गायब हो गई बजरिया से घुंघरू की आवाज और तबले की थाप, पिछले 100 वर्षो से संचालित है रेड लाइट एरिया

शिवपुरी। पुरानी शिवपुरी का बजरिया मोहल्ला जिसे अब रेडलाइट ऐरिया कहा जाता है। लगभग 100 वर्षो से यहां बेडिया जाति की युवतियां देह व्यापार के पेशे में सलग्न है। बताया जाता है कि यहां शाम होते ही घुंघरुओं की आवाज और तबले की थाप सुनाई देती थी लेकिन अब यह शहर का वह बदनाम हिस्सा हैं जहां खुलेआम जिस्म बिकता है। इनके जीवन के स्तर को सुधारने के लिए एक बार प्रशासन ने बड़ा बदलाव किया था लेकिन इस समाज में पीढ़ियों से होने वाले इस रिवाज को इस आधुनिक युग में यह छोडना नही चाहते है। लेकिन अन्य समाजों की तुलना में एक बड़ी सामाजिक अच्छाई भी हैं इस बेडिया समाज में।

जिस्म बेचने वाली महिला की कराई थी शादी

शिवपुरी में पदस्थ रहे पूर्व कलेक्टर डॉ आलोक शुक्ला ने इस जाति की महिलाओं का जीवन स्तर सुधारने के लिए इस बदनाम मोहल्ले में धंधा करने वाली महिलाओं की शादी कराई थी जिससे यह जीवन को त्याग कर एक नई दिशा मे कदम रखे,लेकिन धीरे धीरे इन महिलाओं ने फिर से यही धंधा अपना लिया।

सामाजिक मान्यता प्राप्त हैं इस गैर मान्यता प्राप्त बिजनेस

भारत में बेडिया जाति एक ऐसी जाति हैं जिसे जिस्म बेचने के धंधे का धंधे की समाजिक मान्यता प्राप्त है,हालाकि भारत के कानून में जिस्म बेचना अपराध हैं,लेकिन यह अपराध इस बजरिया मोहल्ले में प्रतिदिन होता है। इस धंधे में लिप्त कई महिलाएं गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं। प्रशासन अपने स्तर पर इसकी कोई जांच भी नही करवाता हैं जिससे एड्स जैसी गंभीर बीमारियों का भी पनपने का डर है।

यहां इन महिलाओं के भाई बॉडी गार्ड की भूमिका में रहते है

इस समाज में कुछ अविवाहित युवतियों को देह व्यापार के चंगुल में धकेल दिया जाता है और वह युवती फिर पूरे परिवार का भरण पोषण करती है। इस समाज के अधिकांश युवा अपनी बहनों पर आश्रित रहते हैं और एक तरह से उनके बॉडीगार्ड का काम करते हैं। वहीं दूसरी ओर इस समाज में विवाहित युवतियां इस गलीज पेशे से दूर रहती हैं और घर में घूंघट के बीच खाने बनाने से लेकर बच्चों के पालन पोषण का कार्य करती हैं।

बदनाम मोहल्ले का नाम विदेशो तक

बेडिय़ा समाज की युवतियां अरब देशों तक की शोभा बढ़ा चुकी हैं और देश के मु बई, मेरठ, दिल्ली, लखनऊ सहित अनेक महानगरों में देह व्यापार का कार्य कर रही हैं। पांच वर्षों से पूर्व पुरानी शिवपुरी के बजरिया मोहल्ले में मुजरों की धूम हुआ करती थी और देह व्यापार से ये युवतियां परहेज करती थीं। लेकिन अब खुलेआम यहां देह व्यापार हो रहा है और अधेड़ महिलाएं इस व्यापार को संचालित कर रही हैं।

अपने धंधे को चमकाने के लिए वह दूर दूर से नाबालिग लड़कियों को लाकर इस गंदे पेशे में ढकेल रहीं हैं। सुबह से लेकर देर रात तक यहां देह व्यापार का कारोबार ाुलेआम होता है इसमें बताया जाता है कि पुलिस का भी हिस्सा रहता है।

जब पूरे सामाज में भी यह बुराई, जब थी इस समाज में यह सच्चाई

देश में लेगिंग अनुपात में अंतर हैं 100 पुरुषों पर 943 महिला है। यह लेगिंग अनुपात किसी एक समाज के कारण नहीं हुआ हैं सभी समाज के व्यक्तियों के कारण यह सरकारी आंकड़े हैं। बेटियों को जन्म के बाद या कोख में कत्ल करने के कारण ही यह लेगिंग अंतर आया हैं सरकार करोडो का बजट ठिकाने लगाकर लोगो को जागरूक कर रही है कि बेटा बेटी एक समान। बेटियों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं सरकार बना रही हैं।

जिस्म बेचने की सामाजिक बुराई को मान्यता देने वाली यह बेडिया समाज बेटियों के पैदा होने पर खुशी मनाते हैं। इस समाज में पैदा होने वाली बेटियों को कभी जन्म के बाद मारा नहीं गया और न ही कोख में कत्ल किया। जिस्म बेचने वाले इस समाज में बेटियों को मारने की सामाजिक बुराई नही है।