राजेंद्र बाथम- सतनवाड़ा। शिवपुरी। शिवपुरी जिले के सतनवाड़ा क्षेत्र स्थित खेरे वाले हनुमान जी मंदिर में आस्था और भक्ति का एक ऐसा अनूठा नजारा देखने को मिला, जिसने क्षेत्र के इतिहास में नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। संत आकाश भारती महाराज के सानिध्य में आयोजित 11 दिवसीय 9 कुंडीय श्री राम नाम महायज्ञ एवं रासलीला महोत्सव का समापन विशाल भंडारे के साथ हुआ, जिसमें 1 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।
आधुनिक तकनीक से तैयार हुआ दिव्य स्वाद
इस आयोजन की सबसे विशेष बात परंपरा और आधुनिकता का मेल रही। भारी जनसमूह के लिए मालपुआ तैयार करने हेतु हलवाइयों ने दो सीमेंट-गिट्टी मिक्सर मशीनों का उपयोग किया। स्वच्छता का ध्यान रखते हुए इन मशीनों से मालपुआ का घोल (बैटर) तैयार किया गया, जिससे कम समय में भारी मात्रा में शुद्ध प्रसादी तैयार हो सकी। तैयार भोजन को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से वितरण स्थल तक पहुँचाया गया।
सेवा का संकल्प: आंकड़ों में भंडारा
करह धाम से आए 100 अनुभवी हलवाइयों की टीम ने दिन-रात मेहनत कर 'मालपुआ, खीर और आलू की सब्जी' तैयार की। भंडारे की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें:
100 क्विंटल से अधिक आटा
60 क्विंटल आलू और 50 क्विंटल गुड़
240 कट्टी तेल/डालडा
600 लीटर दूध और 20 क्विंटल चावल का उपयोग हुआ।
पंचायतों ने निभाई सामूहिक जिम्मेदारी
नर सेवा ही नारायण सेवा के मंत्र को साकार करते हुए आसपास की ग्राम पंचायतों ने व्यवस्थाओं का जिम्मा संभाला। सतनवाड़ा कलां ने तेल-मसाले, सतनवाड़ा खुर्द ने आटा, ग्राम ठेह ने आलू-चावल और ग्राम काकर ने शक्कर की व्यवस्था की। वहीं करई, बारा और नयागांव जैसे गांवों के दूधियों ने दूध सेवा प्रदान की।
आध्यात्मिक यात्रा और समापन
कभी घने जंगलों के बीच सुनसान पड़े इस स्थान को संत आकाश भारती महाराज और ब्रह्मलीन श्री श्री 1008 श्री भैरों दास महाराज ने एक सिद्ध धाम के रूप में विकसित किया। 3 जनवरी से शुरू हुए इस उत्सव में आचार्य कृष्कांत की रासलीला ने भक्तों को भावविभोर कर दिया। समापन के दिन 1 किलोमीटर लंबी कलश यात्रा निकली, जिससे पूरा क्षेत्र केसरिया रंग में रंगा नजर आया।
आधुनिक तकनीक से तैयार हुआ दिव्य स्वाद
इस आयोजन की सबसे विशेष बात परंपरा और आधुनिकता का मेल रही। भारी जनसमूह के लिए मालपुआ तैयार करने हेतु हलवाइयों ने दो सीमेंट-गिट्टी मिक्सर मशीनों का उपयोग किया। स्वच्छता का ध्यान रखते हुए इन मशीनों से मालपुआ का घोल (बैटर) तैयार किया गया, जिससे कम समय में भारी मात्रा में शुद्ध प्रसादी तैयार हो सकी। तैयार भोजन को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से वितरण स्थल तक पहुँचाया गया।
सेवा का संकल्प: आंकड़ों में भंडारा
करह धाम से आए 100 अनुभवी हलवाइयों की टीम ने दिन-रात मेहनत कर 'मालपुआ, खीर और आलू की सब्जी' तैयार की। भंडारे की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें:
100 क्विंटल से अधिक आटा
60 क्विंटल आलू और 50 क्विंटल गुड़
240 कट्टी तेल/डालडा
600 लीटर दूध और 20 क्विंटल चावल का उपयोग हुआ।
पंचायतों ने निभाई सामूहिक जिम्मेदारी
नर सेवा ही नारायण सेवा के मंत्र को साकार करते हुए आसपास की ग्राम पंचायतों ने व्यवस्थाओं का जिम्मा संभाला। सतनवाड़ा कलां ने तेल-मसाले, सतनवाड़ा खुर्द ने आटा, ग्राम ठेह ने आलू-चावल और ग्राम काकर ने शक्कर की व्यवस्था की। वहीं करई, बारा और नयागांव जैसे गांवों के दूधियों ने दूध सेवा प्रदान की।
आध्यात्मिक यात्रा और समापन
कभी घने जंगलों के बीच सुनसान पड़े इस स्थान को संत आकाश भारती महाराज और ब्रह्मलीन श्री श्री 1008 श्री भैरों दास महाराज ने एक सिद्ध धाम के रूप में विकसित किया। 3 जनवरी से शुरू हुए इस उत्सव में आचार्य कृष्कांत की रासलीला ने भक्तों को भावविभोर कर दिया। समापन के दिन 1 किलोमीटर लंबी कलश यात्रा निकली, जिससे पूरा क्षेत्र केसरिया रंग में रंगा नजर आया।