शिवपुरी। शिवपुरी कलेक्टर रविन्द्र कुमार चौधरी ने 31 दिसंबर की रात जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय ऋषेश्वर भी मौजूद थे। कलेक्टर ने मेटरनिटी वार्ड, गायनिक वार्ड और ऑपरेशन थिएटर सहित विभिन्न विभागों की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
यह निरीक्षण कुछ दिन पहले नरवर तहसील की एक प्रसूता और उसके गर्भस्थ शिशु की मृत्यु के मामले की पृष्ठभूमि में हुआ। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से दो सप्ताह में जांच रिपोर्ट मांगी है। हालांकि, प्रशासन ने इस निरीक्षण को नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।
सभी प्रमुख विभागों का हुआ निरीक्षण
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. बीएल यादव ने बताया कि कलेक्टर ने ट्रामा सेंटर, एमआरडी, सर्जरी वार्ड, पीआईसीयू, मेटरनिटी वार्ड, ऑपरेशन थिएटर और गायनिक वार्ड सहित लगभग सभी प्रमुख विभागों का निरीक्षण किया। उन्होंने इसे एक नियमित निरीक्षण बताया, जिसमें प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक सुधारों पर भी चर्चा की गई।
सिविल सर्जन ने 'मुस्कान' सर्टिफिकेशन पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल वर्तमान में 'मुस्कान' के लिए सर्टिफाइड नहीं है, बल्कि एडवांस सर्टिफिकेशन श्रेणी में आता है। कलेक्टर के साथ 'मुस्कान' सर्टिफिकेशन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं और संसाधनों पर विस्तृत चर्चा हुई, ताकि अस्पताल भविष्य में यह मानक प्राप्त कर सके।
जनरेटरों की स्थिति ठीक नहीं मिली
निरीक्षण के दौरान अस्पताल के जनरेटरों की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई। सिविल सर्जन के अनुसार, ये जनरेटर वर्ष 2010 और 2014 के हैं, जिन्हें बदलने की आवश्यकता है। हालांकि, वर्तमान में सर्विसिंग के बाद सभी जनरेटर कार्यशील हैं।
जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय ऋषेश्वर ने बताया कि सरकार ने वर्ष 2026 तक मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को और कम करने के निर्देश दिए हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विशेष निगरानी की जाएगी, जिसमें कलेक्टर स्वयं भी शामिल होकर समय-समय पर निरीक्षण और समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि यह निरीक्षण इसी उद्देश्य से किया गया था।
यह निरीक्षण कुछ दिन पहले नरवर तहसील की एक प्रसूता और उसके गर्भस्थ शिशु की मृत्यु के मामले की पृष्ठभूमि में हुआ। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से दो सप्ताह में जांच रिपोर्ट मांगी है। हालांकि, प्रशासन ने इस निरीक्षण को नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।
सभी प्रमुख विभागों का हुआ निरीक्षण
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. बीएल यादव ने बताया कि कलेक्टर ने ट्रामा सेंटर, एमआरडी, सर्जरी वार्ड, पीआईसीयू, मेटरनिटी वार्ड, ऑपरेशन थिएटर और गायनिक वार्ड सहित लगभग सभी प्रमुख विभागों का निरीक्षण किया। उन्होंने इसे एक नियमित निरीक्षण बताया, जिसमें प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक सुधारों पर भी चर्चा की गई।
सिविल सर्जन ने 'मुस्कान' सर्टिफिकेशन पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल वर्तमान में 'मुस्कान' के लिए सर्टिफाइड नहीं है, बल्कि एडवांस सर्टिफिकेशन श्रेणी में आता है। कलेक्टर के साथ 'मुस्कान' सर्टिफिकेशन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं और संसाधनों पर विस्तृत चर्चा हुई, ताकि अस्पताल भविष्य में यह मानक प्राप्त कर सके।
जनरेटरों की स्थिति ठीक नहीं मिली
निरीक्षण के दौरान अस्पताल के जनरेटरों की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई। सिविल सर्जन के अनुसार, ये जनरेटर वर्ष 2010 और 2014 के हैं, जिन्हें बदलने की आवश्यकता है। हालांकि, वर्तमान में सर्विसिंग के बाद सभी जनरेटर कार्यशील हैं।
जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय ऋषेश्वर ने बताया कि सरकार ने वर्ष 2026 तक मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को और कम करने के निर्देश दिए हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विशेष निगरानी की जाएगी, जिसमें कलेक्टर स्वयं भी शामिल होकर समय-समय पर निरीक्षण और समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि यह निरीक्षण इसी उद्देश्य से किया गया था।