शिवपुरी। जिले के पोषण आहार संयंत्र में इन दिनों नियमों को ताक पर रखकर प्रशासनिक और वित्तीय मनमानी का खेल चल रहा है। संयंत्र की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्रीमती युक्ति शर्मा पर पद के दुरुपयोग और शासन के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगे हैं, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
बिना सूचना गायब, पर वेतन जारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, CEO श्रीमती युक्ति शर्मा की प्रसूति जनवरी माह में हुई थी। नियमतः उन्हें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को प्रसूति अवकाश (Maternity Leave) के लिए विधिवत आवेदन देना था, लेकिन सूत्रों का दावा है कि ऐसा कोई आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया।
ताज्जुब की बात यह है कि वह संयंत्र में नियमित रूप से उपस्थित नहीं हो रही हैं, इसके बावजूद उन्हें पूर्ण वेतन और सभी शासकीय सुविधाएं निरंतर प्रदान की जा रही हैं। बिना किसी आधिकारिक अवकाश स्वीकृति के ड्यूटी से नदारद रहना और सरकारी खजाने से लाभ लेना वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। शिवपुरी कलेक्टर रविंद्र चौधरी से इस मामले में बातचीत की तो उन्होंने कहा कि विधिवत लीव नहीं ली तो दिखवा लेते है और नियमानुसार कार्यवाही की जाऐगी।
महिला समूहों का हक मारकर निजी कंपनी को नवाजा
मामला केवल वेतन तक सीमित नहीं है। शासन की नीति है कि पोषण आहार संयंत्रों में सुरक्षा और अन्य कार्यों की जिम्मेदारी स्थानीय महिला स्व-सहायता समूहों को दी जाए ताकि उनका सशक्तिकरण हो सके। लेकिन शिवपुरी संयंत्र में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए यह काम इंदोरिया सिक्योरिटी फोर्स" नामक एक निजी कंपनी को सौंप दिया गया है। बिना टेंडर प्रक्रिया या नियमों के विरुद्ध जाकर निजी कंपनी को लाभ पहुंचाना एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है।
जांच के नाम पर लीपापोती
हैरानी की बात यह है कि इस मामले को लेकर पूर्व में भी उच्च स्तर पर शिकायतें की गई और प्रश्न उठाए गए, लेकिन विभाग के आला अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। बार-बार मिल रही शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना कहीं न कहीं प्रशासनिक सांठगांठ की ओर इशारा करता है।
कार्यवाही की उठ रही मांग स्थानीय स्तर पर अब इस मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है। मांग की जा रही है कि CEO के बैंक खातों, हाजिरी रजिस्टर और सुरक्षा ठेके की फाइलों की जांच की जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर लापरवाही पर कब जागता है।
बिना सूचना गायब, पर वेतन जारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, CEO श्रीमती युक्ति शर्मा की प्रसूति जनवरी माह में हुई थी। नियमतः उन्हें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को प्रसूति अवकाश (Maternity Leave) के लिए विधिवत आवेदन देना था, लेकिन सूत्रों का दावा है कि ऐसा कोई आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया।
ताज्जुब की बात यह है कि वह संयंत्र में नियमित रूप से उपस्थित नहीं हो रही हैं, इसके बावजूद उन्हें पूर्ण वेतन और सभी शासकीय सुविधाएं निरंतर प्रदान की जा रही हैं। बिना किसी आधिकारिक अवकाश स्वीकृति के ड्यूटी से नदारद रहना और सरकारी खजाने से लाभ लेना वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। शिवपुरी कलेक्टर रविंद्र चौधरी से इस मामले में बातचीत की तो उन्होंने कहा कि विधिवत लीव नहीं ली तो दिखवा लेते है और नियमानुसार कार्यवाही की जाऐगी।
महिला समूहों का हक मारकर निजी कंपनी को नवाजा
मामला केवल वेतन तक सीमित नहीं है। शासन की नीति है कि पोषण आहार संयंत्रों में सुरक्षा और अन्य कार्यों की जिम्मेदारी स्थानीय महिला स्व-सहायता समूहों को दी जाए ताकि उनका सशक्तिकरण हो सके। लेकिन शिवपुरी संयंत्र में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए यह काम इंदोरिया सिक्योरिटी फोर्स" नामक एक निजी कंपनी को सौंप दिया गया है। बिना टेंडर प्रक्रिया या नियमों के विरुद्ध जाकर निजी कंपनी को लाभ पहुंचाना एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है।
जांच के नाम पर लीपापोती
हैरानी की बात यह है कि इस मामले को लेकर पूर्व में भी उच्च स्तर पर शिकायतें की गई और प्रश्न उठाए गए, लेकिन विभाग के आला अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। बार-बार मिल रही शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना कहीं न कहीं प्रशासनिक सांठगांठ की ओर इशारा करता है।
कार्यवाही की उठ रही मांग स्थानीय स्तर पर अब इस मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है। मांग की जा रही है कि CEO के बैंक खातों, हाजिरी रजिस्टर और सुरक्षा ठेके की फाइलों की जांच की जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर लापरवाही पर कब जागता है।
