शिवपुरी। आम जनता को उनके घर के नजदीक ही बेहतर और मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई संजीवनी क्लीनिक योजना शिवपुरी जिले में खुद बीमार नजर आ रही है। सरकार ने दावा किया था कि इन केंद्रों पर 80 से अधिक प्रकार की जांचें, मुफ्त दवाइयां और विशेषज्ञ परामर्श मिलेगा, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जिले के 7 में से 5 केंद्रों पर डॉक्टर ही तैनात नहीं हैं।
स्टाफ नर्स और इंटर्न के भरोसे व्यवस्था
जिले में संचालित सात संजीवनी क्लीनिकों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। खेड़ापति रोड, हवाई पट्टी, करोंदी, करैरा और बैराड़ स्थित क्लीनिकों में स्थाई डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। यहाँ की कमान स्टाफ नर्सों या 15-15 दिन के रोटेशन पर आने वाले इंटर्न डॉक्टरों के हाथ में है। बैराड़ की स्थिति तो और भी खराब है, जहाँ इमारत बनकर तैयार है लेकिन क्लीनिक अब तक शुरू ही नहीं हो सका है। वर्तमान में केवल ठकुरपुरा और मनियर केंद्रों पर ही नियमित डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं।
समय की पाबंदी नहीं, 1 बजे के बाद पसरा सन्नाटा
नियमों के अनुसार, संजीवनी क्लीनिक सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक खुलने चाहिए। लेकिन स्थानीय निवासियों की शिकायत है कि जहाँ डॉक्टर पदस्थ हैं, वे भी दोपहर 1 बजे के बाद नजर नहीं आते। दोपहर बाद अस्पताल में केवल सफाई कर्मचारी ही मिलता है, जबकि एएनएम और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ गायब रहता है। ऐसे में दूर-दराज से आने वाले मरीजों को बिना इलाज के ही जिला अस्पताल या निजी क्लीनिकों की ओर रुख करना पड़ता है।
जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति
सरकार ने यहाँ 80 प्रकार की पैथोलॉजी जांचों का वादा किया था, लेकिन अधिकांश केंद्रों पर केवल बीपी और शुगर की जांच ही हो पा रही है। पैथोलॉजिस्ट और जरूरी लैब उपकरणों के अभाव में अन्य महत्वपूर्ण जांचें ठप पड़ी हैं। स्थानीय निवासी दिनेश गुर्जर का कहना है कि महीनों से यही स्थिति बनी हुई है, बीमार होने पर क्लीनिक जाने का कोई फायदा नहीं मिलता क्योंकि वहाँ डॉक्टर ही मौजूद नहीं होते।
स्टाफ नर्स और इंटर्न के भरोसे व्यवस्था
जिले में संचालित सात संजीवनी क्लीनिकों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। खेड़ापति रोड, हवाई पट्टी, करोंदी, करैरा और बैराड़ स्थित क्लीनिकों में स्थाई डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। यहाँ की कमान स्टाफ नर्सों या 15-15 दिन के रोटेशन पर आने वाले इंटर्न डॉक्टरों के हाथ में है। बैराड़ की स्थिति तो और भी खराब है, जहाँ इमारत बनकर तैयार है लेकिन क्लीनिक अब तक शुरू ही नहीं हो सका है। वर्तमान में केवल ठकुरपुरा और मनियर केंद्रों पर ही नियमित डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं।
समय की पाबंदी नहीं, 1 बजे के बाद पसरा सन्नाटा
नियमों के अनुसार, संजीवनी क्लीनिक सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक खुलने चाहिए। लेकिन स्थानीय निवासियों की शिकायत है कि जहाँ डॉक्टर पदस्थ हैं, वे भी दोपहर 1 बजे के बाद नजर नहीं आते। दोपहर बाद अस्पताल में केवल सफाई कर्मचारी ही मिलता है, जबकि एएनएम और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ गायब रहता है। ऐसे में दूर-दराज से आने वाले मरीजों को बिना इलाज के ही जिला अस्पताल या निजी क्लीनिकों की ओर रुख करना पड़ता है।
जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति
सरकार ने यहाँ 80 प्रकार की पैथोलॉजी जांचों का वादा किया था, लेकिन अधिकांश केंद्रों पर केवल बीपी और शुगर की जांच ही हो पा रही है। पैथोलॉजिस्ट और जरूरी लैब उपकरणों के अभाव में अन्य महत्वपूर्ण जांचें ठप पड़ी हैं। स्थानीय निवासी दिनेश गुर्जर का कहना है कि महीनों से यही स्थिति बनी हुई है, बीमार होने पर क्लीनिक जाने का कोई फायदा नहीं मिलता क्योंकि वहाँ डॉक्टर ही मौजूद नहीं होते।