शिवपुरी। शिवपुरी शहर के जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पर आज एक दिव्यांग युवक आंखों में प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना लेकर पहुंचा, जहां उसने शिवपुरी कलेक्टर से यूपीएससी की तैयारी हेतु राशि सहित किताबों की मांग की,लेकिन युवक को निराश होते हुए अपने घर वापसी लौटना पड़ा। युवक की आंखों में प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना हैं।
जानकारी के अनुसार ग्राम डेहरवारा तहसील कोलारस के रहने वाले दयाराम जाटव ने बताया कि मै बीए और एलएलबी फाइनल की शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं, अब सिविल सर्विस की कठिन परीक्षा की तैयारी करना चाहता हूं, लेकिन पिता के देहांत के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय हो गई है कि मेरे पास आवश्यक किताबें और स्टेशनरी खरीदने तक के पैसे नहीं हैं। दयाराम ने बताया कि बिना अध्ययन सामग्री के उनका भविष्य अंधकारमय लग रहा है।
वहीं दयाराम ने बताया कि में अपने माता—पिता के जाने के बाद अपनी बहन के यहां निवास कर रहा हूं और में हाथ से विकलांग हूं,इसलिए कोई कार्य करने में असमर्थ हूं तो मेरी बहन मेरा लालन—पालन कर रही हैं। लेकिन मेरी पढ़ने में बहुत रूचि हैं में सिविल सर्विसेस की परीक्षा देना चाहता हूं,जिसके लिए मेरे पास किताब व पैसे नहीं हैं।
रेडक्रॉस और सिंधिया से उम्मीद
वहीं दयाराम ने शिवपुरी कलेक्टर से भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से आर्थिक सहायता दिलाने का अनुरोध किया है। विशेष बात यह है कि उन्होंने इस आवेदन की प्रतिलिपि केंद्रीय मंत्री श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी प्रेषित की है। छात्र का मानना है कि यदि प्रशासन उसे किताबों और स्टेशनरी के रूप में मदद कर देता है, तो वह मेहनत करके अपने गांव और जिले का नाम रोशन कर सकता है।
प्रशासन से सहानुभूति की अपील
दिव्यांग यूनिक आईडी और अपनी शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेजों के साथ दयाराम ने गुहार लगाई है कि उनके मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए। एक तरफ जहाँ युवा बेरोजगारी और कठिनाइयों से हार मान लेते हैं, वहीं दयाराम जैसे युवाओं का यह जज्बा समाज के लिए एक प्रेरणा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मेधावी और संघर्षशील छात्र की पुकार पर कितनी जल्दी संज्ञान लेता है।
जानकारी के अनुसार ग्राम डेहरवारा तहसील कोलारस के रहने वाले दयाराम जाटव ने बताया कि मै बीए और एलएलबी फाइनल की शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं, अब सिविल सर्विस की कठिन परीक्षा की तैयारी करना चाहता हूं, लेकिन पिता के देहांत के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय हो गई है कि मेरे पास आवश्यक किताबें और स्टेशनरी खरीदने तक के पैसे नहीं हैं। दयाराम ने बताया कि बिना अध्ययन सामग्री के उनका भविष्य अंधकारमय लग रहा है।
वहीं दयाराम ने बताया कि में अपने माता—पिता के जाने के बाद अपनी बहन के यहां निवास कर रहा हूं और में हाथ से विकलांग हूं,इसलिए कोई कार्य करने में असमर्थ हूं तो मेरी बहन मेरा लालन—पालन कर रही हैं। लेकिन मेरी पढ़ने में बहुत रूचि हैं में सिविल सर्विसेस की परीक्षा देना चाहता हूं,जिसके लिए मेरे पास किताब व पैसे नहीं हैं।
रेडक्रॉस और सिंधिया से उम्मीद
वहीं दयाराम ने शिवपुरी कलेक्टर से भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से आर्थिक सहायता दिलाने का अनुरोध किया है। विशेष बात यह है कि उन्होंने इस आवेदन की प्रतिलिपि केंद्रीय मंत्री श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी प्रेषित की है। छात्र का मानना है कि यदि प्रशासन उसे किताबों और स्टेशनरी के रूप में मदद कर देता है, तो वह मेहनत करके अपने गांव और जिले का नाम रोशन कर सकता है।
प्रशासन से सहानुभूति की अपील
दिव्यांग यूनिक आईडी और अपनी शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेजों के साथ दयाराम ने गुहार लगाई है कि उनके मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए। एक तरफ जहाँ युवा बेरोजगारी और कठिनाइयों से हार मान लेते हैं, वहीं दयाराम जैसे युवाओं का यह जज्बा समाज के लिए एक प्रेरणा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मेधावी और संघर्षशील छात्र की पुकार पर कितनी जल्दी संज्ञान लेता है।