Shivpuri सनघटा सिंचाई परियोजना का विस्तार: अब 15 नहीं, पिछोर के 23 गांवों की प्यास बुझाएगी ऐर नदी

Bhopal Samachar

शिवपुरी | शिवपुरी समाचार सेवा,जिले की पिछोर तहसील के अंतर्गत ऐर नदी पर निर्माणाधीन सनघटा मध्यम सिंचाई परियोजना' क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान साबित होने जा रही है। परियोजना के नए सूचकांक मानचित्र (Index Map) के अनुसार, अब इस योजना का लाभ 15 गांवों के बजाय 23 गांवों को मिलेगा। सिंचाई क्षेत्र में हुए इस विस्तार से न केवल अधिक किसान लाभान्वित होंगे, बल्कि उपलब्ध जल का भी शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।

परियोजना की लागत और अनुबंध मध्य प्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा इस परियोजना को 28 अगस्त 2020 को 145.45 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई थी। इसके निर्माण के लिए जनवरी 2023 में मेसर्स गुडविल एडवांस कंस्ट्रक्शन कंपनी, कोटा के साथ 96.53 करोड़ रुपए का अनुबंध किया गया। यह परियोजना 'टर्नकी निविदा पद्धति' पर आधारित है, जिसमें आधुनिक माइक्रो सिंचाई प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है।

तकनीकी सुधार से बढ़ा सिंचाई का रकबा परियोजना के मूल स्वरूप में कुछ तकनीकी बदलाव किए गए हैं ताकि बिजली की खपत और पानी की उपलब्धता का सही संतुलन बना रहे।

नया लक्ष्य: पहले सिंचाई का लक्ष्य 4630 हेक्टेयर था, जो अब बढ़कर 4677.98 हेक्टेयर हो गया है।

गांवों का गणित: सर्वे के बाद ऊंचे लेवल वाले कुछ क्षेत्रों को छोड़कर निचले स्तर के क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसके चलते पुराने नक्शे के 7 गांव बाहर हुए हैं, लेकिन 15 नए गांवों को योजना में जोड़ा गया है। इस प्रकार अब कुल 23 गांवों में हरियाली आएगी।

बिजली और जल भंडारण परियोजना के सफल संचालन के लिए 1.27 मेगावाट बिजली की आवश्यकता निर्धारित की गई है। बांध में उपलब्ध कुल 22.57 मिलियन घन मीटर (मि.घ.मी.) जल का पूरा उपयोग सिंचाई के लिए किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इस बदलाव से परियोजना की दक्षता बढ़ेगी।

कार्य की वर्तमान स्थिति सनघटा बांध और नहर प्रणाली का काम युद्ध स्तर पर जारी है। वर्तमान प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, नहर कार्य का 64 प्रतिशत भौतिक प्रगति पूर्ण हो चुकी है,और बांध का कार्य 16 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है।

मुख्य अभियंता यमुना कछार ग्वालियर के अनुमोदन के बाद इस संशोधित योजना पर तेजी से अमल किया जा रहा है। उम्मीद है कि आगामी समय में यह परियोजना पिछोर क्षेत्र के कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदल देगी।