली थी।

मुक्तिधाम में असमंजस और समझाइश
अचानक पुलिस और वन विभाग की टीम को देखकर मुक्तिधाम में मौजूद लोग और परिजन हतप्रत रह गए। कुछ समय के लिए तनाव और असमंजस की स्थिति बनी रही। हालांकि, अधिकारियों ने संवेदनशीलता के साथ परिजनों को समझाया कि यदि आज पोस्टमार्टम नहीं हुआ, तो भविष्य में परिवार को मिलने वाली सरकारी सहायता और पेंशन में बड़ी बाधा आ सकती है। इसके बाद शव को चिता से उठाकर मेडिकल कॉलेज भेजा गया।