कबाड़ा व्यापारी पर बंधुआ मजदूरी का आरोप, 7 महीने से नहीं दिया आदिवासी मजदूर का वेतन

Adhiraj Awasthi

शिवपुरी। शिवपुरी शहर के पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर आज एक आदिवासी महिला अपने 2 मासूम बच्चों के साथ शिकायत लेकर पहुंची,महिला ने बताया कि 7 महीने से कबाड़ा व्यापारी ने हमारी वेतन नहीं दी हैं वहीं जब हम व्यापारी से अपनी मेहनत की वेतन मांगते हैं तो वह धमकी देता हैं,वहीं वेतन रोककर उन्हें बंधक जैसी स्थितियों में काम करने पर मजबूर किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार ग्राम दादौल की रहने वाली शिमला आदिवासी ने बताया कि मेरा पति राजपाल आदिवासी बड़ौदी स्थित भूपेंद्र कोरी और अर्जुन कोरी की कबाड़ दुकान और गोदाम पर 7500 रुपये प्रति माह की पगार पर काम करते हैं मालिकों द्वारा मेरे पति को जबरन गोदाम में रखा जाता है और बिना किसी भुगतान के दिन-रात चौकीदारी कराई जाती है। कुल 52,530 रुपये का वेतन बकाया होने के कारण गरीब परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया है।

बीमार पति के बदले पत्नी पर दबाव
शिमला का कहना हैं कि जब मेरे पति राजपाल की तबीयत खराब हुई और आरोपियों ने शिमला से कहा कि यदि राजपाल बीमार है तो उसे अस्पताल में भर्ती कर दे, लेकिन उसकी जगह तुझे गोदाम पर रहकर काम करना होगा।

प्रशासनिक कार्यवाही की मांग
पीड़ित परिवार अब इन आरोपियों के चंगुल से मुक्त होना चाहता है और अपना बकाया वेतन मांग रहा है। शिमला आदिवासी ने कलेक्टर से गुहार लगाई है कि दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्यवाही की जाए और उनका बकाया वेतन वापस दिलाया जाए ताकि वे अपने बीमार पति का उपचार करा सकें।