शिवपुरी। जहां शहर के चौक-चौराहों पर नेताओं के स्वागत में लाखो की बिजली सजावट और होर्डिंग्स पर खर्च किए जाते हैं, वहीं शिवपुरी के मुक्तिधाम में मूलभूत प्रकाश व्यवस्था तक नहीं है। नगर प्रशासन के विकास और रोशनी के दावों पर सवाल उठाते हुए रविवार शाम एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जब तारकेश्वरी कॉलोनी निवासी हल्कू राम सोनी के परिजनों को अपने प्रियजन का अंतिम संस्कार मोबाइल फोन की रोशनी में करना पड़ा। इस घटना ने शहर की प्राथमिकताओं और प्रशासनिक संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शोक की घड़ी में उपेक्षा का दंश देर शाम जब परिजन हल्कू राम सोनी के अंतिम संस्कार के लिए मुक्तिधाम पहुंचे, तो उन्होंने पाया कि पूरा परिसर घोर अंधेरे में डूबा हुआ था। न तो स्ट्रीट लाइट जल रही थी और न ही कोई वैकल्पिक प्रकाश स्रोत था। ऐसे में, शोक संतप्त परिवार और वहां मौजूद अन्य लोगों को मजबूरन अपने-अपने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी। मृतक के पुत्र शालिग्राम सोनी ने बताया, "हमने नगर पालिका और बिजली कंपनी को कई बार फोन किया, लेकिन कोई सहायता नहीं मिली। इस दुख की घड़ी में ऐसी अव्यवस्था ने हमें और भी मानसिक पीड़ा दी।"
VIP इलाकों में चकाचौंध, मुक्तिधाम में अंधेरा स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि शहर की पॉश कॉलोनियां और वीआईपी क्षेत्रों में तो नगरपालिका की लाइट हमेशा जगमगाती रहती हैं, लेकिन मुक्तिधाम जैसी संवेदनशील और सार्वजनिक महत्व की जगह पर सालों से उपेक्षा का अंधेरा पसरा हुआ है। यह घटना उस प्रशासन के मुंह पर तमाचा है जो चुनावों के दौरान या नेताओं के दौरे पर शहर को 'चकाचौंध' करने में कोई कसर नहीं छोड़ता, लेकिन आम नागरिक की सबसे मुश्किल घड़ी में बुनियादी सुविधा भी मुहैया नहीं करा पाता।
अब जागा प्रशासन, पर सवाल बरकरार मामला सामने आने के बाद नगर पालिका सीएमओ इशांक धाकड़ ने 'आज जानकारी मिलने' का दावा करते हुए जल्द ही मुक्तिधाम में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया है। हालांकि, यह सवाल अभी भी बरकरार है कि क्या किसी अप्रिय घटना के सामने आने पर ही प्रशासन की नींद खुलती है, और क्या नेताओं के स्वागत में खर्च होने वाला पैसा शहर की बुनियादी सुविधाओं पर खर्च नहीं किया जा सकता? यह घटना शिवपुरी के 'स्मार्ट सिटी' बनने के दावों को एक बार फिर कटघरे में खड़ा करती है
शोक की घड़ी में उपेक्षा का दंश देर शाम जब परिजन हल्कू राम सोनी के अंतिम संस्कार के लिए मुक्तिधाम पहुंचे, तो उन्होंने पाया कि पूरा परिसर घोर अंधेरे में डूबा हुआ था। न तो स्ट्रीट लाइट जल रही थी और न ही कोई वैकल्पिक प्रकाश स्रोत था। ऐसे में, शोक संतप्त परिवार और वहां मौजूद अन्य लोगों को मजबूरन अपने-अपने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी। मृतक के पुत्र शालिग्राम सोनी ने बताया, "हमने नगर पालिका और बिजली कंपनी को कई बार फोन किया, लेकिन कोई सहायता नहीं मिली। इस दुख की घड़ी में ऐसी अव्यवस्था ने हमें और भी मानसिक पीड़ा दी।"
VIP इलाकों में चकाचौंध, मुक्तिधाम में अंधेरा स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि शहर की पॉश कॉलोनियां और वीआईपी क्षेत्रों में तो नगरपालिका की लाइट हमेशा जगमगाती रहती हैं, लेकिन मुक्तिधाम जैसी संवेदनशील और सार्वजनिक महत्व की जगह पर सालों से उपेक्षा का अंधेरा पसरा हुआ है। यह घटना उस प्रशासन के मुंह पर तमाचा है जो चुनावों के दौरान या नेताओं के दौरे पर शहर को 'चकाचौंध' करने में कोई कसर नहीं छोड़ता, लेकिन आम नागरिक की सबसे मुश्किल घड़ी में बुनियादी सुविधा भी मुहैया नहीं करा पाता।
अब जागा प्रशासन, पर सवाल बरकरार मामला सामने आने के बाद नगर पालिका सीएमओ इशांक धाकड़ ने 'आज जानकारी मिलने' का दावा करते हुए जल्द ही मुक्तिधाम में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया है। हालांकि, यह सवाल अभी भी बरकरार है कि क्या किसी अप्रिय घटना के सामने आने पर ही प्रशासन की नींद खुलती है, और क्या नेताओं के स्वागत में खर्च होने वाला पैसा शहर की बुनियादी सुविधाओं पर खर्च नहीं किया जा सकता? यह घटना शिवपुरी के 'स्मार्ट सिटी' बनने के दावों को एक बार फिर कटघरे में खड़ा करती है