शिवपुरी। कोरोना काल (2020) में जब हाथ ठेले, रेहड़ी और फुटपाथ पर व्यापार करने वाले छोटे कामगारों की कमर टूट गई थी, तब केंद्र सरकार ने उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री स्वनिधी योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का मूल उद्देश्य बिना ब्याज के ऋण उपलब्ध कराकर गरीबों को साहूकारों के चंगुल से बचाना था। लेकिन शिवपुरी जिले में बैंकों, विशेषकर निजी बैंकों की उदासीनता के चलते यह योजना दम तोड़ती नजर आ रही है।
लक्ष्य से पिछड़ा प्रशासन, निजी बैंक सबसे पीछे
वित्त वर्ष 2025-2026 के लिए जिले की नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को 6606 हितग्राहियों को लोन दिलाने का लक्ष्य दिया गया था। हैरानी की बात यह है कि अब तक केवल 1270 लोग ही लोन प्राप्त कर सके हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2020 से 2024 के बीच जिले को 27,714 लोन का लक्ष्य मिला था, जिसमें से 18,417 (66.45%) ही पूरे हो सके। सरकारी बैंक तो फिर भी प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन निजी बैंक इसमें कोई रुचि नहीं ले रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि कलेक्टर द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठकों में निजी बैंकों के प्रतिनिधि तक शामिल नहीं होते।
लोन की प्रक्रिया और संशोधित नियम
योजना के तहत अब नियमों में संशोधन कर ऋण राशि को बढ़ाया गया है। अब हितग्राहियों को तीन चरणों में लोन मिलता है: पहला चरण: 15,000 रुपये (पिछला लोन चुकाने पर अगला मिलता है), दूसरा चरण: 25,000 रुपये, तीसरा चरण: 50,000 रुपये इस लोन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि हितग्राही को ब्याज नहीं देना होता, ब्याज का वहन सरकार करती है। आवेदन एनयूएलएम (जिला शहरी विकास अभिकरण) के माध्यम से बैंक तक पहुंचता है।
हितग्राहियों की जुबानी: कागजों में योजना, हकीकत में दर्द
योजना का लाभ लेने के लिए भटक रहे परमानंद शर्मा (सब्जी विक्रेता) बताते हैं कि उन्हें बिना किसी पूर्व ऋण के ही बैंक ने 'डिफाल्टर' घोषित कर दिया। वहीं फल विक्रेता आसिफ खान का कहना है कि तीन महीने तक नगर पालिका और बैंकों के चक्कर काटने के बाद भी जब लोन नहीं मिला, तो मजबूरी में उन्हें ऊंचे ब्याज पर साहूकार से पैसा लेना पड़ा।
अधिकारियों का पक्ष
एनयूएलएम के सिटी मैनेजर रमेश सिंह का कहना है कि विभाग पात्र हितग्राहियों के आवेदन बैंक भेजता है, लेकिन अंतिम निर्णय बैंकों को लेना होता है। शहरी क्षेत्रों में लक्ष्य के अनुरूप हितग्राहियों का न मिलना और निजी बैंकों का असहयोग इस देरी का मुख्य कारण है।