Shivpuri में नकली कीटनाशक का भंडाफोड़, क्रिस्टल कंपनी के नाम पर बेची जा रही थी नकली ब्लू कॉपर

Bhopal Samachar

शिवपुरी। शिवपुरी जिले में किसानों के साथ धोखाधड़ी से जुड़ा एक गंभीर मामला उजागर हुआ है। क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड कंपनी के नाम पर बाजा में नकली ब्लू कॉपर कीटनाशक दवा बेची जा रही थी, जिसे पुलिस ने कार्रवाई करते हुए जब्त किया है।

कंपनी के प्रतिनिधि रंजीत कुमार सिंह ने बताया कि 13 जनवरी को कोतवाली थाना पुलिस को नकली कीटनाशक दवा के निर्माण और बिक्री की सूचना दी गई थी। सूचना के आधार पर थाना प्रभारी के निर्देश पर पुलिस टीम का गठन किया गया और चिन्हित स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।

तलाशी के दौरान दुबे नर्सरी के पास स्थित वीरेंद्र ओझा की दुकान से कंपनी के नाम से पैक की गई नकली ब्लू कॉपर कीटनाशक दवा बरामद की गई। पुलिस ने गवाहों की मौजूदगी में दवा को जब्त कर कोतवाली थाने में सुपुर्द किया। मौके पर उपस्थित लोगों के बयान भी दर्ज किए गए।

कंपनी की ओर से बताया गया कि 
पूरी कार्रवाई के फोटो और वीडियो साक्ष्य उपलब्ध हैं। 14 जनवरी को संबंधित दस्तावेजों, जब्ती सूची और साक्ष्यों के साथ पुलिस से एफआईआर दर्ज करने का औपचारिक अनुरोध किया गया था। अब कंपनी प्रतिनिधि ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपते हुए प्रकरण में शीघ्र एफआईआर दर्ज कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है।

कंपनी का कहना है कि नकली कृषि रसायनों की बिक्री से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होता है और उनकी फसलों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि किसानों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिल सकें।

फसल में नकली दवा के प्रयोग से
फसल में कटी या बीमारियॉ खत्म नही हातेी है जिससे पूरी फसल बर्बाद होने का खतरा होता है। किसान अपनी मेहनत की कमाई इन महंगी दवाओं पर खर्च करता है, लेकिन परिणाम न मिलने से उसे दवा की लागत और फसल की कम पैदावार—दोनों तरफ से मार पड़ती है।

नकली दवाओं में अक्सर जहरीले या अमानक रसायनों का मिश्रण होता है, जो मिट्टी की उर्वरता (Fertility) को लंबे समय के लिए नष्ट कर सकते हैं। इन दवाओं के छिड़काव से कई बार पौधे जल जाते हैं या उनकी वृद्धि रुक जाती है, जिससे गुणवत्तापूर्ण उत्पाद नहीं मिल पाते।  घटिया किस्म की दवाओं के उपयोग से कीटों में उन रसायनों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है, जिससे भविष्य में असली दवाएं भी बेअसर होने लगती हैं।