शिवपुरी। शहर की प्यास बुझाने वाली लाइफ-लाइन सिंध जलावर्धन योजना इन दिनों गंभीर लापरवाही की बीमारी से जूझ रही है। बीते 6 फरवरी से मड़ीखेड़ा सप्लाई पर लॉकडाउन लगा हुआ है, जिससे शहर के कंठ सूख रहे हैं। योजना में एक के बाद एक उभरे तीन प्रमुख सिम्पटम्स रूपी समस्याओ ने पूरी व्यवस्था को वेंटिलेटर पर ला दिया है। पहले जियो कंपनी द्वारा लाइन में फ्रैक्चर कर दिया,उसके बाद मोटरो की सांसे फूल गई और उन्होने काम करना बंद कर दिया,फिर ट्रांसफार्मर ने झटके देने शुरू कर दिए,एक के बाद एक समस्याओ ने शहर के हाथो मे कट्टी थमा दी। हालांकि, नगर पालिका प्रशासन अब मरम्मत की वर्किंग वैक्सीन लगाने का दावा कर रहा है, ताकि जल्द से जल्द जल आपूर्ति बहाल की जा सके।
सबसे पहले जियो के कारण लोगों का समय बर्बाद
शुक्रवार 6 फरवरी को सुबह 11 बजे एक जिओ मोबाइल कंपनी द्वारा केबिल बिछाने के दौरान हुई खुदाई के दौरान पोकलेन से सिंध से पानी आने वाली लाइन फूट गई थी। शुरुआत में तो नगर पालिका ने दावा किया था कि दो दिन में लाइन की मरम्मत कर पानी की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी, पर स्थिति यह बनी कि तीन दिन निकलने के बाद तो देर रात 6 फरवरी को लाइन मरम्मत का काम शुरू हुआ। दो दिन में यह काम पूरा हुआ तो पता चला कि फिल्टर प्लांट पर पानी फेंकने वाली मोटर में कुछ खराबी आ गई है।
इसके बाद उस मोटर को सही करने के साथ एक जगह पर बाल्ब को भी दुरुस्त करना था। यह पूरा काम कर बुधवार रात को सप्लाई शुरू की गई तो फिर वाल्व लीकेज होने पर सप्लाई को बंद करना पड़ा। गुरुवार सुबह जैसे-तैसे काम पूरा हो पाया तो पता चला कि मड़ीखेड़ा इंटेकवेल पर डीपी में कुछ गड़बड़ी आ गई है। इसके बाद गुरुवार देर शाम तक बिजली की खराबी के कारण पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो पाई थी थी।
शहर मे सहलग का सीजन,लोग परेशान,टैंकर के बढ़े भाव
वर्तमान समय मे सहलग का सीजन चल रहा है,शहर के कई घरों में शादियां होने के कारण पानी की खपत अधिक हो रही है,लेकिन मडीखेडा के नल नहीं आने के कारण यह लोग परेशान हो रहे है,अब जनमानस के पास एक ही विकल्प बचा है वह टैंकर,लेकिन टैंकर की मांग के कारण उनके भी भाव बढ़ गए है।
हालात इतने खराब है कि जो पानी के टैंकर सामान्य दिनों में महज 250 से 350 रुपए में एक कॉल करने के एक से दो घंटे में आ जाते हैं। वही टैंकर जब पानी की सप्लाई बंद हो जाती है तो रेट बढ़कर 500 से 600 रुपए हो जाती है और इसके बाद भी इनको आने में 10 से 15 घंटे का समय लगता है। नगर पालिका के पास करीब 10 टैंकर हैं, जिनसे इतने बड़े शहर में लोगों को पानी उपलब्ध कराना संभव नहीं है और इसी लिए शहर में सिंध से पानी की सप्लाई बंद होते ही कोहराम मच जाता है।
अपने मूल काम छोड पानी की जुगाड मे जिंदगी
ऐसे में हर घर में लोग रोजमर्रा के काम छोड़कर पहले पानी की जुगाड़ में लगे है। पीएचई कार्यालय के पास लगे बोर पर दिन के साथ रात में भी लोग पानी की कट्टी लेकर जद्दोजहद करते हुए दिखाई दिए। इसके अलावा कुछ लोगों को काफी दूर से पानी बाइक या किसी दूसरे साधन से लाना पड़ रहा है। कुल मिलाकर शहर की सबसे बड़ी समस्या को लेकर नगर पालिका लापरवाह बनी हुई है और इतना ही नहीं इनके पास पानी की कोई दूसरी वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं है, फिर भी इस योजना पर ध्यान नहीं दे रहे।
सबसे पहले जियो के कारण लोगों का समय बर्बाद
शुक्रवार 6 फरवरी को सुबह 11 बजे एक जिओ मोबाइल कंपनी द्वारा केबिल बिछाने के दौरान हुई खुदाई के दौरान पोकलेन से सिंध से पानी आने वाली लाइन फूट गई थी। शुरुआत में तो नगर पालिका ने दावा किया था कि दो दिन में लाइन की मरम्मत कर पानी की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी, पर स्थिति यह बनी कि तीन दिन निकलने के बाद तो देर रात 6 फरवरी को लाइन मरम्मत का काम शुरू हुआ। दो दिन में यह काम पूरा हुआ तो पता चला कि फिल्टर प्लांट पर पानी फेंकने वाली मोटर में कुछ खराबी आ गई है।
इसके बाद उस मोटर को सही करने के साथ एक जगह पर बाल्ब को भी दुरुस्त करना था। यह पूरा काम कर बुधवार रात को सप्लाई शुरू की गई तो फिर वाल्व लीकेज होने पर सप्लाई को बंद करना पड़ा। गुरुवार सुबह जैसे-तैसे काम पूरा हो पाया तो पता चला कि मड़ीखेड़ा इंटेकवेल पर डीपी में कुछ गड़बड़ी आ गई है। इसके बाद गुरुवार देर शाम तक बिजली की खराबी के कारण पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो पाई थी थी।
शहर मे सहलग का सीजन,लोग परेशान,टैंकर के बढ़े भाव
वर्तमान समय मे सहलग का सीजन चल रहा है,शहर के कई घरों में शादियां होने के कारण पानी की खपत अधिक हो रही है,लेकिन मडीखेडा के नल नहीं आने के कारण यह लोग परेशान हो रहे है,अब जनमानस के पास एक ही विकल्प बचा है वह टैंकर,लेकिन टैंकर की मांग के कारण उनके भी भाव बढ़ गए है।
हालात इतने खराब है कि जो पानी के टैंकर सामान्य दिनों में महज 250 से 350 रुपए में एक कॉल करने के एक से दो घंटे में आ जाते हैं। वही टैंकर जब पानी की सप्लाई बंद हो जाती है तो रेट बढ़कर 500 से 600 रुपए हो जाती है और इसके बाद भी इनको आने में 10 से 15 घंटे का समय लगता है। नगर पालिका के पास करीब 10 टैंकर हैं, जिनसे इतने बड़े शहर में लोगों को पानी उपलब्ध कराना संभव नहीं है और इसी लिए शहर में सिंध से पानी की सप्लाई बंद होते ही कोहराम मच जाता है।
अपने मूल काम छोड पानी की जुगाड मे जिंदगी
ऐसे में हर घर में लोग रोजमर्रा के काम छोड़कर पहले पानी की जुगाड़ में लगे है। पीएचई कार्यालय के पास लगे बोर पर दिन के साथ रात में भी लोग पानी की कट्टी लेकर जद्दोजहद करते हुए दिखाई दिए। इसके अलावा कुछ लोगों को काफी दूर से पानी बाइक या किसी दूसरे साधन से लाना पड़ रहा है। कुल मिलाकर शहर की सबसे बड़ी समस्या को लेकर नगर पालिका लापरवाह बनी हुई है और इतना ही नहीं इनके पास पानी की कोई दूसरी वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं है, फिर भी इस योजना पर ध्यान नहीं दे रहे।