शिवपुरी। जिले में इन दिनों आवारा श्वानों और सांडों का आतंक अपने चरम पर है। स्थिति यह हो गई है कि शहर की मुख्य सड़कों, नेशनल हाईवे और यहाँ तक कि सुरक्षित माने जाने वाले कलेक्ट्रेट परिसर में भी आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में फसल सुरक्षा के नाम पर ग्रामीणों द्वारा मवेशियों को शहर की ओर हांक दिए जाने से समस्या और विकराल हो गई है।
कलेक्ट्रेट में सांडों का उत्पात और भगदड़
गुरुवार को कलेक्ट्रेट रोड पर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब सांडों का एक बड़ा झुंड आपस में भिड़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लड़ते-लड़ते एक सांड ने पास के प्ले ग्राउंड में खेल रहे खिलाड़ियों और वहां से गुजर रहे राहगीरों पर हमला करने का प्रयास किया। गनीमत रही कि किसी को गंभीर चोट नहीं आई, अन्यथा कोई बड़ा हादसा हो सकता था। केवल सांड ही नहीं, कलेक्ट्रेट परिसर में श्वानों के झुंड भी फरियादियों के लिए खतरा बने हुए हैं।
अस्पताल में बढ़ रहे डॉग बाइट के मामले
शहर में श्वानों का खौफ इस कदर है कि जिला अस्पताल के आंकड़े डराने वाले हैं। जानकारी के अनुसार, प्रतिदिन औसतन 40 से 50 मरीज रेबीज का इंजेक्शन लगवाने अस्पताल पहुंच रहे हैं। सड़कों पर झुंड बनाकर घूमने वाले ये कुत्ते बच्चों और बुजुर्गों को अपना निशाना बना रहे हैं, लेकिन नगर पालिका और संबंधित विभाग मौन साधे हुए है।
आदेशों की अनदेखी और प्रशासनिक विफलता
कलेक्टर रवीन्द्र कुमार चौधरी द्वारा पूर्व में कई बार इन आवारा पशुओं और श्वानों को सड़कों से हटाने के सख्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं। हाईवे पर बैठे मवेशी आए दिन भीषण सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट से आस
प्रशासनिक अमले की लापरवाही के बीच अब सबकी नजरें न्यायपालिका पर टिकी हैं। हाल ही में आवारा पशुओं को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद शिवपुरी की जनता यह उम्मीद कर रही है कि शायद अब उन्हें इस आतंक से मुक्ति मिल सकेगी। देखना यह होगा कि क्या सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद जिम्मेदार अधिकारी जागते हैं या जनता इसी तरह हादसों का शिकार होती रहेगी।
कलेक्ट्रेट में सांडों का उत्पात और भगदड़
गुरुवार को कलेक्ट्रेट रोड पर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब सांडों का एक बड़ा झुंड आपस में भिड़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लड़ते-लड़ते एक सांड ने पास के प्ले ग्राउंड में खेल रहे खिलाड़ियों और वहां से गुजर रहे राहगीरों पर हमला करने का प्रयास किया। गनीमत रही कि किसी को गंभीर चोट नहीं आई, अन्यथा कोई बड़ा हादसा हो सकता था। केवल सांड ही नहीं, कलेक्ट्रेट परिसर में श्वानों के झुंड भी फरियादियों के लिए खतरा बने हुए हैं।
अस्पताल में बढ़ रहे डॉग बाइट के मामले
शहर में श्वानों का खौफ इस कदर है कि जिला अस्पताल के आंकड़े डराने वाले हैं। जानकारी के अनुसार, प्रतिदिन औसतन 40 से 50 मरीज रेबीज का इंजेक्शन लगवाने अस्पताल पहुंच रहे हैं। सड़कों पर झुंड बनाकर घूमने वाले ये कुत्ते बच्चों और बुजुर्गों को अपना निशाना बना रहे हैं, लेकिन नगर पालिका और संबंधित विभाग मौन साधे हुए है।
आदेशों की अनदेखी और प्रशासनिक विफलता
कलेक्टर रवीन्द्र कुमार चौधरी द्वारा पूर्व में कई बार इन आवारा पशुओं और श्वानों को सड़कों से हटाने के सख्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं। हाईवे पर बैठे मवेशी आए दिन भीषण सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट से आस
प्रशासनिक अमले की लापरवाही के बीच अब सबकी नजरें न्यायपालिका पर टिकी हैं। हाल ही में आवारा पशुओं को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद शिवपुरी की जनता यह उम्मीद कर रही है कि शायद अब उन्हें इस आतंक से मुक्ति मिल सकेगी। देखना यह होगा कि क्या सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद जिम्मेदार अधिकारी जागते हैं या जनता इसी तरह हादसों का शिकार होती रहेगी।