शिवपुरी। शिवपुरी जिले की खनियाधाना तहसील में स्थित जैन धर्म के तीर्थोदय गोलाकोट की पावन धरा पर चल रहे विश्व शांति महा पंचकल्याणक महोत्सव के तीसरे दिन गुरुवार को आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि समूचा क्षेत्र जय जिनेन्द्र और तीर्थंकर बालक की जय के नारों से गुंजायमान हो उठा। आयोजन का तीसरा दिन जन्म कल्याणक के रूप में मनाया गया, जो अपनी दिव्यता और भव्यता के कारण ऐतिहासिक बन गया। श्रद्धालुओं की भारी संख्या के आगे आयोजकों के अनुमान भी छोटे पड़ गए, फिर भी व्यवस्था चाक-चौबंद रही।
भोर से ही शुरू हुआ आध्यात्मिक अनुष्ठान
महोत्सव का शुभारंभ प्रातः 6:30 बजे पवित्र मंगलाचरण के साथ हुआ। इसके पश्चात दिग्विधान, रक्षा मंत्र और शांति मंत्रों के उच्चारण के बीच नित्य महा अभिषेक एवं शांति धारा संपन्न हुई। वैदिक मंत्रोच्चार और धूप की सुगंध ने पांडाल को अलौकिक ऊर्जा से भर दिया।
जब धरती पर उतरे तीर्थंकर: अयोध्या में गूंजी बधाइयां
प्रातः 7:47 बजे वह प्रतीक्षित क्षण आया जब तीर्थंकर बालक के जन्म का मंचन किया गया। अयोध्या नगरी के रूप में सजे पंडाल में खुशियों की लहर दौड़ गई। चारों ओर बधाइयां बांटी जाने लगीं और भक्ति नृत्यों ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया।
इसके उपरांत प्रातः 8:30 बजे का दृश्य और भी मनोरम था। सौधर्म इन्द्र ने ऐरावत हाथी पर आरूढ़ होकर अयोध्या नगरी की तीन परिक्रमाएँ कीं। इन्द्र की शक्ति की चर्चा और फिर तीर्थंकर बालक को लेकर पांडुकवन की ओर प्रस्थान के दृश्य को देखने के लिए श्रद्धालु अपनी जगह से टस से मस नहीं हुए।
अभिषेक और मुनिश्री की अमृतवाणी
प्रातः 11 बजे महोत्सव का मुख्य आकर्षण पांडुकशिला अभिषेक रहा। पांडुकशिला पर 1008 मंगल कलशों से तीर्थंकर बालक का अभिषेक किया गया। इस दृश्य को देख श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा से नम हो गईं। इससे पूर्व, प्रातः 9:00 बजे परम पूज्य मुनि श्री ने अपनी मंगल देशना में धर्म और अहिंसा का मार्ग बताते हुए कहा कि ऐसे महोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा बनाने की प्रयोगशाला हैं।
संध्या बेला में भक्ति की सुगंध
शाम होते ही गोलाकोट दीपों की रोशनी से जगमगा उठा। आचार्य भक्ति, जिज्ञासा समाधान और महाआरती में हजारों हाथों ने एक साथ दीपक जलाकर विश्व शांति की कामना की। रात्रि के सत्र में सौधर्म इन्द्र द्वारा किया गया तांडव नृत्य और तीर्थंकर बालक को पालना झुलाने की बाल क्रीड़ाओं के मंचन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रशासन और समिति की सराहना
हजारों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आयोजक समिति के स्वयंसेवकों और स्थानीय प्रशासन ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने यहां की व्यवस्थाओं और गोलाकोट की पवित्रता की खुले दिल से प्रशंसा की।
भोर से ही शुरू हुआ आध्यात्मिक अनुष्ठान
महोत्सव का शुभारंभ प्रातः 6:30 बजे पवित्र मंगलाचरण के साथ हुआ। इसके पश्चात दिग्विधान, रक्षा मंत्र और शांति मंत्रों के उच्चारण के बीच नित्य महा अभिषेक एवं शांति धारा संपन्न हुई। वैदिक मंत्रोच्चार और धूप की सुगंध ने पांडाल को अलौकिक ऊर्जा से भर दिया।
जब धरती पर उतरे तीर्थंकर: अयोध्या में गूंजी बधाइयां
प्रातः 7:47 बजे वह प्रतीक्षित क्षण आया जब तीर्थंकर बालक के जन्म का मंचन किया गया। अयोध्या नगरी के रूप में सजे पंडाल में खुशियों की लहर दौड़ गई। चारों ओर बधाइयां बांटी जाने लगीं और भक्ति नृत्यों ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया।
इसके उपरांत प्रातः 8:30 बजे का दृश्य और भी मनोरम था। सौधर्म इन्द्र ने ऐरावत हाथी पर आरूढ़ होकर अयोध्या नगरी की तीन परिक्रमाएँ कीं। इन्द्र की शक्ति की चर्चा और फिर तीर्थंकर बालक को लेकर पांडुकवन की ओर प्रस्थान के दृश्य को देखने के लिए श्रद्धालु अपनी जगह से टस से मस नहीं हुए।
अभिषेक और मुनिश्री की अमृतवाणी
प्रातः 11 बजे महोत्सव का मुख्य आकर्षण पांडुकशिला अभिषेक रहा। पांडुकशिला पर 1008 मंगल कलशों से तीर्थंकर बालक का अभिषेक किया गया। इस दृश्य को देख श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा से नम हो गईं। इससे पूर्व, प्रातः 9:00 बजे परम पूज्य मुनि श्री ने अपनी मंगल देशना में धर्म और अहिंसा का मार्ग बताते हुए कहा कि ऐसे महोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा बनाने की प्रयोगशाला हैं।
संध्या बेला में भक्ति की सुगंध
शाम होते ही गोलाकोट दीपों की रोशनी से जगमगा उठा। आचार्य भक्ति, जिज्ञासा समाधान और महाआरती में हजारों हाथों ने एक साथ दीपक जलाकर विश्व शांति की कामना की। रात्रि के सत्र में सौधर्म इन्द्र द्वारा किया गया तांडव नृत्य और तीर्थंकर बालक को पालना झुलाने की बाल क्रीड़ाओं के मंचन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रशासन और समिति की सराहना
हजारों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आयोजक समिति के स्वयंसेवकों और स्थानीय प्रशासन ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने यहां की व्यवस्थाओं और गोलाकोट की पवित्रता की खुले दिल से प्रशंसा की।