Shivpuri में चमत्कारों की भूमि पर भव्य महाकुंभ, महावीर स्वामी के काल से भी प्राचीन है गोलाकोट

Bhopal Samachar

खनियांधाना। जैन धर्म की प्राचीन विरासत और आस्था का जीवंत केंद्र 'तीर्थोदय गोलाकोट' एक नए स्वर्णिम युग की ओर अग्रसर है। भगवान महावीर स्वामी के काल से भी प्राचीन माने जाने वाले इस पवित्र क्षेत्र में आगामी 20 से 25 जनवरी तक भव्य 'पंचकल्याणक महोत्सव' का आयोजन किया जा रहा है। मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज की प्रेरणा से पुनर्निर्मित यह तीर्थ अब अपनी भव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ विश्व पटल पर चमकने को तैयार है।

चमत्कारों की भूमि और प्राचीन वैभव गोलाकोट के 'बड़े बाबा' 1008 आदिनाथ भगवान की प्रतिमा केवल एक पाषाण बिंब नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। लोक मान्यताओं और श्रद्धालुओं के अनुभव बताते हैं कि यहाँ की आध्यात्मिक ऊर्जा से असाध्य रोग शांत हुए और जीवन के संकट टले हैं। इस क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व इसी बात से सिद्ध होता है कि यहाँ 23वें तीर्थंकर तक की प्राचीन प्रतिमाएं तो मौजूद हैं, लेकिन 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी की प्रतिमा का अभाव इसे उनके काल से भी पूर्व का प्राचीन तीर्थ सिद्ध करता है।

मुनि श्री के संकल्प से हुआ पुनरुद्धार एक समय वीरान हो चुके इस क्षेत्र का कायाकल्प मुनि श्री चिन्मय सागर जी और मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज के सानिध्य में हुआ है। 2013 से शुरू हुआ पुनर्निर्माण का यह सफर अब अपने ऐतिहासिक पड़ाव पर है। नवनिर्मित भव्यातिभव्य जिनालय में जब बड़े बाबा अपने उच्च सिंहासन पर विराजमान होंगे, तो वह दृश्य जिनशासन के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा। 20 जनवरी से शुरू होने वाले इस महासंगम में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु और संत समाज अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।