ललित मुदगल भोपाल। शिवपुरी-श्योपुर जिले की सीमा पर स्थित कूनो नेशनल पार्क के लिए आज का दिन दोहरी खुशी लेकर आया है। दक्षिण अफ्रीका से चीतों की दूसरी खेप आने की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर मादा चीता गामिनी ने 3 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। गामिनी का भारत की धरती पर यह दूसरा प्रसव है, जिससे देश में अब चीतों की कुल संख्या बढ़कर 38 हो गई है। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो कूनो में नामीबियाई चीतों की तुलना में दक्षिण अफ्रीकी चीतों का सर्वाइवल रेट काफी बेहतर रहा है, जहां 8 नामीबियाई चीतों में से केवल 37% (3 चीते) जीवित बचे हैं, वहीं दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीतों में से 66.6% (8 चीते) पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं।
आज दोहरे खुशी का है। 18 फरवरी 23 को दक्षिण अफ्रीका से दूसरी चीतो की खेप भारत की धरा पर पहुंची थी,सफलता के 3 वर्ष की वर्षगांठ वाले आज के दिन ही दक्षिण अफ्रीका से भारत आयी मादा चीता गामिनी ने 3 बच्चों को जन्म दिया है,मादा चीता गामिनी का यह दूसरा प्रसव है और भारत की धरती पर चीतों का नौवां सफल प्रसव है। अब देश की धरती पर चीतों की कुल संख्या बढ़कर 38 हो गई है।
कूनो नेशनल पार्क में चीता का बसाने की 2022 में हुई शुरुआत सफल रही। कूनो नेशनल पार्क में चीते कुनबा बढ़ा रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका से दूसरी खेप में 18 फरवरी 23 को आए 12 चीतों को देश में आज बुधवार को 3 साल पूरे हुए। उन्हें यह धरा रास आने लगी है। यही कारण है। दक्षिण अफ्रीकी चीतों का सर्वाइवल नामीबियाई चीतों से अच्छा है। 8 नामीबियाई चीतों में 3 (37%), 12 अफ्रीकी चीतों में 8 (66.6%) जिंदा है।
गामिनी, वीरा, निरवा ने बढ़ाया कुनबा
कूनों में अभी देसी चीते (27 शावक) हैं। इनमें 7 दक्षिण अफ्रीकी मादा चीतों के हैं। चीता गामिनी के 3 और आज जन्मे 3 शावक सहित 6, निरवा के 3 और वीरा के 3 शावक अच्छे से सर्वाइव कर रहे हैं। हालांकि नामीबियाई चीता ज्वाला के 3, आशा के 8 शावक व ज्वाला की पहली शावक मुखी के 5 शावक हैं।
चीतों के लिए मुफीद कूनो इसलिए अफ्रीकी
कूनो देश के मध्य में है। यहां दिन में तापमान ज्यादा होता है, लेकिन पूरे साल अत्यधिक शुष्क और कठोर नहीं रहता। मानसून के कारण घास भरपूर उगती है। सर्दी में भी तापमान संतुलित रहता है। यह मौसमी संतुलन चीतों के शरीर पर ज्यादा तनाव नहीं डालता। दक्षिण अफ्रीका में
भी दिन का पारा तेज और रात में गिरावट आती है। इससे चीतों को कूनो में ढलने में आसानी हुई। वहीं, नामीबिया में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क/अर्थ शुष्क रहता है। लेकिन कूनो में मानसून में आर्द्रता काफी बढ़ जाती है। इससे चीतों में त्वचा रोग, परजीवी संक्रमण बढ़ जाता है।
गांधी सागर में 3. अफ्रीकी चीते
आज दोहरे खुशी का है। 18 फरवरी 23 को दक्षिण अफ्रीका से दूसरी चीतो की खेप भारत की धरा पर पहुंची थी,सफलता के 3 वर्ष की वर्षगांठ वाले आज के दिन ही दक्षिण अफ्रीका से भारत आयी मादा चीता गामिनी ने 3 बच्चों को जन्म दिया है,मादा चीता गामिनी का यह दूसरा प्रसव है और भारत की धरती पर चीतों का नौवां सफल प्रसव है। अब देश की धरती पर चीतों की कुल संख्या बढ़कर 38 हो गई है।
कूनो नेशनल पार्क में चीता का बसाने की 2022 में हुई शुरुआत सफल रही। कूनो नेशनल पार्क में चीते कुनबा बढ़ा रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका से दूसरी खेप में 18 फरवरी 23 को आए 12 चीतों को देश में आज बुधवार को 3 साल पूरे हुए। उन्हें यह धरा रास आने लगी है। यही कारण है। दक्षिण अफ्रीकी चीतों का सर्वाइवल नामीबियाई चीतों से अच्छा है। 8 नामीबियाई चीतों में 3 (37%), 12 अफ्रीकी चीतों में 8 (66.6%) जिंदा है।
गामिनी, वीरा, निरवा ने बढ़ाया कुनबा
कूनों में अभी देसी चीते (27 शावक) हैं। इनमें 7 दक्षिण अफ्रीकी मादा चीतों के हैं। चीता गामिनी के 3 और आज जन्मे 3 शावक सहित 6, निरवा के 3 और वीरा के 3 शावक अच्छे से सर्वाइव कर रहे हैं। हालांकि नामीबियाई चीता ज्वाला के 3, आशा के 8 शावक व ज्वाला की पहली शावक मुखी के 5 शावक हैं।
चीतों के लिए मुफीद कूनो इसलिए अफ्रीकी
कूनो देश के मध्य में है। यहां दिन में तापमान ज्यादा होता है, लेकिन पूरे साल अत्यधिक शुष्क और कठोर नहीं रहता। मानसून के कारण घास भरपूर उगती है। सर्दी में भी तापमान संतुलित रहता है। यह मौसमी संतुलन चीतों के शरीर पर ज्यादा तनाव नहीं डालता। दक्षिण अफ्रीका में
भी दिन का पारा तेज और रात में गिरावट आती है। इससे चीतों को कूनो में ढलने में आसानी हुई। वहीं, नामीबिया में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क/अर्थ शुष्क रहता है। लेकिन कूनो में मानसून में आर्द्रता काफी बढ़ जाती है। इससे चीतों में त्वचा रोग, परजीवी संक्रमण बढ़ जाता है।
गांधी सागर में 3. अफ्रीकी चीते
दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीतों में से 4 की मौत हुई। 8 जीवित हैं। इनमें से 3 चीते पावक-प्रभाष, मादा चीता धीरा मंदसौर जिले के गांधी सागर में शिफ्ट किए गए।