पोहरी। शिवपुरी जिले के विकासखंड पोहरी की ग्राम पंचायत भैंसरावन अंतर्गत ग्राम गड़ा में आदिवासी महिलाओं को केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ अब तक नहीं मिल पाया है। योजना का उद्देश्य गरीब एवं आदिवासी महिलाओं को निःशुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध कराना है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है।
फ्री गैस कनेक्शन के बदले मांगी जा रही रिश्वत का आरोप
ग्राम गड़ा की आदिवासी महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जब वे उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन लेने या फॉर्म भरवाने के लिए ग्राम पंचायत भैंसरावन या सहायक पटवारी मुकेश धाकड़ के पास जाती हैं, तो उनसे ₹300 से ₹1000 तक की राशि की मांग की जाती है। महिलाओं का कहना है कि योजना के अनुसार आदिवासी महिलाओं को यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क मिलनी चाहिए।
आज भी जलाऊ लकड़ी से बनता है भोजन
उज्ज्वला योजना का लाभ न मिलने के कारण आदिवासी महिलाएं आज भी पुराने और जोखिम भरे तरीकों से खाना बनाने को मजबूर हैं। महिलाओं ने बताया कि उन्हें हर सुबह जंगल जाकर सूखी लकड़ियां (जलावन) इकट्ठा करनी पड़ती है और उन्हीं लकड़ियों से चूल्हे पर भोजन पकाना पड़ता है। इससे न केवल उनका समय और मेहनत बर्बाद हो रही है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
प्रशासन से कार्रवाई और जांच की मांग
आदिवासी महिलाओं ने प्रशासन से मांग की है कि उज्ज्वला योजना के नाम पर रिश्वत मांगने वालों के खिलाफ जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए और पात्र महिलाओं को शीघ्र निःशुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए, ताकि उन्हें धुएं और जंगल की निर्भरता से मुक्ति मिल सके।
फ्री गैस कनेक्शन के बदले मांगी जा रही रिश्वत का आरोप
ग्राम गड़ा की आदिवासी महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जब वे उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन लेने या फॉर्म भरवाने के लिए ग्राम पंचायत भैंसरावन या सहायक पटवारी मुकेश धाकड़ के पास जाती हैं, तो उनसे ₹300 से ₹1000 तक की राशि की मांग की जाती है। महिलाओं का कहना है कि योजना के अनुसार आदिवासी महिलाओं को यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क मिलनी चाहिए।
आज भी जलाऊ लकड़ी से बनता है भोजन
उज्ज्वला योजना का लाभ न मिलने के कारण आदिवासी महिलाएं आज भी पुराने और जोखिम भरे तरीकों से खाना बनाने को मजबूर हैं। महिलाओं ने बताया कि उन्हें हर सुबह जंगल जाकर सूखी लकड़ियां (जलावन) इकट्ठा करनी पड़ती है और उन्हीं लकड़ियों से चूल्हे पर भोजन पकाना पड़ता है। इससे न केवल उनका समय और मेहनत बर्बाद हो रही है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
प्रशासन से कार्रवाई और जांच की मांग
आदिवासी महिलाओं ने प्रशासन से मांग की है कि उज्ज्वला योजना के नाम पर रिश्वत मांगने वालों के खिलाफ जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए और पात्र महिलाओं को शीघ्र निःशुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए, ताकि उन्हें धुएं और जंगल की निर्भरता से मुक्ति मिल सके।