दिनारा। शिवपुरी जिले के करैरा अनुविभाग के दिनारा थाना क्षेत्र के अलगी गांव में बुधवार रात एक साधु की अचानक मौत हो गई। पंचायत भवन के पास तख्त पर ग्रामीणों के साथ आग ताप रहे थे। इसी दौरान पीठ के बल गिर गए। पूरा घटनाक्रम पास लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हुआ है।
ग्रामीण उन्हें फौरन दिनारा स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से झांसी रेफर कर दिया गया। झांसी के एक अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। ब्रजेश गिरी की हार्ट अटैक से मौत की आशंका है। ग्रामीणों और परिजन की सहमति से पोस्टमॉर्टम नहीं कराया गया। संन्यासी परंपरा के अनुसार पार्थिव देह को समाधि दी गई है। बृजेश गिरी महाराज की पत्नी सोमवती यादव करैरा जनपद पंचायत की सदस्य हैं।
लोगों ने उठाने की कोशिश की, पर नहीं उठे
बुधवार रात करीब 9 बजे ब्रजेश गिरी के अचानक गिरने के बाद आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें उठाने की कोशिश की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद उन्हें तत्काल दिनारा स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। सूचना मिलने पर दिनारा थाना पुलिस अस्पताल और घटनास्थल पर पहुंची और जांच शुरू की।
जूना अखाड़ा से जुड़कर संन्यासी जीवन अपनाया था
ब्रजेश गिरी मूल रूप से अलगी गांव के रहने वाले थे। कुछ साल पहले उन्होंने जूना अखाड़ा से जुड़कर संन्यासी जीवन अपना लिया और ब्रजेश गिरी महाराज के नाम से पहचाने जाने लगे। वे अलगी गांव और सिकंदरा मंदिर क्षेत्र में रहते थे।
ग्रामीण उन्हें फौरन दिनारा स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से झांसी रेफर कर दिया गया। झांसी के एक अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। ब्रजेश गिरी की हार्ट अटैक से मौत की आशंका है। ग्रामीणों और परिजन की सहमति से पोस्टमॉर्टम नहीं कराया गया। संन्यासी परंपरा के अनुसार पार्थिव देह को समाधि दी गई है। बृजेश गिरी महाराज की पत्नी सोमवती यादव करैरा जनपद पंचायत की सदस्य हैं।
लोगों ने उठाने की कोशिश की, पर नहीं उठे
बुधवार रात करीब 9 बजे ब्रजेश गिरी के अचानक गिरने के बाद आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें उठाने की कोशिश की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद उन्हें तत्काल दिनारा स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। सूचना मिलने पर दिनारा थाना पुलिस अस्पताल और घटनास्थल पर पहुंची और जांच शुरू की।
जूना अखाड़ा से जुड़कर संन्यासी जीवन अपनाया था
ब्रजेश गिरी मूल रूप से अलगी गांव के रहने वाले थे। कुछ साल पहले उन्होंने जूना अखाड़ा से जुड़कर संन्यासी जीवन अपना लिया और ब्रजेश गिरी महाराज के नाम से पहचाने जाने लगे। वे अलगी गांव और सिकंदरा मंदिर क्षेत्र में रहते थे।