Shivpuri News: नाबालिगों को इंजेक्शन लगाकर करवाया जाता है देह व्यापार, काले सच का हाईकोर्ट में खुलासा

Bhopal Samachar

शिवपुरी। शिवपुरी जिले का रेड लाइट एरिया (बजरिया मोहल्ला), जो कागजों में 'देह व्यापार मुक्त' घोषित किया जा चुका है, असल में आज भी नरक बना हुआ है। ग्वालियर हाई कोर्ट में अधिवक्ता ऋतु शर्मा द्वारा दायर एक जनहित याचिका में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। याचिका के अनुसार, यहाँ बाहरी राज्यों से लड़कियों को लाकर उन्हें बंधक बनाया जाता है और फर्जी आधार कार्ड व दस्तावेजों के सहारे उन्हें परिवार का सदस्य बताकर देह व्यापार के दलदल में धकेला जा रहा है।

इंसानियत को शर्मसार करने वाली प्रताड़ना एक पीड़िता, जो इस नरक से भागकर बेंगलुरु चली गई थी, उसने अपनी आपबीती में बताया कि वहां छोटी-छोटी बच्चियों को समय से पहले 'जवान' दिखाने के लिए घातक हार्मोनल इंजेक्शन और दवाएं दी जाती हैं। पुलिस की छापेमारी से बचने के लिए घरों में गुप्त तहखाने बनाए गए हैं। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस की रेड पड़ने से पहले ही सिंडिकेट को सूचना मिल जाती है, जिससे लड़कियों को गायब कर दिया जाता है।

कोर्ट की नाराजगी और अफसरों की पेशी सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जी.एस. अहलुवालिया और न्यायमूर्ति अनिल वर्मा की खंडपीठ ने जांच अधिकारी की रिपोर्ट पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब लड़कियों के बाहरी होने की आशंका थी, तो पुलिस ने उनका डीएनए (DNA) टेस्ट क्यों नहीं कराया? कोर्ट ने पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट को अधूरा माना और महज दो घंटे के भीतर ग्वालियर आईजी और शिवपुरी एसपी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया।

30 लड़कियों का आज तक नहीं लगा कोई सुराग
न्यायालय में प्रस्तुत हुए अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2014 से 2025 तक 30 ऐसी लड़कियां हैं जिनका अब तक कोई सुराग नहीं लगा है। इनमें अब भी लापता बच्चियों का वर्षवार विवरण दिया गया जिसमें 2014-1, 2015-1, 2019-2, 2021-1, 2022-1, 2023-3, 2024-3, 2025-18 बच्चियां बताई गई। इस पर न्यायमूर्ति जीएस अहलुवालिया एवं न्यायमूर्ति अनिल वर्मा की खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि नाबालिग बच्चियों का इस प्रकार लापता होना एक अत्यंत गंभीर और चिंताजनक विषय है। कोर्ट ने पुलिस प्रशासन से वर्ष 2014 से 2025 तक का विस्तृत और तथ्यात्मक ब्यौरा पेश करने के निर्देश दिए हैं।