हड़ताल फैशन हो गया है। जिसके पास टीम होती है वह चाहे जब हड़ताल पर चला जाता है। परेशान जनता को होना पड़ता है। बिजली कंपनी के असिस्टेंट इंजीनियर रणजीत सिंह भदौरिया की पिटाई का मामला विशुद्ध रूप से दो पक्षों की लड़ाई है। बिजली कंपनी का सिक्योरिटी गार्ड लोगों जेल भेजने की को धमकी दे रहा था। असिस्टेंट इंजीनियर उसका समर्थन कर रहे थे। एक पक्ष ने पद का दुरुपयोग किया और दूसरे पक्ष ने कानून हाथ में ले लिया।
रणजीत सिंह भदाैरिया ने पुलिस को शिकायत सौंपी। पुलिस ने अपने कर्तव्य का पालन किया। मामला दर्ज कर लिया गया। अब इन्वेस्टिगेशन होनी है। किसी भी वीडियो को सत्य प्रमाणित करने के लिए एक तकनीकी प्रक्रिया से गुजरना होता है। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती तब तक वायरल वीडियो को जनता के बीच सही माना जा सकता है लेकिन कोर्ट में सही साबित नहीं किया जा सकता।
मामला बेहद गंभीर नहीं है। रणजीत सिंह भदाैरिया को जान का खतरा नहीं है। पुलिस अपना काम कर रही है लेकिन फिर भी दबाव बनाया जा रहा है। पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करे, इसके लिए रणजीत सिंह भदाैरिया ने बिजली कंपनी के कर्मचारियों को हड़ताल पर भेज दिया। जनता को परेशान कर रहे हैं।
रणजीत सिंह भदाैरिया जी, जनता से क्या दुश्मनी है। जिन लोगों से दुश्मनी है उन लोगों की बिजली काट दो। पुलिस यदि आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर रही, तो एसपी ऑफिस, एसपी के बंगले, पुलिस लाइन, थाना कोतवाली और टीआई के घर की बिजली काट दो। जनता को तंग क्यों किया जा रहा है। इसे हड़ताल नहीं तानाशाही कहते हैं। इतिहास गवाह है, जनता ने कभी किसी तानाशाह का साथ नहीं दिया। सुरेश प्रभु शिवपुरी शहर
