करैरा। तहसील के दिनारा क्षेत्र में सरकारी जमीनों की बंदरबांट और 'लैंड माफिया' के बड़े खेल का खुलासा हुआ है। ग्राम जरगवां अव्वल और थनरा में शासकीय भूमि को निजी बताकर बेचने और अवैध कॉलोनियां काटकर करोड़ों के वारे-न्यारे करने के गंभीर आरोप लगे हैं। समाजसेवी ऋतुराज यादव ने कलेक्टर को साक्ष्यों के साथ शिकायत सौंपते हुए राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत की पोल खोली है। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर न केवल सरकारी जमीन को खुर्द-बुर्द किया गया, बल्कि बिना किसी अनुमति के अवैध कॉलोनियों का जाल बिछाकर आम जनता के साथ धोखाधड़ी की जा रही है। इस शिकायत ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है
शिकायत में कहा गया है कि दोनों ग्रामों में अनेक खसरा व सर्वे नंबर, जो मूल रूप से शासकीय दर्ज थे, उन्हें कथित रूप से कुछ राजस्व अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से पहले बटांकन के जरिए निजी भूमि दर्शाया गया और बाद में विक्रय वर्जित की श्रेणी से बाहर कर अवैध रूप से क्रय-विक्रय कराया गया। इससे न केवल शासन के नियमों की अवहेलना हुई है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
यादव ने आरोप लगाया है कि कई शासकीय भूमि ऐसे व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दी गई, जिन्हें शासन द्वारा कभी भी पट्टा आवंटित नहीं किया गया। वहीं जिन हितग्राहियों को वैधानिक रूप से पट्टे दिए गए थे, उनकी भूमि को बिना किसी सक्षम आदेश के खुले बाजार में बेचा जा रहा है, जबकि वह स्पष्ट रूप से विक्रय वर्जित है।
शिकायत में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि पट्टा वितरण की नीति को ताक पर रखकर एक ही परिवार के सदस्यों को कई-कई शासकीय पट्टे दिए गए, जो समानता के अधिकार और शासन की नीति दोनों के विपरीत है। इसके अतिरिक्त, दोनों गांवों में कृषि एवं शासकीय भूमि को छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर बिना ले-आउट स्वीकृति, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसी) अनुमति और अन्य वैधानिक स्वीकृतियों के अवैध कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं।
बताया गया है कि इन कॉलोनियों में सड़क, नाली, पेयजल, विद्युत और सीवेज जैसी मूलभूत सुविधाओं की कोई वैधानिक मंजूरी नहीं है, इसके बावजूद आम नागरिकों को गुमराह कर प्लॉट बेचे जा रहे हैं। इससे न केवल जनता के साथ धोखाधड़ी हो रही है, बल्कि भविष्य में बड़े कानूनी और प्रशासनिक संकट की आशंका भी जताई जा रही है।
समाजसेवी रितुराज यादव ने कलेक्टर से मांग की है कि जांच पूर्ण होने तक संबंधित भूमि के क्रय-विक्रय एवं किसी भी प्रकार के लेन-देन पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने वाले राजस्व अधिकारियों, कर्मचारियों और लाभार्थियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाए तथा शासकीय भूमि को पुनः अधिग्रहित कर सुरक्षित किया जाए।
शिकायत में कहा गया है कि दोनों ग्रामों में अनेक खसरा व सर्वे नंबर, जो मूल रूप से शासकीय दर्ज थे, उन्हें कथित रूप से कुछ राजस्व अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से पहले बटांकन के जरिए निजी भूमि दर्शाया गया और बाद में विक्रय वर्जित की श्रेणी से बाहर कर अवैध रूप से क्रय-विक्रय कराया गया। इससे न केवल शासन के नियमों की अवहेलना हुई है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
यादव ने आरोप लगाया है कि कई शासकीय भूमि ऐसे व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दी गई, जिन्हें शासन द्वारा कभी भी पट्टा आवंटित नहीं किया गया। वहीं जिन हितग्राहियों को वैधानिक रूप से पट्टे दिए गए थे, उनकी भूमि को बिना किसी सक्षम आदेश के खुले बाजार में बेचा जा रहा है, जबकि वह स्पष्ट रूप से विक्रय वर्जित है।
शिकायत में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि पट्टा वितरण की नीति को ताक पर रखकर एक ही परिवार के सदस्यों को कई-कई शासकीय पट्टे दिए गए, जो समानता के अधिकार और शासन की नीति दोनों के विपरीत है। इसके अतिरिक्त, दोनों गांवों में कृषि एवं शासकीय भूमि को छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर बिना ले-आउट स्वीकृति, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसी) अनुमति और अन्य वैधानिक स्वीकृतियों के अवैध कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं।
बताया गया है कि इन कॉलोनियों में सड़क, नाली, पेयजल, विद्युत और सीवेज जैसी मूलभूत सुविधाओं की कोई वैधानिक मंजूरी नहीं है, इसके बावजूद आम नागरिकों को गुमराह कर प्लॉट बेचे जा रहे हैं। इससे न केवल जनता के साथ धोखाधड़ी हो रही है, बल्कि भविष्य में बड़े कानूनी और प्रशासनिक संकट की आशंका भी जताई जा रही है।
समाजसेवी रितुराज यादव ने कलेक्टर से मांग की है कि जांच पूर्ण होने तक संबंधित भूमि के क्रय-विक्रय एवं किसी भी प्रकार के लेन-देन पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने वाले राजस्व अधिकारियों, कर्मचारियों और लाभार्थियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाए तथा शासकीय भूमि को पुनः अधिग्रहित कर सुरक्षित किया जाए।