शिवपुरी। कहते हैं कि एक मां अपने बच्चों का जीवन बनाने के लिए स्वयं का जीवन दाव पर लगा देती है। आज महिला दिवस पर हम पूरे 63 हजार बच्चो की मां से परिचय कराते हैं जिन्होने अपना जीवन ही इन बच्चो की शिक्षा,संस्कार पर ही दान कर दिया हैं। एकल विद्यालय मप्र भाग की एक माई श्रीमति ज्योति मजेजी से।
मध्य भारत भाग शिवपुरी के एकल विद्यालय की माई श्रीमति ज्योति मजेजी 63 हजार बच्चो के शिक्षा,स्वास्थ्य ग्राम विकास और संस्कार की जिम्मेदारी इन्ही के ऊपर है। एकल अभियान मध्य भारत भाग एक शिवपुरी में शिवपुरी, श्योपुर,गुना,बरेली,डबरा,मुरैना और होशंगाबाद के लगभग 2100 ग्राम विद्यालय हैं और इन विद्यालयों में 63 हजार ग्रामीण वनवासी बालक अध्ययनरत हैं।
इन बच्चो को कक्षा 1 से 4 तक की आपचारिक शिक्षा दी जाती है। आपचारिक शिक्षा में बच्चों को स्वास्थ्य शिक्षा,जागरण शिक्षा,आरोग्य,संस्कारों की शिक्षा,ग्राम विकास शिक्षा दी जाती है। श्रीमति ज्योति मजेजी ने बताया कि 12 जनवरी 2006 विवेकानंद जयंती के दिन से मैने एकल की दिशा में काम करना शुरू कर दिया था।
हमारी शिक्षा पद्धति थी कि गुरू आश्रमो में रहकर शिक्षा का दान करेंगे और नगर के लोग उन विदयालयो का भरण पोषण करेंगेें। एकल विद्यालय में बच्चों का 3 घंटे का पाठ्यक्रम होता हैं,एकल का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ हैं आस पास के स्कूलों में ड्रॉप आउट रेट काफी कम हुआ है।
एकल विदयालयो का उद्देश्य जो वनवासी बच्चे शिक्षा से वंचित रह गया हैं। एकल का समाज पर इतना प्रभाव पडा है कि कश्मीर में पत्थरबाजी वहां नही होती जहां एकल विद्यालय होते है। एकल में कृष्ण सुदमा के चरित्र को चरित्रार्थ किया जाता है। भारतीय संस्कृति से रूबरू कराया जाता हैं। धर्मांतरण और मातांररण नही होता हैं।
श्रीमति ज्योति मजेजी ने बताया कि यह विद्यालय केवल समाजिक दान से चलते हैं सरकारी कोई अनुदान नही चलता,एक बच्चे का प्रतिदिन शिक्षा का 3 रूपए दान लिया जाता हैं। हम राम जी की वनवासी सेना के सैनिक है हम झोली फैलाकर उनके शिक्षा के लिए दान मांगते हैं हमने अपना जीवन अब इन बच्चो के शिक्षा दान के लिए दान कर दिया हैं। हम इन बच्चो को सामाजिक मुख्यधारा में लाना चाहते हैं देश भक्ति की भावना हो समाज कल्याण की भावना हो,हमारी संस्कृति पर अटल विश्वास हो,इसलिए में एकल के साथ जुड़ी हूं।