शिवपुरी। शिवपुरी शहर के प्यासे कंठो की प्यास बुझाने वाली सिंध जलावर्धन योजना का पिछले 12 दिनों से मेंटेनेंस के नाम पर सप्लाई बंद है।
जिससे शहर की लगभग 80 प्रतिशत आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रही है,शहर को पानी के संकट का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन ने केवल 7 दिनों (21 से 28 दिसंबर) के लिए सप्लाई रोकने की सूचना दी थी, लेकिन आज 12 दिन बीत जाने के बाद भी नलों में पानी नहीं पहुँचा है।
निजी टैंकरों की मनमानी, जनता पर दोहरी मार
पाइप लाइन से सप्लाई बंद होने का सीधा फायदा निजी टैंकर माफिया उठा रहे हैं। जो टैंकर पहले सामान्य दरों पर उपलब्ध थे, उनके दाम अब 600 से 700 रुपये तक पहुँच गए हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि पैसे देने के बावजूद लोगों को टैंकर के लिए 10 घंटे तक का इंतजार करना पड़ रहा है,आधे से ज्यादा शहर अब टैंकरों के सहारे जिंदा है। नगर पालिका अपने टैंकर चलाने की बात कर रही है लेकिन इतनी बड़ी आबादी के लिए नगर पालिका के यह टैंकर भूसे में सुई के समान है।
व्यवस्था पर सवाल और जिम्मेदारों की चुप्पी
शहर में मचे इस हाहाकार के बीच जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग जनता की सुध लेने के बजाय अन्य कार्यों में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं। जहाँ एक ओर नगर पालिका के प्रशासनिक अधिकारी और अध्यक्ष स्थानीय विवादों और कार्यालय के रख-रखाव में उलझे हैं, वहीं शहर के जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताएं भी सवालों के घेरे में हैं। चौराहों पर लगे महाराज के जन्मोत्सव के बधाई के बैनर जनता की प्यास और आक्रोश का मजाक उड़ाते प्रतीत हो रहे हैं,जनता का कहना है सूखे कंठों से शहर जन्मोत्सव की बधाई दे रही है,इस हाड़ कपा देने वाली सर्दी में लोग पानी के लिए हाथ में कट्टी लेकर जगराता करना पडा रहा है।
क्या कहते हैं शहरवासी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन ने सप्लाई बंद करने का प्रेस नोट तो जारी कर दिया, लेकिन उसके बाद की वैकल्पिक व्यवस्था पर कोई ध्यान नहीं दिया। अब नया साल शुरू हो चुका है, लेकिन शिवपुरी की जनता के लिए पुरानी समस्या और विकराल रूप ले चुकी है। यदि जल्द ही सिंध की सप्लाई सुचारु नहीं की गई, तो जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।
जिससे शहर की लगभग 80 प्रतिशत आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रही है,शहर को पानी के संकट का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन ने केवल 7 दिनों (21 से 28 दिसंबर) के लिए सप्लाई रोकने की सूचना दी थी, लेकिन आज 12 दिन बीत जाने के बाद भी नलों में पानी नहीं पहुँचा है।
निजी टैंकरों की मनमानी, जनता पर दोहरी मार
पाइप लाइन से सप्लाई बंद होने का सीधा फायदा निजी टैंकर माफिया उठा रहे हैं। जो टैंकर पहले सामान्य दरों पर उपलब्ध थे, उनके दाम अब 600 से 700 रुपये तक पहुँच गए हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि पैसे देने के बावजूद लोगों को टैंकर के लिए 10 घंटे तक का इंतजार करना पड़ रहा है,आधे से ज्यादा शहर अब टैंकरों के सहारे जिंदा है। नगर पालिका अपने टैंकर चलाने की बात कर रही है लेकिन इतनी बड़ी आबादी के लिए नगर पालिका के यह टैंकर भूसे में सुई के समान है।
व्यवस्था पर सवाल और जिम्मेदारों की चुप्पी
शहर में मचे इस हाहाकार के बीच जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग जनता की सुध लेने के बजाय अन्य कार्यों में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं। जहाँ एक ओर नगर पालिका के प्रशासनिक अधिकारी और अध्यक्ष स्थानीय विवादों और कार्यालय के रख-रखाव में उलझे हैं, वहीं शहर के जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताएं भी सवालों के घेरे में हैं। चौराहों पर लगे महाराज के जन्मोत्सव के बधाई के बैनर जनता की प्यास और आक्रोश का मजाक उड़ाते प्रतीत हो रहे हैं,जनता का कहना है सूखे कंठों से शहर जन्मोत्सव की बधाई दे रही है,इस हाड़ कपा देने वाली सर्दी में लोग पानी के लिए हाथ में कट्टी लेकर जगराता करना पडा रहा है।
क्या कहते हैं शहरवासी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन ने सप्लाई बंद करने का प्रेस नोट तो जारी कर दिया, लेकिन उसके बाद की वैकल्पिक व्यवस्था पर कोई ध्यान नहीं दिया। अब नया साल शुरू हो चुका है, लेकिन शिवपुरी की जनता के लिए पुरानी समस्या और विकराल रूप ले चुकी है। यदि जल्द ही सिंध की सप्लाई सुचारु नहीं की गई, तो जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।