Shivpuri News- मेडिकल कॉलेज सुपरवाइजर की ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से मौत, सवाल कर रहे व्यवस्था पर अटैक

शिवपुरी। शिवपुरी का मेडिकल कॉलेज जो अपने अस्तित्व में आने से पहले ही विवादों में रहा। कागज का टुकड़ा से निरूपति किया गया। बनने के बाद श्रेय को होड और कोरोना काल में मौत के ताबूत जैसे नामो से उपमा लेने वाला अपना शिवपुरी का मेडिकल कॉलेज पर फिर विद्रोही की मौत पर सवाल खड़े हो रहे। सवालो के अटैक हैं बचाव मेंं घिसा हुआ जवाब शासन को लिख दिया हैं।

मेडिकल कॉलेज में कोई कॉर्डियालॉजिस्ट ही नहीं है

जैसा कि विदित हैं कि मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में शनिवार को कॉलेज में ड्यूटी के दौरान ही सुपरवाइजर अभिषेक शर्मा को सुबह करीब 10.30 हार्ट अटैक आया। आनन-फानन में मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में ही उसका इलाज शुरू किया गया, लेकिन जल्द ही चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर दिए, क्योंकि मेडिकल कॉलेज में अब तक कोई कॉर्डियालॉजिस्ट ही नहीं है।

ऐसे में जिस मेडिकल कॉलेज में जिलेभर के मरीज रेफर होने थे, उन्हें खुद अपने कर्मचारी को दूसरे मेडिकल कॉलेज में रेफर करना पड़ा। हालांकि ग्वालियर में भी उसकी जान नहीं बचाई जा सकी और शनिवार देर रात अभिषेक ने दम तोड़ दिया। इस एक मौत ने एक बार फिर मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं पर विद्रोही की मौत के बाद सवालो के अटैक हो रहे हैं।

हार्ट का मरीज कैसे तय करे 120 किमी का सफर

हार्ट अटैक आने के बाद मरीज की जिंदगी के लिए एक-एक सेकंड बहुत कीमती होता है। जब जिले में इलाज नहीं मिल पाता तो उसे ग्वालियर रेफर करना पड़ता है जो 120 किमी दूर है। इस दूरी को तय करने में दो घंटे का समय लगता है और तब तक मरीज की सांसे संकट में ही रहती हैं। इस कारण से कई मरीज दम भी तोड़ देते हैं।

मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञों की कमी

मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट जैसी सुपरस्पेशियलिटी के चिकित्सक नहीं हैं। इतना ही नहीं यहां पर एंजियोप्लास्टी की व्यवस्था भी नहीं है। एंजियोप्लास्टी के लिए काफी मशीनरी और तकनीक लगती है। मेडिकल कॉलेज की ओर से चिकित्सकों की डिमांड भेजी हुई है, लेकिन अभी तक यह पूरी नहीं हुई है। जिले में 20 लाख से अधिक आबादी के इलाज के लिए एक कार्डियोलॉजिस्ट भी नहीं है।


सिर्फ जिला अस्पताल में ही आते हैं 100 से ज्यादा मरीज

यदि जिले में ह्रदय रोग की बात करें तो महीने भर में 100 से ज्यादा मरीज दिल में दर्द की शिकायत लेकर पहुंचते हैं। इसमें से 50 फीसद मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। यह मरीज मेडिकल कॉलेज नहीं, बल्कि ग्वालियर रैफर किए जाते हैं। यहां भी कारण यही है कि जिला अस्पताल में भी कोई हार्ट स्पेशलिस्ट नहीं है। अच्छे चिकित्सकों की कमी जिले की आबादी की दिल की सेहत के लिए खतरा साबित हो रही है।

डॉक्टर चाहते ही नही है मेडिकल कॉलेज में इलाज करना

यह बात 100 प्रतिशत सत्य है कि शिवपुरी के मेडिकल कॉलेज में पदस्थ डॉक्टर कॉलेज के अस्पताल में इलाज करना ही नही चाहते है। मंशा साफ है प्रत्येक डॉक्टर के अपने चिकित्सालय हैं,और डॉक्टर प्राइवेट नर्सिंग हॉम में सेवा दे रहे है। अगर कालेज में नि:शुल्क इलाज और जांच मिलने लगेगी तो डॉक्टरों के कमाई पर असर होगा।

इनका कहना है
मरीज को दो हार्टअटैक एक साथ आए थे। ऐसी स्थिति में एंजियोप्लास्टी की जरूरत थी और इसी कारण उसे ग्वालियर रेफर किया गया। वहां उसे तीसरा अटैक आ गया था। हमारे यहां पर सुपर स्पेशियलिटी की सुविधाएं नहीं हैं। इसके लिए शासन को डिमांड भेजी गई है।
केबी वर्मा, अधीक्षक, जीएमसी।