बैंक मैनेजर की नौकरी छोड योगेश अपनी फसलो को मैनेज कर रहे है: 60 बीघा जमीन पर पर 140 बीघा की पैदावार - starts of shivpuri

Bhopal Samachar
संजीव जाट बदरवास। जैसे आज के इंसान की जीने की जीवन शैली बदली है। वैसे ही सादियो से हो रही खेती की अब शैली बदलने लगी है। धरती पर जनसंख्या का बढ़ता बोझ हमारी खेती की जमीन को कम कर रहा है,लेकिन बैंक मैनेजर की नौकरी छोड़कर अपने खेतों को मैनेज करने निकले योगेश रघुवंशी ने 60 बीघा जमीन पर 140 बीघा की पैदावार करने में सफलता हासिल की हैं। पढ़ लिख बैंक के मैनेजर तक की कुर्सी संभालने वाले योगेश अब खेतो को मैनेज कर रहे हैं,वह सभी किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना चाहते हैं,जिससे लोग शहरों की ओर न जाए।

बदरवास निवासी योगेश रघुवंशी बताया ने बैंक आफ महाराष्ट्र में बैंक मैनेजर के तौर पर चार साल तक नौकरी की, लेकिन नौकरी में यो संतुष्टि नहीं मिल पाई जो योगेश चाहते थे। बकौल योगेश बार-बार यही मन करता था कि शहर की भगदड़ से दूर वापस अपनी प्रकृति के बीच जाए इसलिए फरवरी 2016 में बैंक की नौकरी को छोडकर बदरवास के पास अपने गांव ढुंगाल आ गया। योगेश की ग्राम ढुंगाल में 125 बीघा जमीन है। जिस पर पहले साल में सिंचाई के लिए लिप सिस्टम (खेतों में पानी देने का सिस्टम) लगवाया। इसके बाद सब्जियों का उत्पादन शुरू किया,जो सफल रहा।

नेट पर सर्च किया विश्व के बड़े कृषि उत्पादक देशों की तकनीक को
योगेश ने बताया कि मैने नेट पर सर्च किया कि दूसरे देशों में खेती कैसे की जा रही हैं। सबसे ज्यादा ताकतवर खेती फिलीपींस में की जाती हैं वह एक फसल के साथ दो फसल कैसे ली जाती हैं इस पर फिलीपींस एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के प्रयोग का मैने अपने खेतों में प्रयोग किया और मुझे सफलता मिली।

साल में 4 फसल:हमारी जमीन की कमी को करेगी पूरा
योगेश ने कहा कि एक साथ दो फसलों के बाद साल में चार फसल लेने पर प्रयोग चल रहा हैं। आप तारो के जाल बनाकर सब्जी के बेलो को ऊपर की ओर ले सकते हैं जिससे नीचे खेत खाली रहेंगें,नीचे धनिया,अदरक मिर्च जैसी कोई भी सब्जी की पैदावार कर सकते हैं। यह प्रयोग कोई भी कर सकता है। आज कल बढ़ते परिवार के साथ खेती की जमीन भी कम हो रही हैं। आप के यह प्रयोग अपनी पैदावार चार गुनी कर सकते है।

20 हजार के लिए परिवार से दूर ना हो
किसान का बेटा 20 हजार की नौकरी करने अपने परिवार को नही छोडे वह अपने खेतो को ताकतवर बनाए। मेरा सभी किसान परिवारों से कहना है कि वह अपने बच्चो को शिक्षा अवश्य दे,क्योंकि शिक्षा ही हमें नए प्रयोग सिखाते हैं हमारे आत्मविश्वास को बढाती हैं,आप अपने गांव में रहकर भी शहरों से अधिक कमा सकते है आप अपने परिवार और गांव से दूर नही होगें,क्यो की जब भारत की सोने की चिड़िया थी जब शहर नहीं थे गांव संपन्न दे,आधुनिकता की दौड़ में गांव पिछड गए हैं इसलिए हमारी संस्कृति भी धीरे धीरे बदल रही है। कहते है कि असली भारत गांवों में ही बसता हैं इसलिए गांवो को विकासशील बनाना होगा। इतना ही योगेश खेती के साथ साथ प्रत्येक किसान के बच्चों को शिक्षित करना चाहत है। इसलिए वह प्रतिदिन सुबह के समय बच्चों को पढ़ाते हैं।
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