शिवपुरी,कारीगरों ने प्रतिमा की आंखें खोली, 800 साल पुरानी मूर्ति अब नए स्वरूप में देगी दर्शन

Adhiraj Awasthi

शिवपुरी। शिवपुरी शहर के देहात थाना सीमा में काली माई माता मंदिर के आगे झांसी रोड पर एक छात्रावास के निर्माण में नीव खुदाई में 18 मार्च 2020 में भगवान आदिनाथ की 26 इंच की जैन तीर्थंकर की प्रतिमा मिली थी। जैन पंडितो के अनुसार यह प्रतिमा काफी पुरानी थी और यह प्रतिमा आदिनाथ भगवान की थी।

जब यह प्रतिमा मिली थी,इस प्रतिमा साथ 10 अन्य मूर्तियों के हिस्से भी मिले थे,जब यह प्रतिमा मिली थी,उस समय मुनि सुव्रत सागर महाराज शिवपुरी में मौजूद थे। जैन समाज ने प्रतिमा को अपने पास रखने की कोशिश की। लेकिन तत्कालीन कलेक्टर, एसपी और पुरातत्व विभाग ने इसे अपने अधिकार में ले लिया। बाद में प्रतिमा को कोतवाली थाने के हनुमान मंदिर परिसर में सुरक्षित रखा गया।

2023 में जैन मुनि पदम सागर महाराज शिवपुरी आए और उन्होंने कहा कि थाने में सुरक्षित आदिनाथ जैन मूर्ति को मंदिर में होना चाहिए। जैन समाज ने आंदोलन किया। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी ने सकारात्मक रुख अपनाया और दस्तावेजों की जांच की। अंततः मूर्ति 20 मार्च 2023 को विधिवत जैन समाज को सौंपी गई। इसे चंद्रप्रभु जिनालय में विराजमान किया गया।

भगवान आदिनाथ की 26 इंच की प्राचीन प्रतिमा को नया स्वरूप दिया गया है। उड़ीसा के मूर्तिकारों ने इसे पर्रिकर सहित सुंदर रूप में गढ़ा है। यह खड़गासन प्रतिमा संवत 1220 की है। पहले इसकी आंखें बंद थीं। यह बालू पत्थर से बनी हुई थी। अब इसे चंद्रप्रभु जिनालय में विराजमान किया गया है। यहां 5 से 8 फरवरी तक पंचकल्याणक के साथ इसकी प्रतिष्ठा होगी।

कारीगरों ने मूर्ति की आंखें खोलकर बढ़ाई सुंदरता
जैन विद्वान पंडित अजीत जैन अरिहंत ने बताया कि मूर्ति पर संवत 1220 अंकित है, जिससे यह 12-13 वीं शताब्दी की प्रतीत होती है। केश विन्यास भी उसी काल का है। कारीगरों ने आंखें खोलकर मूर्ति और पर्रिकर को अधिक सुंदर बनाया।