शिवपुरी में हुआ जहरीला कुआं प्रतिबंधित, TDS तो सिर्फ झांकी है, असली खतरा अभी बाकी है

Bhopal Samachar

शिवपुरी। शिवपुरी नगर पालिका ने शिवपुरी शहर में पेयजल स्रोतों की जांच कराई जा रही है। इस जांच में ऐसा कुआ पकड़ में आया है जिसका पानी पीने योग्य नहीं है। नगर पालिका इस कुंए से लगभग 150 परिवारों को वर्षो से पानी की सप्लाई कर रही थी। बताया जा रहा है कि इस कुएं के पानी का टीडीएस 600 निकला है। इसलिए कुएं को पानी को दूषित की संज्ञा दी जा सकती है इस कारण इस कुँए के पानी को पीने के लिए प्रतिबंधित करते हुए करीब 150 घरो की सप्लाई को बंद कर दिया गया है।

सबसे पहले हम कुएं के पानी का पता बताते है
शहर की सिद्धेश्वर कॉलोनी (श्यामलाल का बगीचा) के करीब 150 घरों में नगर पालिका द्वारा कुएं से पानी की सप्लाई दी जा रही थी। सिद्धेश्वर मंदिर के सामने छतरी रोड किनारे पुराने आवासों के पीछे यह कुआं मौजूद है। आवासों के पीछे खुले शौचालय बने हैं जो कुएं के नजदीक हैं। इसके अलावा कुएं के पास भी सीवर चैंबर बना है। इंदौर की घटना के बाद नगर पालिका द्वारा सैंपलिंग कराकर पीएचई की लैब में टेस्टिंग कराई जा रही है। कुएं के पानी की टेस्टिंग में टीडीएस 600 निकला है।

इसलिए नगर पालिका ने रविवार को कुएं के पानी की सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी है। दरअसल, कुएं में मोटर डालकर पाइप लाइन के जरिए घरों में सीधी सप्लाई की जा रही थी। अब पानी दूषित होने का पता चलते ही नगर पालिका ने सप्लाई पर रोक लगा दी है।

पहले समझे इंदौर में मौत किस कारण हुई थी
मध्यप्रदेश के इंदौर के भागीरथपुरा में जो मौत हुई थी,इन मौतो का दोष पीने का पानी बताया गया,इस पानी में ई कोलाई यानी एशररीशिया कोलाई बैक्टीरिया पाया गया था अर्थात मप्र को बदनाम करने वाला असली दोषी ई कोलाई बैक्टीरिया था। यह बैक्टीरिया अधिकांश:सीवर के पानी में पाया जाता है। अब सवाल उठता है कि शिवपुरी के जिस कुएं के पानी को प्रतिबंधित किया है उसमे केवली टीडीएस की मात्रा अधिक थी या और कुछ भी था।

टीडीएस (TDS) तो सिर्फ झांकी है, असली खतरा अभी बाकी है!
बताया जा रहा है कि सिद्धेश्वर कॉलोनी के श्यामलाल बगीचा वाले कुएं के पास बने कई मकानों के चैंबर बने हुए है,हो सकता है कि सीवर का पानी भी इस कुंए में रिसकर पहुंच रहा हो। शिवपुरी प्रशासन ने इस पानी की जांच  कराई तो इसमें टीडीएस की मात्रा अधिक निकली है।

नगर पालिका ने कुएं का टीडीएस 600 पाकर सप्लाई तो बंद कर दी, लेकिन यह जांच का सबसे सतही हिस्सा है। टीडीएस केवल पानी में घुले खनिज पदार्थों को मापता है, जिसे किसी भी साधारण आरओ (RO) दुकान पर चेक किया जा सकता है। असली खतरा वह ई-कोलाई बैक्टीरिया है, जो सीवर के पानी के रिसाव से पैदा होता है। शिवपुरी में फिलहाल इस खतरनाक बैक्टीरिया की जांच की पुख्ता सुविधा नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रशासन केवल टीडीएस नापकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है?

पीने के लिए अलग से पानी का कैंपर खरीद रहे
कुएं से पानी सप्लाई बंद कर दी है, लेकिन हमारी पानी की समस्या का निदान नहीं किया है। मड़ीखेड़ा का पानी दो से तीन दिन में आता है। इसका भी कोई भरोसा नहीं है। पीने के लिए अलग से पानी का कैंपर खरीद रहे हैं।
प्रमोद पाठक, स्थानीय निवासी

कुएं का पानी नहाने, कपड़े धोने में उपयोग कर रहे थे
खुले शौचालयों की वजह से कुएं का पानी दूषित हुआ है। पहले खुले शौचालयों का इस्तेमाल बंद कराएं। कुएं से पानी रोककर पानी की समस्या बढ़ा दी है। हम कुएं का पानी नहाने और कपड़े धोने में उपयोग कर रहे थे।
संजय जैन,स्थानीय निवासी

खुले शौचालय और चेंबर वालों को नोटिस जारी कर रहे हैं
पीएचई की टेस्टिंग रिपोर्ट में कुएं के पानी का टीडीएस 600 निकला था। पीने योग्य नहीं होने की वजह से उपयोग पर रोक लगा दी है। कुएं के पास खुले शौचालय और चैंबर बने हैं। संबंधितों को नोटिस जारी कर रहे हैं। हालांकि, लोग कुएं के पानी का इस्तेमाल नहाने, कपड़े धोने में कर रहे थे।
सचिन चौहान, एई, नगर पालिका शिवपुरी